आदिवासी संयुक्त समाज संगठन ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

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आदिवासी संयुक्त समाज संगठन ने 7 जुलाई को एसडीएम के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर सरकार की समान नागरिकता संहिता एवं आदिवासियों पर बढ़ते अत्याचार को लेकर विरोध दर्ज किया गया। ज्ञापन में उल्लेखित है कि समान नागरिक संहिता को लेकर प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद सरकार सक्रिय हो गई है। लॉ-कमीशन ने इस मामले में प्रक्रिया तेज कर दी है। समान नागरिक संहिता यदि हमारे हक और अधिकार से परे हटकर लागु की जाती है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन यदि समान नागरिक संहिता में आदिवासियों को संविधान में मिले विशेष हक और अधिकार से वंचित किया जाता है तो यह बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। जिसको लेकर सरकार स्पष्ट करें वरना हम इसका विरोध करते हैं हमारे पुरखो से आदिवासियों की परंपरायें चली आ रही है। वहीं प्रदेश के जिला सीधी में कोल जाति आदिवासी पर विधायक प्रतिनिधि प्रवेश शुक्ला के द्वारा लघुशंका किया गया है जो एक निंदनीय कृत्य है जो घृणित मानसिकता को दर्शाता है ऐसे अनेक प्रकार के अत्याचार लगातार आदिवासी समाज पर किए जा रहे हैं। जिस पर सरकार ध्यान देकर कठोर कार्यवाही करें। वही बालाघाट जिले के विकासखंड बिरसा के ग्राम धर्मशाला का प्रताड़ना सुसाइड मामला एवं ग्राम उलाह नाला देवरबेली विकासखंड लांजी में वन विभाग के कर्मचारियों के द्वारा आदिवासी युवक को बुरी तरह प्रताड़ित किया गया जिसमें आदिवासी युवक ने आत्महत्या करना सही समझा जिसमें वन विभाग के संबंधित कर्मचारियों पर कठोर कार्यवाही की जाने की मांग आदिवासी संयुक्त समाज संगठन के द्वारा महामहिम राष्ट्रपति, महामहिम राज्यपाल, अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति आयोग, व भारतीय लॉ कमिशन से की गई है। इस अवसर पर आदिवासी संयुक्त समाज संगठन अध्यक्ष अनुरसिंह उईके सचिव चंद्रसिंह धुर्वे गणेश कुमरे शैलेश घरडे कांग्रेस नेता जितेंद्र सिंह राजपूत सहित अन्य आदिवासी समाज के पदाधिकारी सदस्य मौजूद रहे।

अध्यक्ष अनुरसिंह उईके ने पदमेश से चर्चा में बताया कि आदिवासी संयुक्त समाज संगठन के तहत तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया है। जिसमें समान नागरिक संहिता का विरोध किया गया है कि इसके लागू होने से हमारे अधिकारों का हनन होगा। वही सीधी जिले में कोल जाति आदिवासी पर विधायक प्रतिनिधि प्रवेश शुक्ला ने लघुशंका किया है वही लांजी के देवरबेली में वन विभाग के कर्मचारियों के द्वारा आदिवासी युवक को प्रताड़ित किया गया जिससे उसने परेशान होकर आत्महत्या कर ली। इस प्रकार से आदिवासियों पर होते अत्याचार बिल्कुल गलत है हम प्रकृति पूजक है हमारे लिए समान नागरिक संहिता ठीक नहीं है जिसके लिए यूसीसी लागू ना करने और आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारों पर रोक लगाने एवं आरोपियों पर कठोर कार्यवाही कराए जाने की मांग महामहिम राष्ट्रपति भारत सरकार, महामहिम राज्यपाल मध्य प्रदेश सरकार, अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष एवं भारतीय लॉ कमीशन से मांग की गई है।

शैलेश घरड़े ने पदमेश से चर्चा में बताया कि तहसीलदार को हमारे द्वारा ज्ञापन दिया गया है कि सीधी जिले में जो कृत्य हुआ है यह भाजपा विधायक के प्रतिनिधि के द्वारा जो आदिवासी युवक पर लघुशंका किया गया है यह निंदनीय है जो मानवता को शर्मसार करने वाला कृत्य है। जिसमें आरोपी को कठोर सजा दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति गरीब मजदूर आदिवासी के साथ इस प्रकार का कृत्य ना करें। श्री घरडे ने बताया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा आदिवासी युवक का जो सम्मान किया गया है वह केवल राजनीति है एक युवक का सम्मान किया गया है परंतु दूसरे के साथ ऐसा नहीं होगा इसकी कोई ग्यारंटी नहीं है।

गणेश कुमारे ने बताया कि समान नागरिक संहिता हमारे समाज के लिए ठीक नहीं है हम प्रकृति को पूजने वाले हैं और इससे हमारे समाज के हितों का हनन होगा। देवरबेली में आदिवासी युवक को वन विभाग के कर्मचारियों ने प्रताड़ित किया जिससे युवक को आत्महत्या करनी पड़ी इस प्रकार की जबरन वसूली नहीं होनी चाहिए और प्रशासन को ऐसी घटनाओं पर कठोर कार्यवाही कर आदर्श स्थापित करना चाहिए कि इन घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो। वही जिस युवक ने आत्महत्या किया था उसके छोटे-छोटे बच्चे हैं उन्हें मुआवजा दिया जाये।

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