गुडरू के सती धाम में शारदीय नवरात्रि पर भक्तों की भीड़, माता की शीला और नाग-नागिन के जोड़े को लेकर क्षेत्र में विशेष आकर्षण
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पदमेश न्यूज़।लामता। शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में बालाघाट जिले की ग्राम पंचायत गुडरू स्थित प्रसिद्ध मां सती धाम में पंचमी तिथि पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही माता के दर्शन और पूजन-अर्चन के लिए भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। मां सती के प्रति अटूट विश्वास और धाम से जुड़ी मान्यताओं के चलते यह स्थल श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
नागराज का पहरा बना श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र
मां सती धाम की सबसे चर्चित विशेषताओं में से एक यहां पेड़ पर नाग-नागिन के जोड़े का दिखाई देना बताया जाता है। श्रद्धालुओं के अनुसार, करीब पांच वर्ष पहले नवरात्रि पर्व के दौरान पहली बार नाग-नागिन का जोड़ा इस धाम में दिखाई दिया था। इसके बाद से सावन, नवरात्रि और गणेश पर्व के दौरान इनके पेड़ पर रहने की बात कही जाती है। धाम से जुड़ी इस मान्यता ने श्रद्धालुओं की जिज्ञासा और आकर्षण को और बढ़ा दिया है। माता के दर्शन करने पहुंचने वाले भक्त नागराज की मौजूदगी को आस्था के नजरिए से देखते हैं।
20 वर्षों में बदला माता की शीला का स्वरूप!
मां सती धाम में वर्ष 2013 से भक्ति कर रही एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि लगभग 20 वर्ष पहले माता की शीला की ऊंचाई करीब तीन से चार फीट थी, जो अब लगभग सात से आठ फीट दिखाई देती है। श्रद्धालु इसे माता की महिमा और धाम से जुड़ी आस्था के रूप में देखते हैं। समय के साथ इस धार्मिक स्थल के प्रति लोगों की श्रद्धा बढ़ी है और नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की अच्छी-खासी भीड़ उमड़ रही है।
सच्चे मन से मांगी मुराद पूरी होने की भक्तों में मान्यता
मां सती धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है। भक्तों के बीच यह मान्यता भी प्रचलित है कि संतान की कामना लेकर आने वाले निःसंतान दंपतियों को माता के आशीर्वाद से संतान सुख प्राप्त होता है। इसके अलावा श्रद्धालु अपनी विभिन्न मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माता के दरबार में माथा टेकते हैं।शारदीय नवरात्रि के अवसर पर गुडरू स्थित मां सती धाम में उमड़ रही भीड़ इस धार्मिक स्थल के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती है। माता के दर्शन, नाग-नागिन के जोड़े से जुड़ी चर्चाएं और धाम की स्थानीय मान्यताएं इसे क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए खास बना रही हैं।







































