मुश्ताक खान का निधन: ‘वेलकम’ के बल्लू से मिली लोकप्रियता

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कैंसर से जूझ रहे थे अभिनेता; सुनील पाल ने की पुष्टि
मुश्ताक खान का जन्म 31 दिसम्बर 1959 को मध्य प्रदेश के बालाघाट में हुआ। मुश्ताक ने कम उम्र से ही लोगों का मनोरंजन करना शुरू कर दिया। बचपन में इन्हे जब रामलीला में काम करने का मौका मिलता तो ये पूरी जान लगा दिया करते। फिर कॉलेज मे भी इन्होंने नाटको में काम किया। इनके काम से खुश होकर इन्हे आर्ट्स & कल्चर प्रोग्राम का सेकेट्री बना दिया गया।
सुनील पाल ने दी जानकारी
मुश्ताक खान के करीबी दोस्त और कॉमेडियन सुनील पाल ने मुश्ताक खान के निधन की पुष्टि की। सुनील पाल ने बताया कि कुछ मिनट पहले ही मुश्ताक ने आखिरी सांस ली।
सुनील के मुताबिक, मुश्ताक खान लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उनकी हालत काफी गंभीर थी और वह कैंसर की आखिरी स्टेज में थे। मुश्ताक खान का मुंबई के नानावती अस्पताल में इलाज चल रहा था। यहीं उन्होंने आखिरी सांस ली।
फुटपाथ पर सोते थे मुश्ताक
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब मुश्ताक मुंबई पहुंचे, तो उनके पास रहने की कोई जगह नहीं थी तो वह रेलवे स्टेशन पर रात गुजारते और फुटपाथ पर सोते थे। दिनभर मुश्ताक काम की तलाश में लोगों से मिलते, मगर सब किसी ना किसी बहाने से मना कर देते। बाद में मुश्ताक खान थिएटर से जुड़ गए।
एक दिन जब ये एक नाटक में काम कर रहे थे तो मशहूर फिल्म निर्माता इस्माइल श्रॉफ की नजर इन पर पड़ी। उन्हें इनका अभिनय पसन्द आया और इस तरह उन्होंने अपनी फिल्म ‘थोड़ी सी बेवफाई’ मे काम करने का ऑफर मुश्ताक को दिया। इस तरह मुश्ताक खान का फिल्मी सफर शुरू हुआ।
इन फिल्मों में नजर आए मुश्ताक
फिर एक दिन मुश्ताक खान की मुलाकात लेखक सलीम खान से हुई। सलीम खान ने इन्हें महेश भट्ट से मिलवाया और फिल्म ‘कब्जा’ में कोई रोल देने को कहा। जब महेश ने मुश्ताक का काम देखा तो वो बेहद खश हुए और उन्होंने मुश्ताक को अपनी लगभग हर फिल्म में रोल दिया।
मुश्ताक खान ने ‘सड़क’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘साथी’, ‘आशिकी’, ‘जूनून’, ‘गुमराह’, ‘गोपी किशन’, राजा’, ‘वेलकम’, ‘गदर’, ‘क्रन्तिवीर’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘नाराज’, ‘सर’ जैसी सैकड़ों फिल्मों में छोटे रोल किए। साथ ही वे ‘अदालत’, ‘भारत एक खोज’, ‘वाघले की दुनिया’ जैसे टीवी शोज में भी नजर आ चुके हैं।

यह डायलॉग था, ‘मेरी एक टांग नकली है। मैं हॉकी का बहुत बड़ा प्लेयर था। एक दिन उदय भाई को मेरी किसी बात पर गुस्सा आ गया और उन्होंने मेरे ही हॉकी से मेरी टांग के दो टुकड़े कर दिए, लेकिन दिल के बहुत अच्छे हैं। फौरन मुझे हॉस्पिटल ले गए और मेरी नकली टांग लगवा

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