माँशीतला माता को चढ़ाई गई चुनरी, श्रध्दालुओं ने प्राप्त किया आशीर्वाद, भंडारा का हुआ आयोजन
पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। नगर मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में शारदेय नवरात्र पर्व भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। शारदेय नवरात्र पर्व के षष्टमी के अवसर पर ग्राम पंचायत पनबिहरी स्थित भीमाशंकर शिव मंदिर से पनबिहरी सरपंच, मॉ शीलता माता मंदिर छोटी पनबिहरी अध्यक्ष विरेन्द्र बनवाले के नेतृत्व में माता-रानी की कृपा से १६ अक्टूबर को शाम ४ बजे ११०० फीट की लंबी भव्य चुनरी यात्रा निकाली गई। इस अवसर पर सर्वप्रथम मंदिर में विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई। जिसके बाद बड़ी संख्या में महिला-पुरूष श्रध्दालुओं के द्वारा जय अंबे-जय जगदम्बे, जयकारा शेरा-वाली की बोल सांचे दरबार की जय, चलो बुलावा आया है-माता ने बुलाया है सहित अन्य नारे लगाते हुए चुनरी यात्रा निकाली गई। जो हाई स्कूल मार्ग होते हुए सिवनी मार्ग शिव मंदिर, माँ सतबहनी मंदिर पहुंची जहां पूजा अर्चना किया गया। जिसके बाद नगर मुख्यालय के विभिन्न चौक-चौराहों का भ्रमण करते हुए यह चुनरी यात्रा छोटी पनबिहरी स्थित माँ शीतला माता मंदिर पहुंची। जहां पंडित के द्वारा पूजन अर्चन कर ग्राम की कुलदेवी माँ शीतला माता को चुनरी चढ़ाई गई तत्पश्चात आरती की गई और सभी ने माता-रानी का आशीर्वाद प्राप्त किये। जिसके बाद भंडारा का आयोजन किया गया और समस्त श्रध्दालुओं ने भंडारा रूपी महाप्रसादी ग्रहण कर धर्मलाभ अर्जित किये। इस ११०० फीट लंबी चुनरी यात्रा को देखकर मार्ग से गुजरने वाले लोगों ने भी कुछ देर रूककर चुनरी यात्रा को देखा एवं पास पहुंचकर यात्रा में शामिल होकर धर्मलाभ भी अर्जित किये और भव्य चुनरी यात्रा को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि नगर मुख्यालय को माता-रानी का आशीर्वाद मिल गया हो। चर्चा में पनबिहरी सरपंच, , मंदिर समिति अध्यक्ष विरेन्द्र बनवाले ने बताया कि माता रानी की कृपा व आदेश पर क्षेत्र में सुख-शांति-समृध्दि-वैभव की कामना के साथ १६ अक्टूबर को ११०० फीट लंबी चुनरी यात्रा निकाली गई। यह चुनरी यात्रा नगर मुख्यालय का भ्रमण करते हुए छोटी पनबिहरी स्थित ग्राम की कुलदेवी माँशीतला माता मंदिर पहुंची जहां विधि-विधान से पूजा अर्चना कर माँ शीतला माता को चुनरी चढ़ाई गई है । जिसके बाद भंडारा रूपी महाप्रसादी का वितरण किया गया। इस चुनरी यात्रा का मुख्य उद्देश्य माता रानी से क्षेत्र की सुख-समृध्दि की प्रार्थना करना एवं क्षेत्रीयजनों को धार्मिक आस्था से जोडऩा है।










































