बच्चों को स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कैंसर का खतरा कम रहता है। मां के दूध में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्व होते हैं। यह कहना है शिशु रोग विशेषज्ञों का। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 में भी यह जानकारी सामने आ चुकी है। जन्म के एक घंटे के भीतर बच्चे को मां का दूध मिलना चाहिए। वजह यह कि मां के दूध में बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्व होते हैं। इससे शिशु जीवन भर बीमारियों से लड़ पाता है। हाल यह है कि जन्म के एक घंटे के भीतर सिर्फ 41 फीसदी नवजातो को ही मां का दूध प्रदेश में मिल पाता है। शिशु रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे के लिए मां का पहला दूध अमृत के समान होता है। कई तरह की भ्रांतियों की वजह से माताएं बच्चे को दूध पिलाने से बचती है।गांधी मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ शीला भम्बल ने कहा कि जो महिलाएं बच्चों को स्तनपान कराती हैं उन्हें बच्चेदानी के मुंह के कैंसर और स्तन कैंसर का खतरा अन्य महिलाओं के मुकाबले 2 से 3 गुना तक कम रहता है। उन्होंने कहा कि 6 महीने तक बच्चे को सिर्फ और सिर्फ मां का दूध पिलाना चाहिए। इससे मां और बच्चे के बीच भावनात्मक रिश्ता और मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि 6 महीने बाद भी बच्चे को स्तनपान कराना चाहिए, इसके साथ ही कुछ पूरक आहार भी शुरू कर देना चाहिए। इसमें दलिया, दाल का पानी आदि शामिल है। स्तनपान के लिए बनी राष्ट्रीय सलाहकार समिति में शामिल डॉ भम्बल ने बताया कि अब सिजेरियन डिलीवरी के बाद भी बच्चे को स्तनपान कराया जा सकता है क्योंकि अब लोकल एनेस्थीसिया कमर में दिया जाता है। उधर गांधी मेडिकल कॉलेज की शिशु रोग विभाग की विभागाध्यक्ष ज्योत्सना श्रीवास्तव ने कहा कि पूरे सप्ताह में उनके विभाग में स्तनपान जागरूकता के लिए अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।









































