विवादों में घिरा महाविद्यालय का स्नेह सम्मेलन कार्यक्रमजनप्रतिनिधियों ने प्रोटोकाल का उल्लंघन करने का महाविद्यालय प्रशासन पर लगाया आरोप

0

पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। नगर मुख्यालय स्थित शासकीय महाविद्यालय में आयोजित होने वाला स्नेह सम्मेलन कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही विवादों की भेंट चढ़ गया है। महाविद्यालय प्रबंधन पर क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा करने और वित्तीय कार्यों में भारी अनियमितता बरतने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले को लेकर क्षेत्र की राजनीति में हडक़ंप मच गया है और जनप्रतिनिधियों ने महाविद्यालय प्रबंधन के विरूध्द कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए इस दो दिवसीय स्नेह कार्यक्रम को राजनीति बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक २० में शासकीय महाविद्यालय आता है। लेकिन उसी क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष सम्राटसिंह सरस्वार, जिला पंचायत सभापति डुलेन्द्र ठाकरे, झामसिंह नागेश्वर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों का आमंत्रण कार्ड मेंं अतिथि न बनाये जाने एवं कार्यक्रम में लगने वाले टेंट व अन्य सामग्री की निविदा खुलने के पहले ही अपने परिचित को लाभ पहुंचाने हेतु पहले ही टेंट का सामान महाविद्यालय में बुला लिया गया था। इस तरह से १७ मार्च से शुरू होने वाले दो दिवसीय शासकीय महाविद्यालय का स्नेह सम्मेलन विवादों में घिरता हुआ नजर आ रहा है।

आमंत्रण पत्र से जनप्रतिनिधियों के नाम नदारद

शासकीय महाविद्यालय का विवाद का मुख्य कारण स्नेह सम्मेलन के आमंत्रण पत्र में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के नामों का उल्लेख न होना है। वहीं जनप्रतिनिधियों का कहना है कि महाविद्यालय प्रबंधन ने प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए क्षेत्रीय नेतृत्व को पूरी तरह नजरअंदाज किया है। वहीं आक्रोशित जनप्रतिनिधियों ने बताया कि आमंत्रण कार्ड में जिला पंचायत अध्यक्ष सम्राटसिंह सरस्वार, जिला पंचायत सदस्य, सभापति डुलेन्द्र ठाकरे, झामसिंह नागेश्वर, पांढरवानी सरपंच अनीस खान, पनबिहरी सरपंच विरेन्द्र बनवाले, जनपद सदस्य श्रीमती सुनिता बालकरण पंचेश्वर जैसे प्रमुख नामों को स्थान नहीं दिया गया है। जनप्रतिनिधियों का तर्क है कि यह न केवल उनका अपमान है, बल्कि क्षेत्र की जनता की भावनाओं के साथ भी खिलवाड़ है।

निविदा प्रक्रिया पर उठे सवाल, चहेतों को लाभ पहुंचाने का आरोप

महाविद्यालय में आयोजित स्नेह सम्मेलन कार्यक्रम के आयोजन के साथ-साथ आर्थिक लेन-देन और व्यवस्थाओं को लेकर भी महाविद्यालय प्रबंधन पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में डेकोरेशन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए किसी भी पारदर्शी निविदा (टेंडर) प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। निविदा जमा करने की अंतिम तारीख १४ मार्च थी और १६ मार्च को खुलना था, लेकिन निविदा प्रकाशन और उसे खोलने की आधिकारिक प्रक्रिया से पहले ही संबंधित डेकोरेशन संचालक की सामग्री कालेज मैदान में पहुंच चुकी थी। जिसके कारण अन्य डेकोरेशन संचालक फार्म जमा नही किये और दो निविदा फार्म के बीच में ही निविदा खोलकर कम दर वाले व्यक्ति को टेंडर दिया गया है। वहीं टेंट संचालकों व अन्य लोगों का आरोप है कि महाविद्यालय प्रबंधन के द्वारा अपने करीबियों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों को ताक पर रखकर यह पूरी प्रक्रिया अपनाई गई है। इस तरह से महाविद्यालय प्रबंधन ने प्रोटोकाल का उल्लंघन एवं निविदा खुलने के पहले की अपने लोगों को लाभ दिलवाने के लिए टेंट व अन्य सामग्री बुला लेने की इस पूरे घटनाक्रम से स्थानीय जनों और नेताओं में गहरा रोष व्याप्त है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि शासकीय संस्थानों में इस तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जायेगी, उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्यवाही करने की मांग की है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here