कीटनाशक का छिड़काव बना काल, खेत से लौटते ही टूटा कृषक का दम

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बालाघाट खेत में कितना से दवाई का छिड़काव करते समय कीटनाशक दवाई के प्रभाव में आने से बेहोश एक कृषक की जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई।। मृतक कृषक दिलीप पिता चेतराम ठाकरे 53 वर्ष ग्राम कोकना थाना किरनापुर निवासी है। जिला अस्पताल पुलिस ने इस कृषक का शव पोस्टमार्टम करवा कर उसके परिजनों को सौंप दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दिलीप ठाकरे अपने परिवार के साथ खेती किसानी करता था जिसके परिवार में पत्नी कारण बाई ठाकरे के अलावा दो लड़के और एक लड़की है। तीनों की शादी नहीं हो पाई है। बताया गया है कि 2 फरवरी को सुबह दिलीप ठाकरे अपने खेत रबी की फसल में कीटनाशक दवाई का छिड़काव करने के लिए गया था। कीटनाशक दवाई का छिड़काव करने के बाद 10:00 बजे दिलीप ठाकरे अपने घर आया और अपनी पत्नी को बताएं कि उसे चक्कर आ रहा है। पत्नी ने उसे बोली की मुंह में कपड़ा बांधकर कीटनाशक का दवाई का छिड़काव करना था किंतु दिलीप ने उसे बोला कि मैं मुंह में कपड़ा नहीं बांधा था। जिसके बाद वह उल्टी करने लगा था। हालत खराब होने पर दिलीप ठाकरे को उसके परिजनों ने किरनापुर के अस्पताल में भर्ती किए थे। जहां 2 घंटा इलाज के बाद भी दिलीप ठाकरे के स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर उसे जिला अस्पताल बालाघाट रेफर किया गया था। जिला अस्पताल में भर्ती करने के बाद 1 घंटे चल उपचार के दौरान कृषक दिलीप ठाकरे की मौत हो गई। जिला अस्पताल पुलिस ने शव पंचनामा कार्यवाही पश्चात कृषक दिलीप ठाकरे का शव पोस्टमार्टम करवा कर उसके परिजनों को सौंप दिया है और धारा 194 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत मर्ग कायम कर मर्ग डायरी अग्रिम कार्रवाई हेतु घटना स्थल से संबंधित पुलिस थाना किरनापुर भिजवा दी है।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कीटनाशक दवाइयों के छिड़काव के दौरान सुरक्षा उपायों के प्रति लापरवाही कितनी जानलेवा साबित हो सकती है। खेत में मेहनत कर परिवार का पेट पालने वाला किसान खुद ही असुरक्षित हो जाए, तो परिणाम कितना भयावह हो सकता है—यह घटना उसी की दुखद मिसाल है।

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