मध्यप्रदेश में जिला पंचायत, जनपद पंचायतों, नगर पालिकाओं के चुनाव में अध्यक्ष पद को लेकर सदस्यों और पार्षदों का समर्थन पाने के लिए 10 लाख से 50 लाख रुपयों की पेशकश किए जाने की जानकारी प्राप्त हो रही है। चुनाव परिणाम आने के बाद से ही जोड़-तोड़ शुरू हो गई थी। अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल राजनीतिक दलों और अध्यक्ष पद के प्रत्याशी द्वारा सदस्यों को अपने पक्ष में लाने के लिए अपहरण करने से लेकर मुंह मांगी कीमत देकर समर्थन हासिल करने की जोड़-तोड़ चल रही है।
राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद तथा जिला स्तर पर जो भी विधायक और मंत्री थे। उन्होंने अपने समर्थक को अध्यक्ष पद पर निर्वाचित कराने के लिए विपक्षी दल के सदस्य तथा निर्दलीय सदस्यों को अपने पाले में लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
पिछले तीन-चार दिनों में मध्य प्रदेश से सीमावर्ती राज्यों और धार्मिक स्थलों में सैकड़ों की संख्या में निर्वाचित प्रतिनिधियों को गोपनीय तरीके से ले जाया गया है। इसको लेकर आरोप-प्रत्यारोप तथा अपराधिक रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही हैं। अध्यक्ष पद पर अपने समर्थक को बैठाने के लिए हर संभव कोशिश, मंत्री,विधायकों और सांसदों द्वारा की जा रही है।
निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रमाण पत्र नेताओं के पास
जिस तरीके की शिकायतें आ रही हैं। उसमें चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद प्रमाण पत्र विजयी उम्मीदवार को दिया जाना चाहिए। लेकिन प्रमाण पत्र राजनीतिक दलों के रसूखदार नेताओं द्वारा चुनाव अधिकारी से ले लिए गए।सूत्रों के अनुसार जिस तरह की उठापटक पंचायत एवं नगरीय निकायों के चुनाव में चल रही है। उसको देखते हुए जिन सदस्यों के पास जीत के प्रमाण पत्र नहीं होंगे।उन्हें वोट देने से रोकने की रणनीति पर भी सत्तारूढ़ दल काम कर रहा है।
45 जिलों में मारामारी
पंचायत सदस्यों तथा पार्षदों के समर्थन को पाने के लिए लगभग 45 जिलों में मारामारी और सौदेबाजी चल रही है। जिला प्रतिनिधियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नेताओं ने अपने अपने प्रभाव क्षेत्र तथा धार्मिक स्थलों पर सदस्यों और पार्षदों को ले जाकर समर्थन के लिए उनके साथ सौदेबाजी की जा रही है।धार्मिक स्थलों पर भगवान के सामने शपथ दिलाई जा रही है। जोड़-तोड़ के लिए राजनीतिक दलों को सदस्यों की जानकारी नहीं मिल पाने से उनके परिवार के लोग तथा राजनेता अपहरण की शिकायतें भी दर्ज करा रहे हैं।
जिला पंचायत में एक करोड़ तक का ऑफर
कई जिला पंचायतों में बहुत कम अंतर से भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेश के सदस्य चुनाव जीते हैं। अध्यक्ष बनाने के लिए जहां एक या दो सदस्यों की ही जरूरत है। वहां पर यह राशि 50 लाख से एक करोड रुपए तक पर पहुंच गई है। यह स्थिति उन्हीं स्थानों पर है जहां एक या दो सदस्यों की जरूरत है।









































