प्रशासन की जनसुनवाई का ग्रामीणो ने किया सामुहिक बहिष्कार

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पदमेश न्यूज़, बालाघाट।पचामा दादर की पहाड़ियों को खनन कार्य के लिए लीज पर दिए जाने के प्रस्ताव पर, बैहर विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी समुदाय द्वारा पहले से ही विरोध किया जा रहा है।लेकिन प्रशासन किसी ना किसी तरह उन्हें पक्ष में करने की फिराक में है।बावजूद इसके भी प्रशासन अपनी उम्मीदों पर खरा नही उतर पा रहा है। शायद यही वजह है कि आए दिनों की तरह 7 मार्च को प्रशासन द्वारा ग्राम पंचायत लूद में बुलाई गई जनसुनवाई का एक बार फिर से ग्राम पंचायत लूद सहित अन्य आसपास के ग्रामीणों ने विरोध करते हुए सामूहिक बहिष्कार कर दिया है।जहा जनसुनवाई के दिन 7 मार्च शनिवार को पूरा गांव वीराना नजर आया और लोग, प्रशासन द्वारा आयोजित जनसुनवाई में नहीं पहुंचे। यहां तक की प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कही उन्हें जबरदस्ती जनसुनवाई में ना बुला लिया ले, ऐसी आशंका को देखते हुए लोगों ने अपने अपने घरों में ताला जड़ दिया और खेत चले गए। इस तरह स्थानीय आदिवासियों ने शनिवार को आयोजित प्रशासन की जनसुनवाई का एक बार फिर से विरोध जताते हुए सामूहिक बहिष्कार कर दिया। वहीं स्थानीय ग्रामीणों द्वारा आगे भी प्रशासन द्वारा आयोजित की जाने वाली जनसुनवाई का विरोध किए जाने की बात कही जा रही है।

पूर्व में ग्रामीण जता चुके है विरोध, कर चुके है चक्कजाम आंदोलन
आपको बताए कि इसके पूर्व जहा पचामा दादर की पहाड़ियों में बाक्साइड खनन के लिए प्रशासन द्वारा 18 फरवरी को ग्राम उकवा में जनसुनवाई का आयोजन किया था।इसके विरोध में आदिवासी समुदाय द्वारा 12 फरवरी को चक्काजाम आंदोलन कर इसका जमकर विरोध किया था।जहा आदिवासियों के इस विरोध को देखते हुए प्रशासन ने जनसुनवाई कर ग्रामीणों को मनाने से अपने पैर पीछे खींच लिए थे।तो वही चक्कजाम आंदोलन को देखते हुए 18 फरवरी को ग्राम उकवा में आयोजित जनसुनवाई 6 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई थी।जिसके बाद प्रशासन ने गांव गांव घूमकर 7 मार्च को ग्राम पंचायत लूद मे जनसुनवाई का आयोजन करने की जानकारी देते हुए, शनिवार को जनसुनवाई का आयोजन किया था, लेकिन इसके विरोध में ग्राम पचामा, दादर, बम्हनी, लूद सहित अन्य आसपास के ग्रामीणों ने पुनः अपनी नाराजगी जताते हुए, जनसुनवाई का सामूहिक बहिष्कार कर दिया।

जब जनता ही जनसुनवाई में नहीं जा रही तो हम कैसे जाएं- मडावी
जिला पंचायत सदस्य मंसाराम मडावी ने बताया कि हम पहले से ही18 फरवरी को निर्धारित जनसुनवाई की तिथि आगे बढ़ाने की मांग कर रहे थे।क्यो की वन अधिकार अधिनियम के तहत अपने दावे प्रस्तुत करने और आवश्यक आपत्तियां दर्ज कराने के लिए समाज को पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा था। इसी कारण उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया था कि 18 फरवरी को प्रस्तावित जनसुनवाई की तिथि आगे बढ़ाई जाए, ताकि आदिवासी समुदाय विधिवत अपने अधिकारों से संबंधित दस्तावेज और दावे प्रस्तुत कर सके। किन्तु विभाग ने प्रारंभ में जनसुनवाई की तिथि यथावत रखी थी, जिसके विरोध में 12 फरवरी को जन आंदोलन का ऐलान किया था। जहा चक्कजाम आंदोलन कर चेतावनी दी थी।स्थानीजनों की आपत्ति के बावजूद भी आज पुनः जनसुनवाई रखी गई थी जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। जब जनता ही जनसुनवाई में नहीं पहुंच रही है तो हम जनप्रतिनिधि कैसे पहुंचेंगे जबकि हमने पूर्व में ही ग्राम सभा के माध्यम से आपत्ति लगाई है। हमारी मांग है कि वन संसाधन के अधिकार को सुरक्षित रखा जाए,वही इस क्षेत्र में खनन नहीं होना चाहिए, इसीलिए हमने उकवा में भी आंदोलन किया था।लेकिन हमारी बिना सहमति के आज प्रशासन द्वारा फिर जनसुनवाई रखी गई थी इसीलिए लोग घरों में ताला डालकर खेत चले गए और जनसुनवाई का सामूहिक बहिष्कार कर दिया।

पहले भी हम खनन का विरोध कर रहे थे, आज भी हम इसके विरोध में हैं-कुसरे
ग्राम बम्हनी के ग्रामीण ईश्वर कुसरे ने बताया कि पहाड़ियों में बॉक्साइट खनन को लेकर पहले भी हमारा विरोध था और आज भी हम इसका विरोध कर रहे हैं लेकिन सरकार पचामा ,दादर में खनन करना चाहती है। जिससे स्थानीय लोगों को नुकसान होगा हमारे यहां पहाड़ी पर झरना है जो बम्हनी से लगा हुआ है यदि यहां खनन होगा तो पानी रुक जाएगा, पेड़ पौधे नष्ट हो जाएंगे, जो हम नहीं चाहते। इसीलिए हमने इस जनसुनवाई का सामूहिक बहिष्कार किया है

पेसा एक्ट, पांचवी ,छटवी अनुसूची का नहीं रखा जा रहा ध्यान-उपसरपंच
ग्राम पंचायत लूद उपसरपंच मेमराज उइके ने बताया की प्रशासन द्वारा आज जनसुनवाई रखी गई है लेकिन उसमें कोई नहीं जा रहा है जनसुनवाई का समस्त ग्रामीणों ने बहिष्कार कर दिए हैं।क्योंकि यह क्षेत्र पेसा एक्ट के अंतर्गत आता है ,पांचवी छठवीं अनुसूची यहां पर लागू है फिर भी प्रशासन बिना सहमति के यहां बॉक्साइट खनन करना चाहती है।इसी का विरोध ग्रामीण कर रहे हैं और इसी विरोध के कारण लोग घरों में ताला लगाकर बाहर चले गए हैं ताकि उन्हें जनसुनवाई में जाने के लिए कोई मजबूर ना कर सके। उन्होंने बताया कि यदि यहां खनन होता है तो जंगल में कटाई होगी,जिससे बारिश कम होगी, जल स्तर कम हो जाएगा, पर्यावरण प्रभावित होगा। खेती में धूल आने से फसल नहीं होगी, वही जहरीले पानी से खेती नष्ट हो जाएगी। लेकिन सरकार प्राइवेट कंपनियों को काम दे रही है, इससे ग्रामीणों को कोई फायदा नहीं है इसका पूरा लाभ ठेकेदारों को मिलेगा जिसका विरोध स्थानीय ग्रामीणों द्वारा किया जा रहा है

वही विधायक प्रतिनिधि ध्रोप किशोर मरावी ने बताया कि सरकार द्वारा जहां बॉक्साइट खनन करने की बात कह जा रही है वहां हमारी देव शक्तियां हैं,वहां आदिवासी समुदाय निवास करता है। हमारी सभ्यता संस्कृति वहां से जुड़ी हुई है।बावजूद इसके भी प्रशासन नहीं मान रहा है जबकि यहां पर एफआरए कानून लागू है, उसका पालन नहीं किया जा रहा है ग्राम सभा की भी अहवेलना की गई है इसीलिए पचामा दादर लूद, बम्हनी और आसपास के गांव के लोगों ने इस जनसुनवाई का सामूहिक बहिष्कार किया है।उन्होंने बताया कि हमने इसका पहले भी विरोध किया था, 12 जनवरी को उकवा में चक्काजाम आंदोलन कर प्रशासन को चेताया भी था, तब प्रशासन ने जनसुनवाई को स्थगित कर, 6 मार्च तक के लिए जनसुनवाई टाल दी थी, आज 7 मार्च को पुनः जनसुनवाई बुलाई गई थी, जिसका समस्त ग्रामीणों द्वारा सामूहिक बहिष्कार किया गया है।

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