जिला मुख्यालय से निकट ग्राम नैतरा में पिछले कुछ दिनों से एक अज्ञात हिंसक वन्य प्राणी की दहशत बनी हुई है। ग्रामीणों की माने तो लगातार कोई हिंसक जानवर रात्रि में ग्राम में पहुंचकर मुख जानवरों पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार देता है।लेकिन लोगों को नजर नहीं आता। लगातार बढ़ रही इन्ही घटनाओं के बीच 16 अगस्त शुक्रवार की सुबह एक परिवार के तीन बकरियो को उस अज्ञात प्राणी ने अपना शिकार बनाया है।जहा घर के बाहर बने बकरियो के कोठे में मृत अवस्था में बकरियां पाई गई तो परिवार जनों ने सरपंच सहित वन अमले को सूचित किया। मौके पर अमला तो पहुंचा लेकिन कोई संतोषजनक कार्रवाई नही की गई।जिसको लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। बताया जा रहा है कि वन अमले ने जो पंचनामा तैयार किया था।उस पंचनामा में कुत्ते (श्वान) के काटने से बकरियों की मौत होना बताया गया था. जिसपर पशुपालक किसान ने वनकर्मियों द्वारा बनाए गए पंचनामें में हस्ताक्षर नहीं किए।वही ग्रामीण नाराज हो गए और उन्होंने श्वान की जगह वन्य प्राणी के काटने से मृत्यु होना बताते हुए बकरी पालक किसान को मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
भूरा ,सफेद और धारदार पत्ती वाला जानवर है?
कुछ ग्रामीण बताते हैं कि सफेद और धारदार पत्ती वाला जानवर है जो अभी तक गांव में लगभग 100 से अधिक बकरियो को अपना शिकार बन चुका है।ग्रामीण बताते है कि वन अमले को भी सूचित किया जाता है तो वन अमले द्वारा टाल मटोल किया जा रहा है। वह ग्राम नैतरा सरपंच संतोष लिल्हारे ने इस मामले में वन अमले पर औपचारिकता निभाने का आरोप लगाया है। जिन्होंने अज्ञात वन्यप्राणी को पकड़ने के साथ साथ बकरी मालिक को उचित मुआवजा भी दिए जाने की मांग की है।
घरों में कैद रहने को मजबूर है ग्रामीण- लिल्हारे
इस पूरे मामले को लेकर की गई चर्चा के दौरान ग्राम पंचायत नैतरा सरपंच संतोष लिल्हारे ने बताया कि ग्राम नैतरा में कुछ ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने एक जंगली जानवर देखा है जिसकी ऊंची मुंडी है।जो भूरा रंग का है। कुछ ग्रामीणों द्वारा उस जानवर को खदेड़ने की भी बात कही जा रही है। जो करीब एक माह में 80 से 90 बकरियों को मार चुका है।उस खूंखार वन्यप्राणी के चलते लोगों का घरों से बाहर निकलना दूभर हो चुका है। लोग रात्रि में अपने घरों पर कैद रहने के लिए मजबूर है।आज भी एक किसान की दो-तीन बकरियां मृत पाई गई है।इस पर वन विभाग को सूचित किया गया।उन्होंने आकर पंचनामा बनाया जिसमें श्वान के काटने से बकरियो की मौत होना लिखा गया है। इसीलिए बकरी मलिक ने पंचनामा पर साइन नहीं किया क्योंकि श्वान इस तरह से नहीं काटता है। बकरियों की गर्दन मरोड़ कर मर गया है हम चाहते हैं कि वन विभाग इसमें मुआवजा दे।वहीं उक्त हिंसक वन्य प्राणी को पकड़ कर ग्रामीणों को राहत पहुंचाई जाए।










































