Daily College Rift: डेली कॉलेज को लेकर दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया में फिर से ठन गई है। सिंधिया ने कहा है कि मैंने 2020 में भी उन्हें याद दिलाया था। यह कॉलेज सिंधिया परिवार की है। वहीं, दिग्विजय सिंह ने कहा है कि इसमें सिर्फ अन्य लोगों की तरह उनका योगदान है।भोपाल: इंदौर में मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को आरएसएस से इतना प्रेम है तो उसका कार्यक्रम डेली कॉलेज की जगह सिंधिया स्कूल में क्यों नहीं करवाते हैं। इसे लेकर अब दोनों नेताओं में जुबानी जंग छिड़ गई है। सिंधिया ने कहा है कि इस कॉलेज का निर्माण भी हमारे परिवार ने कराया था।
डेली कॉलेज में है संघ का कार्यक्रम
दरअसल, डेली कॉलेज इंदौर का प्रतिष्ठित कॉलेज हैं। यहां राजघरानों के बच्चे भी पढ़ाई करते हैं। इसी कॉलेज में आरएसएस का कार्यक्रम हो रहा है। दिग्विजय सिंह से इसे लेकर सवाल किया था तो उन्होंने तपाक से कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को आरएसएस से इतना प्रेम ही है तो वह ग्वालियर स्थित सिंधिया स्कूल में यह कार्यक्रम क्यों नहीं करवाते हैं।
सिंधिया ने किया पलटवार
ग्वालियर पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिग्विजय सिंह के इस बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह भी ना भूलें कि डेली कॉलेज भी सिंधिया परिवार की संस्था है। दिल्ली कॉलेज भी सिंधिया परिवार के द्वारा स्थापित किया गया। दिग्विजय सिंह कभी-कभी चीजें भूल जाते हैं, मेरा काम है उनको समय-समय पर याद दिलाना। जैसे 2020 में मैंने याद दिलाया था।
2020 का क्या है मतलब
दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2020 की बात कर इशारों-इशारों में उन्होंने कांग्रेस की सरकार गिराने की ओर इशारा किया है। 2020 में कमलनाथ की सरकार थी लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया की अनदेखी हो रही थी। इसकी वजह से अपने समर्थक विधायकों के साथ उन्होंने पाला बदल लिया था। इसके बाद कांग्रेस की सरकार गिर गई थी।
सिर्फ उनका योगदान था इसमें
सिंधिया के जवाब पर दिग्विजय सिंह ने फिर से मीडिया से बात करते हुए उन्हें जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि डेली कॉलेज के निर्माण में सिंधिया घराने का कोई योगदान नहीं था। दूसरे राजघरानों की तरह वे भी एक दानदाता थे। हमने माधवराव सिंधिया को कॉलेज का संरक्षक बनवाया था। 2020 में मेरा क्या था, उनके और कमलनाथ के बीच में था।
डेली कॉलेज का इतिहास
कॉलेज के वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार इसकी शुरुआत 1870 में हुई थी। तब रेजिडेंसी स्कूल के नाम से जाना था। नई बिल्डिंग की शुरआत 1885 में हुई थी। इंदौर के होल्करों और ग्वालियर के सिंधियाओं ने स्टूडेंट हाउस दान किए थे। साथ ही मध्य प्रदेश के अलग-अलग राजघरानों के लोगों ने इसके निर्माण में योगदान दिया था।










































