पंचायत क्षेत्र के लिए यह काला कानून है – वैभव

0

नगर मुख्यालय स्थित जनपद पंचायत के सभाकक्ष में १२ जुलाई को ब्लॉक सरपंच की बैठक संपन्न हुई। यह बैठक सरपंच संघ जिलाध्यक्ष वैभवसिंह बिसेन, ब्लॉक अध्यक्ष चेतन पटले, बकोड़ा सरपंच श्रीमती पुष्पा नागेश्वर, व्यंकट रहांगडाले सहित अन्य सरपंचों की उपस्थिति में प्रारंभ हुई। आयोजित बैठक में मध्यप्रदेश शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा गत १ जुलाई को एक पत्र जारी करते हुए मनरेगा योजना अंतर्गत सामग्री मद में व्यय और कार्याे की स्वीकृत को लेकर नये आदेश व निर्देश जारी किये गये है। जिसके चलते मनरेगा योजना अंतर्गत व अनेक कार्य जिनमें सामग्री मद अधिक राशि व्यय होना कई जिलों में सामने आया है वह कार्य स्वीकृत नहीं हो सकेंगे। साथ ही १८ प्रकार के कार्योंको भी मनरेगा से स्वीकृत किये जाने के निर्देश दिये गये है एवं यह कार्य मजदूरों से पूरे किये जायेगेंं जिससे ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना से जो विकास कार्य करवाये जाते है उन कार्यों पर विराम लग सकता है जिससे सरपंचों को कार्य करने में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए बैठक में सरपंचों ने सरकार के द्वारा जो मनरेगा योजना को लेकर आदेश जारी किया गया है उसे निरस्त किये जाने की मांग की है और उक्त मांगे पूरी नही होने पर आंदोलन करने की रणनीति भी तैयार की गई है। आपकों बता दे कि शासन के द्वारा गत दिवस मनरेगा योजना को लेकर एक पत्र जारी किया गया है कि मनरेगा योजना के तहत पंचायतों में ६०-४० के मापदण्ड के अनुसार काम किये जायेगें जिसके बाद से पंचायत सिस्टम में खलबली मची हुई है और आदेश के विरोध में सरपंचों के द्वारा नाराजगी व्यक्त करते हुए विगत दिवस जिला सरपंच संघ बालाघाट के द्वारा कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कार्याे की स्वीकृत को लेकर १ जुलाई को जारी किये गये आदेश एवं निर्देश को निरस्त किये जाने की मांग की गई थी परन्तु उसे अब तक निरस्त नही किया गया है जिससे सरपंचों में शासन-प्रशासन के प्रति आक्रोश व्याप्त है। वहीं सरपंचों का कहना है कि मनरेगा योजना के संदर्भ में शासन द्वारा जो १ जुलाई को पत्र जारी किया गया है उसमें कार्यों के सामग्री मद की राशि को हटा दिया गया है जिससे स्थिति यह हो गई है कि केवल वह ही कार्य पंचायतें करवा पायेगी जो कि मजदूरी से ही किया जा सकता है और सामग्री मद में व्यय होने वाली राशि का प्रावधान कार्यों में काफी कम कर दिये जाने से ग्राम पंचायत में जो जरूरी कार्य अब तक मनरेगा योजना से होते रहे है। वह स्वीकृत नहीं होंगे और विकास कार्य लगभग बंद हो जायेंगे। साथ ही यह भी कहा कि मनरेगा योजना अंतर्गत कार्यों में मजदूरी तथा सामग्री मद का ६०-४० अनुपात प्रावधानित है जो कि कानून के अनुसार है किन्तु पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मनरेगा प्रशासन मध्य प्रदेश द्वारा प्रदेश के कतिपय जिले और विकासखण्डों में प्रावधान से अधिक सामग्री मद पर राशि के व्यय होने पर इस तरह का आदेश १ जुलाई को जारी किया गया है जो कि उचित नहीं हैं इसलिए सरकार से मांग है पंचायत हित में कदम उठाकर तत्काल आदेश को वापस ले अन्यथा सरपंच संघ के द्वारा प्रदेश स्तर पर आंदोलन किया जायेगा जिसकी जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here