दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले ‘सीजेपी’ प्रदर्शन में शामिल होने जा रही पुणे की दो लड़कियों को जीआरपी द्वारा इटारसी रेलवे स्टेशन पर रोके जाने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि सभी लड़कियों को सुरक्षित उनके घर वापस भेज दिया गया हैभोपाल: एमपी हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने मंगलवार को एक अहम मामले की सुनवाई हुई। अदालत को यह जानकारी दी गई कि पुणे की रहने वाली दो लड़कियों को, जिन्हें गत 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले ‘सीजेपी’ (Cockroach Janata Party) के प्रदर्शन में शामिल होने जाते वक्त इटारसी रेलवे स्टेशन पर हिरासत में लिया गया था, उन्हें सुरक्षित उनके घर वापस भेज दिया गया है। यह लड़कियां ट्रेन में सवार होकर राष्ट्रीय राजधानी की तरफ रवाना हुई थीं, जिन्हें जीआरपी (GRP) के जवानों ने रास्ते में ही रोक लिया था।
भाईयों ने लगाई थी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब हाईकोर्ट में लड़कियों के परिवारों द्वारा दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई चल रही थी। पिछले हफ्ते गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे के नेतृत्व वाली बेंच ने पुलिस को निर्देश दिया था कि अगली सुनवाई में दोनों लड़कियों को कोर्ट के सामने पेश किया जाए। हालांकि, मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट को आधिकारिक रूप से अवगत कराया कि गोवा एक्सप्रेस से दिल्ली जा रही सभी युवतियां, जिनमें वे दोनों लड़कियां भी शामिल थीं, अब अपने घर पहुंच चुकी हैं।परिजनों ने लगाए थे गंभीर आरोप
याचिकाकर्ताओं विशाखा प्रशांत लोधे और शार्दुल जितेंद्र बुवा की ओर से कोर्ट में पक्ष रखा गया था। याचिका में कहा गया था कि ये दोनों बहनें लगभग आधा दर्जन लड़कियों के उस ग्रुप का हिस्सा थीं जो गोवा एक्सप्रेस से दिल्ली की यात्रा कर रहा था। आरोप लगाया गया था कि गुरुवार शाम को उन्हें जबरन इटारसी स्टेशन पर ट्रेन से नीचे उतार लिया गया। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि लड़कियों को जीआरपी द्वारा कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया था और उनके साथ-साथ अन्य सभी यात्रियों के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए थे।एमपी हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं। चूंकि राज्य सरकार की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि लड़कियों को उनके घर सुरक्षित भेज दिया गया है, इसलिए अदालत ने स्थिति का संज्ञान लिया है। इस तरह के मामलों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय लगातार पुलिस प्रशासन के कदमों पर नजर बनाए रखता है। अब चूंकि लड़कियां अपने परिजनों के पास लौट चुकी हैं, इस मामले में आगे की कानूनी औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है।







































