जिले में नही है रोजगार के पर्याप्त साधन

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आज भी मजदूर रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर दिखाई दे रहा है। प्रतिवर्ष मजदूर रोजी रोटी की तलाश में हैदराबाद, नागपुर जैसे बड़े शहर का रूख करते है। एक तो इन स्थानों में उन्हे उचित मजदूरी भी मिलती है वही खाने पीने की सुविधा भी प्राप्त होती है। मजदूरों का इस तरह पलायन करने के पीछे का कारण बालाघाट जिले में रोजगार के अभाव को माना जाता है। एक तो इतनी महंगाई होने के बाद भी उन्हे उनके परिश्रम का वो मेहताना नही मिल पाता जिसके वे हकदार है। साथ ही उन्हे प्रतिदिन रोजगार मिलने की संभावना भी नही रहती। जिसकी वजह से ही मजदूर अन्यत्र बड़े शहरो में रोजगार की तलाश में चले जाते है। जिसकी वजह से ही कई मर्तबा जिले में मजदूरों का टोटा बन जाता है।
पद्मेश को जानकारी देते हुये जगदीश परते ने बताया कि वे बांस कटाई के लिये छत्तीसगढ़ जा रहे है। वर्तमान में वारासिवनी क्षेत्र में उन्हे रोजगार नही मिल पा रहा है। जिसकी वजह से वे रोजगार के लिये छत्तीसगढ़ जा रहे है। जहां वे बांस कटाई कर अपना खर्चा निकालने के बाद कुछ पैसा अपने परिवार को भेज देंगे। श्री परते ने बताया कि अगर जिले में ही कोई उद्योग धंधे खुले तो मजदूरों का पलायन नही होगा। हम लोगो को कई कई दिन काम न मिलने के कारण खाली बैठना पड़ता है। ऐसे में हम लोग गरीब मजदूर है हमारा घर कैसे चलेगा। इसी वजह से हम लोग अन्यत्र शहर में जाकर रोजगार करते है। जहां इतना तो पैसा मिलता है कि हम अपने परिवार का पालन पोषण कर सके।
इसी तरह नागेश गजभिये ने पद्मेश को बताया कि हम गरीब मजदूर वर्ग से ताल्लुक रखते है। अगर हमे वारासिवनी या बालाघाट में ही रोजगार पूरे ३६५ दिन मिले तो हम लोग अपना परिवार छोड़कर क्यो अन्यत्र बड़े शहरो में रोजगार की तलाश में जायेंगे। हमारी मजबूरी है कि हमे दूसरे शहर में जाकर रोजगार करना पड़ रहा है। हमारे जिले में भी उद्योग धंधे खुलना चाहिये ताकि जिले का मजदूर पलायन न करे। मगर ऐसा हो नही पा रहा है। इसी कारण से हम लोगो को अपने शहर से पलायन कर दूसरे शहर रोजगार के लिये जाना पड़ रहा है। हालांकि हम लोगो को मजदूरी भी अच्छी मिल जाती है जो पैसा बचता है उसे परिवार को भेज देते है। वर्तमान में हम सभी लोग छत्तीसगढ़ जा रहे है।

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