कारपोरेट जगत के बड़े-बड़े उद्योगपति अब साड़ी और रेडीमेड कपड़े के व्यवसाय में आ गए हैं। जिसके कारण असंगठित क्षेत्र के लाखों व्यापारी जो छोटी- बड़ी दुकान लगाकर व्यापार करते थे। वह इन कारपोरेट उद्योगपतियों के सामने बेबस होकर अपने व्यवसाय में बड़ा नुकसान उठा रहे हैं। इसमें हजारों कारोबारी दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
टाटा, बिरला, अंबानी जैसे बड़े बड़े कारपोरेट जगत के लोग अब साड़ी के व्यवसाय में, असंगठित क्षेत्र के व्यापारियों को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। रिटेल सेक्टर में जिस तरीके से असंगठित क्षेत्र के कारोबारियों को बर्बाद किया जा रहा है। उससे आने वाले समय में देश में बेरोजगारी बढ़ी तेजी के साथ बढ़ेगी।
टाटा समूह तनेरिया ब्रांड के नाम से, रिलायंस ट्रेड्स के अवन्तरा, तथा आदित्य बिड़ला समूह ने नव्यासा बाय लीवा ब्रांड के नाम से साड़ियों के कारोबार में प्रवेश कर लिया है। साडी मार्केट में कारपोरेट ब्रांड धूम मचा रहे हैं। जिसके कारण परंपरागत कारोबारी और छोटे दुकानदार इन धनपशुओं के आर्थिक आधार को चुनौती नहीं दे पा रहे हैं। रिटेल कारोबार बड़ी तेजी के साथ भारत और दुनिया के बड़े बड़े धन्ना सेठों के पास शिफ्ट हो रहा है भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।










































