तालिबान के सत्ता में आने के बाद भूकंप और भीषण खाद्यान्न संकट की वजह से पैदा हुई परेशानियों में भारत ने संकटग्रस्त अफगानिस्तान का भरपूर साथ दिया है। भारत ने अफगानिस्तान के लोगों की जो मदद की, उसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। एक सर्वे से पता चला है कि 69 फीसदी अफगानिस्तान के लोग भारत को अपना सच्चा दोस्त मानते हैं। अफगानिस्तान की केवल 10 फीसदी आबादी ही पाकिस्तान को अपने ज्यादा निकट महसूस करती है। भारत को लेकर आम लोगों की स्थिति को जानने के लिए पिछले दिनों एक सर्वे किया गया। इस सर्वे में अफगानिस्तान के अतीत, भविष्य और आकांक्षाओं से जुड़े सवाल पूछे गए। आंकड़ों से पता चलता है कि 67 फीसदी अफगान लोगों का मानना है कि अमेरिका गलत तरीके और कुप्रबंध के साथ अफगानिस्तान से निकला।
इस एक्जिट ने पाकिस्तान और चीन को काबुल पर कब्जा करने के लिए तालिबान को प्रोत्साहित करने का मौका दिया। अफगानिस्तान में भारत के सामरिक हित हैं। दोनों देशों के रिश्ते प्राचीन इतिहास से जुड़े हैं और इनके सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। सन 1947 में पाकिस्तान के बनने के बाद भारत और अफगानिस्तान के बीच भौगोलिक रूप से दूरियां आ गई। पाकिस्तान भारत के खिलाफ अफगानिस्तान में अभियान चलाता रहा है, लेकिन अफगानिस्तान के लोगों को इस बात की परख करना आता है कि उनके साथ मुसीबत में कौन खड़ा रहा है। अफगानिस्तान को दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा दान देने वाला देश भारत है। पूरी दुनिया में भारत अफगानिस्तान की मदद के मामले में पांचवे नंबर पर है।
भारत कई तरह से अफगानिस्तान की मदद करता रहा है। अफगानिस्तान में संसद की बिल्डिंग भारत की बनाई हुई है। इसके अलावा अफगानिस्तान के लोगों को भारत लगातार चिकित्सा सहायता दे रहा है। बड़ी संख्या में अफगानिस्तान के छात्र भारत के कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं। हाल ही में बड़ी मात्रा में गेहूं भी भारत ने अफगानिस्तान को भेजा है। सर्वे के मुताबिक 22 प्रतिशत अफगानिस्तान के लोग अमेरिका को अपना सच्चा दोस्त मानते हैं। 10 फीसदी पाकिस्तान, 9 फीसदी रूस, 6 फीसदी सऊदी अरब और 4 फीसदी लोग चीन को अपना दोस्त मानते हैं।









































