ईरान और इजराइल-अमेरिका युद्ध तेजी पकड़ चुका है और फिलहाल इसके थमने के आसार नहीं दिख रहे हैं। ईरान न सिर्फ अकेले ही इन दो ताकतवर देशों से लड़ रहा है, बल्कि उसने अमेरिका के मित्र अरब देशों को भी निशाने पर ले लिया है। ईरान की ओर से लगातार सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कुवैत पर हमले हो रहे हैं। इन हमलों की जद में न सिर्फ अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं बल्कि रिहायशी इलाके और तेल संयंत्र भी आ गए हैं। ईरान ने सऊदी अरब में सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको पर हमला किया और बहरीन के तेल कुंओं को भी निशाना बनाया है। अमेरिका और इजराइल के हमले भी ईरान को रोक नहीं पा रहे हैं। अमेरिका-इजराइल का प्रमुख निशाना ईरान के मिसाइल भंडार हैं, लेकिन ईरान के हमले लगातार जारी हैं। आखिर ईरान ने कहां रखे हुए हैं अपने घातक मिसाइल और कैसे करता रहा है इनकी सुरक्षा, जानने की कोशिश करते हैं।
भूमिगत बंकरों का निर्माण
दरअसल, ईरान ने अपने विशाल मिसाइल भंडार को विनाश से बचाने के लिए वर्षों तक भूमिगत बंकरों का निर्माण किया। अब, अमेरिका और इजराइल द्वारा एकतरफा युद्ध की घोषणा के कुछ दिनों बाद, तेहरान की यह रणनीति एक गलती नजर आ रही है। अमेरिकी और इजराइली विमान और ड्रोन ईरान में स्थित दर्जनों गुफानुमा ठिकानों के ऊपर मंडरा रहे हैं और मिसाइल ले जाने वाले लॉन्चरों के निकलते ही उन पर हमला कर रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, भारी बमवर्षकों द्वारा भूमिगत बंकरों पर गोला-बारूद गिराए जाने के बाद ईरानी हथियार कुछ स्थानों पर जमीन के नीचे फंस गए हैं।
ईरान के भूमिगत ‘मिसाइल शहर’
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि हाल के दिनों में ली गई उपग्रह तस्वीरों में भूमिगत ठिकानों या “मिसाइल शहरों” के प्रवेश द्वारों के पास इजराइली और अमेरिकी हवाई हमलों में नष्ट हुई कई ईरानी मिसाइलों और लॉन्चरों के अवशेष दिखाई देते हैं। इन ठिकानों में दक्षिणी शहर शिराज के पास स्थित ठिकानों का एक समूह शामिल है, जिन पर लगता है कि कई बार हमले हुए हैं, साथ ही इस्फहान, तबरीज और करमानशाह के पास स्थित ठिकाने भी शामिल हैं जहां मिसाइलें रखी हुई हैं। ईरान ने इन्हीं जगहों पर अपनी मिसाइलों का जखीरा रखा हुआ है। बंकर के अंदर मिसाइलें और लॉन्चर रखे जाते हैं। लेकिन इन्हें बाहर लाकर इस्तेमाल करना आसान नहीं है, क्योंकि ऊपर इजराइली और अमेरिकी विमान मंडरा रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध के दौरान जिन दर्जनों मिसाइल ठिकानों पर हमला किया गया, उनमें से लगभग सभी भूमिगत हैं। लेकिन उनमें जमीन के ऊपर इमारतें, प्रवेश द्वार और सड़कें हैं, जिससे उपग्रह तस्वीरों से इन जगहों की पहचान में आसानी होती है।
सबसे बड़ी अंडरग्राउंड फैसिलिटी
मार्च 2025 में ईरान ने एक वीडियो फुटेज जारी किया, जिसमें उसने दावा किया था कि यह उसकी सबसे बड़ी भूमिगत सुविधा यानी अंडरग्राउंड फैसिलिटी है। जगह का खुलासा नहीं किया गया था। क्लिप में वरिष्ठ कमांडरों को मिसाइल ले जाने वाले ट्रकों से भरे लंबे, बिना खिड़की वाले गलियारों का दौरा करते हुए दिखाया गया था। इससे खुलासा हुआ कि कुछ ठिकानों पर मिसाइलों को खुले में लाए बिना दागने के लिए कच्चे भूमिगत साइलो बनाए गए हैं। अमेरिकी सेना के पूर्व मिसाइल विशेषज्ञ और अल्मा के शोधकर्ता कॉलिन डेविड ने WSJ को बताया कि दक्षिणी ईरान के खोर्मुज शहर के पास एक अड्डे पर ऐसी क्षमता वाले नौ भूमिगत साइलो होने का अनुमान है। ये साइलो फारस की खाड़ी की ओर मुंह किए पहाड़ की ढलान में खोदे गए गहरे गड्ढों से ज्यादा कुछ नहीं हैं, जिनमें भूमिगत सुविधा के लिए एक पक्का प्रवेश द्वार है।
विश्लेषकों का कहना है कि इन ठिकानों को निशाना बनाने की अमेरिकी और इजराइली रणनीति ईरान के भूमिगत ठिकानों की बड़ी संख्या और जमीन के नीचे घुसकर इन्हें बर्बाद करने के लिए अमेरिकी शस्त्रागार में मौजूद बंकर-भेदी बमों की सीमित संख्या, दोनों को दर्शाती है। यह वाशिंगटन में तेहरान की मिसाइल दागने की क्षमता को युद्ध की शुरुआत में ही पंगु बनाने की जरूरत को भी उजागर करता है।
ईरान के पास कितनी मिसाइलें?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली और अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि शनिवार से तेहरान से बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के प्रक्षेपणों में कमी आई है, जिसका एक कारण तेल अवीव और वाशिंगटन द्वारा ईरानी प्रक्षेपण स्थलों और अन्य सैन्य बुनियादी ढांचे पर किए गए हमले हैं। इसका यह संकेत भी हो सकता है कि ईरान एक लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए अपने मिसाइल भंडार को बचाकर रख रहा है। ईरान के पास कितना मिसाइल भंडार है, ये साफ नहीं हुआ है। इजरायली सेना युद्ध से पहले 2,500 मिसाइलों का अनुमान लगाती रही है, जबकि अन्य विश्लेषक यह संख्या लगभग 6,000 बताते हैं। लेकिन ईरान के पास असल में कितनी मिसाइलें हैं, इसका सही आंकड़ा किसी के पास मौजूद नहीं है।










































