ईरान द्वारा 4000 किमी दूर डिएगो गार्सिया पर हमले की कोशिश ने दुनिया भर को सोंचने पर मजबूर कर दिया है। इस कोशिश ने साफ कर दिया है कि ये जंग सिर्फ मध्य पूर्व तक ही सीमित नहीं है। साथ ही इससे यह भी संकेत मिलता है कि ईरान की वास्तविक मिसाइल क्षमता घोषित आंकड़ों से ज्यादा हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, खोर्रमशहर-4 जैसी बैलिस्टिक मिसाइलें न सिर्फ मध्य पूर्व,बल्कि यूरोप के कुछ हिस्सों तक भी पहुंच सकती हैं। ऐसे में यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय नहीं रहा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और सैन्य संतुलन के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और ईरान के संयुक्त हमले से शुरू हुई जंग का प्रसार क्षेत्र अब सिर्फ मिडिल ईस्ट नहीं रहा, बल्कि इसने हिंद महासागर तक अपना प्रसार कर लिया है। ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिका और ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य बेस ‘डिएगो गार्सिया’ पर बैक-टू-बैक दो बैलेस्टिक मिसाइलें दागकर अपने मजबूत इरादे जाहिर कर दिए हैं। हालांकि ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों से ‘डिएगो गार्सिया’को नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन दुनिया ईरान के इस हमले से हैरान है। ईरान ने ये हमला ब्रिटेन द्वारा अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की इजाजत देने के बाद किया। जिसके बाद चाहे-अनचाहे ब्रिटेन ने भी इस जंग में एंट्री ले ली है।
इस बात से डरी दुनिया
बता दें कि डिएगो गार्सिया ईरान से लगभग 4000 किमी दूर है। ऐसे में इतनी दूरी पर ईरानी हमले की कोशिश से जहां दुनिया हैरान है वहीं इस बात को लेकर परेशान और सवालिया भी है कि असल में ईरान के पास कितनी दूरी तक मार करने वाली बैलेस्टिक मिसाइल मौजूद हैं। क्योंकि ईरान द्वारा अपनी मिसाइलों को लेकर जो जानकारी सार्वजनिक की गई है उसके मुताबिक उसके पास अधिकतम 2000 किमी दूर तक मार करने वाली मिसाइलें हैं। ऐसे में यह भी बड़ा सवाल है कि क्या ईरान ने गुपचुप तरीके से अपनी क्षमता को बढ़ा लिया है। और अगर ऐसा कर लिया है तो उसकी जद में सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं बल्कि पेरिस और लंदन जैसे यूरोपीय शहर भी इसकी जद में आ सकते हैं।








































