हुजूर सामान्य वर्ग भी आपका मतदाता है,जरा नजरें इनायत तो कीजिए !

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(उमेश बागरेचा)
बालाघाट (पदमेश न्यूज) । जिला पंचायत के निर्वाचित सदस्यों को कल जिला निर्वाचन अधिकारी के हस्ते प्रमाण पत्र वितरण के पश्चात अब जिलेवासियों तथा राजनीतिज्ञों की नजरे जिला पंचायत की ओर लगी हुई है कि आगामी 29 जुलाई को जिलापंचायत की अध्यक्ष की कुर्सी पर कौन भाग्यशाली आसीन होता है । 27 सदस्यीय जिला पंचायत सदस्यों की दलगत सदस्य संख्या में सर्वाधिक सदस्य 14 कांग्रेस समर्थित है। जो कांग्रेस की जिला सरकार बनाने के लिए आवश्यक आंकड़ा को पूर्ण करता है। भाजपा समर्थित मात्र 6 प्रत्याशी जीते है ,उन्हें बहुमत के लिए आवश्यक 8 और सदस्य चाहिए जो उनके पास नही है ,  निर्दलीय 6 तथा गोगपा 1 मिल भी जाए तब भी भाजपा समर्थित को कुर्सी नहीं मिल सकती ,यह संभव भी नहीं है क्योंकि अधिकांश निर्दलियों का रुझान कांग्रेस के समर्थन में जाता प्रतीत हो रहा है। यह भी उल्लेखनीय है कि भाजपा द्वारा अपना अध्यक्ष बिठाने का कोई प्रयास भी नही किया जा रहा  है , यदि कांग्रेस में से ही कोई अपनी सामाजिक उपस्थिति को लेकर भाजपा से कोई गणित बिठाने की कोशिश करे तब भी आवश्यक सदस्य संख्या गठजोड़ में पूरी होती नहीं दिख रही है। ऐसे में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के दावेदारों के लिए पार्टी लाइन में चलना ही श्रेष्ठ होगा ।
ज्ञात हो कि अध्यक्ष पद सामान्य है ,ऐसे में राजनीति की समझ रखने वालो का मानना है कि अध्यक्ष का पद जब सामान्य के लिए है तो उस पर सामान्य व्यक्ति को ही आसीन होना चाहिए। जिला पंचायत बालाघाट में सामान्य जाति से अध्यक्ष आसीन होगा तो यह 20 वर्षो में पहला अवसर होगा। इस पद पर आदिवासी महिला सहित ओबीसी महिला लगातार 20 वर्षो से पदस्थ रही है, इस स्थिति में सामान्य को अवसर ही नहीं मिला, सामान्य तो छोड़ो महिलाओं के आगे उस वर्ग के पुरुषों को भी मौका नहीं मिला। सो अब अवसर है तो राजनीति हल्के में चर्चा है कि सामान्य को ही अवसर मिले, चर्चा में यह भी है कि वर्तमान में जिले की जो राजनीति भाजपा तथा कांग्रेस में चल रही है वह जाति आधारित चल रही है। दिल्ली – भोपाल के नेता इस मुगालते में है कि जिले की सांसद की सीट हो विधानसभा की सीट हो या संगठन का प्रमुख पद हो उसमे जाति विशेष को ही मौका देने से सफलता मिलेगी, खासकर पवार एवं लोधी समाज पर विशेष कृपा बरसती और इनसे कहीं कुछ थोड़ा बचता है तो उसमें अब मरार और कलार दावा ठोंकने लगे है। ऐसे में सवाल उठता है कि सामान्य वर्ग के लिए इनके पास क्या कोई स्थान है? जब सामान्य की श्रेणी रखी गई है तो सामान्य को भी मौका दिया जाना चाहिए अन्यथा नीति निर्धारकों को चाहिए कि सामान्य श्रेणी की व्यवस्था ही समाप्त कर देवे। कांग्रेस आलाकमान की एक समाज विशेष जो जिले में संख्या के आधार पर दूसरे क्रम पर है पर विशेष कृपा रहती है जबकि सर्वविदित है कि इस समाज विशेष का वोट बैंक जिले में वर्तमान में पूर्णत: भाजपा की ओर आकर्षित है ।एक अन्य समाज जिनकी संख्या तीसरे क्रम पर आती है वह भी कांग्रेस से बहुत दूर जा चुकी है,क्योंकि  कांग्रेस के पास  वर्तमान में इस समाज से कोई ऐसा प्रभावशाली नेता ही नहीं है जो इस समाज के वोट बैंक को कांग्रेस की झोली में डलवा सके । वैसे देखा जावे तो जिले में सर्वाधिक जनसंख्या आदिवासियों की है इस दृष्टि से यदि ऊपर वालों के गणित से चले तो भाजपा – कांग्रेस ने संसदीय सीट के लिए आदिवासी समाज के व्यक्ति को अपना प्रत्याशी घोषित करना चाहिए, लेकिन इन दोनों ही दलों ने आदिवासी समाज को अभी तक कोई मौका नहीं दिया । जब भी टिकिट की बात हो या संगठन की बात हो खासकर कांग्रेस में बस दो ही समाज का चश्मा चढ़ा रहता है । इस बात के पक्ष में इनके समर्थक कहेंगे कि  इन जाति विशेष के लोग ही तो यहां से जीतकर विधान सभा लोकसभा में जाते है तो इसका सीधा  सा जवाब यही है कि जब दोनों ही दल इन जाति विशेष के ही लोगों को टिकिट देकर लड़ा रहे हैं तो इनमे से ही तो कोई एक जाति विशेष का व्यक्ति ही जीतेगा ।

एक जवाब और है कि  जब जब अन्य सामान्य वर्ग के लोगों को मौका मिला है उन्होंने इन्ही जाति वर्ग के लोगों को परास्त कर विधान सभा ,लोकसभा में  नेतृत्व किया है , जिनमें श्री कचरूलाल जैन , कृष्ण रंजन खरे,  डॉक्टर निर्मल हीरावत,  डॉक्टर योगेंद्र निर्मल , अशोकसिंह सरसवार, और इनमें शामिल पंडित नंदकिशोर शर्मा का नाम ऐसा है जिन्होने कई वर्षो तक विधान सभा एवं लोक सभा का नेतृत्व किया और इन सभी ने जिले के ही जाति विशेष के प्रत्याशियों को पराजित कर नेतृत्व किया है । इस दृष्टि से अब जबकि पहली बार जिला पंचायत में अध्यक्ष पद के लिए सामान्य को अवसर आया है तो उसे मौका दिया जाना जिले के सामान्य वर्ग के लिए तो श्रेयस्कर  होगा ही कांग्रेस के लिए भी एक अच्छा अवसर होगा, क्योंकि यह सर्वविदित है कि जिले में कांग्रेस का संगठन चरमराया हुआ है। खासकर मुख्यालय बालाघाट में तो कांग्रेस संगठन की स्थिति तो और चिंताजनक है । जिले में कांग्रेस के जो विधायक है खासकर हीना कावरे और संजय उईके ये दोनों ही अपनी काबिलियत एवं जमीनी नेता की श्रेणी में होने चलते सफल हो रहे हैं और अब 27 सदस्यों वाली जिला पंचायत में जब बहुमत के 14 सदस्य कांग्रेस के पास है तो उसे सर्वानुमूति से सामान्य वर्ग के व्यक्ति को अध्यक्ष का प्रत्याशी घोषित किया जाना पार्टी हित में माना जा रहा है और यदि ऐसा होता है तो जिले में कांग्रेस संगठन मजबूती मिलेगी अन्यथा कहीं ऐसा ना हो जावे कि 6 सदस्यों वाली भाजपा कांग्रेस में रायता बगराकर एक बार फिर वर्षो पूर्व की भांति बिना बहुमत के अध्यक्ष पद हथिया ले।

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