प्रोजेक्ट-75i को मिली रफ्तार, ज्यादा देर पानी में रहने वाली सबमरीन मिलेगी, जानिए पूरी डिटेल

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लंबे वक्त से अटके प्रोजेक्ट-75i ने अब कुछ रफ्तार पकड़ी है। इसके तहत भारतीय नौसेना को 6 नई सबमरीन मिलनी हैं। ये सबमरीन एयर इंडिपेंडेंट प्रपल्शन (AIP) वाली होंगी। यह सिस्टम सबमरीन को ज्यादा वक्त तक पानी के नीचे रहने में मदद करता है। यह किसी भी लंबी तैनाती के लिए और युद्ध जैसी स्थिति में बेहद आवश्यक है। अभी नौसेना के पास इस तरह की कोई सबमरीन नहीं है जबकि पाकिस्तान के पास AIP वाली सबमरीन हैं, हालांकि वे काफी पुरानी हो गई हैं। पाकिस्तान के लिए चीन नई 8 सबमरीन बना रहा है।

पूरी बात जानिए
प्रोजेक्ट-75i स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप मॉडल के तहत होना है। इसके तहत नौसेना ने एल एंड टी और MDL को आरएफपी जारी किया था। एल एंड टी जर्मन कंपनी TKMS के साथ मिलकर काम कर रही है। MDL स्पेन की नावंतिया कंपनी के साथ मिलकर। इस प्रोजेक्ट से पहले जब प्रोजेक्ट-75 शुरू किया गया था तब भी सबमरीन भारत में ही बनाई गई थी, लेकिन विदेशी कंपनी का डिजाइन था और काम सिर्फ भारत में हुआ था।

अब प्रोजेक्ट-75i के तहत विदेशी कंपनी टेक्नॉलजी ट्रांसफर करेगी जिससे स्वदेशी कंपनी की क्षमता बढ़ेगी। आगे से वे खुद ही सबमरीन डिजाइन और डिवेलप करने में सक्षम हो सकेंगे। एल एंड टी और MDL दोनों में से किसी एक को प्रोजेक्ट-75i के तहत चुना जाना है। सबमरीन के लिए तकनीकी मूल्यांकन हो चुका है और कुछ ही दिनों पहले फील्ड मूल्यांकन भी हो गया है। अब स्टाफ मूल्यांकन होना है। एक अधिकारी के मुताबिक यह 2-3 महीने में हो जाएगा।

रक्षा मंत्रालय की मंज़ूरी ज़रूरी
रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को जाएगी और फिर मंत्रालय के अप्रूवल के बाद कॉन्ट्रैक्ट निगोसिएशन कमिटी इसे देखेगी। वहां से अप्रूवल मिलने के बाद कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी का अप्रूवल लिया जाएगा। जब किसी कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन होगा उसके 3 से 4 साल बाद ये सबमरीन मिलनी शुरू होंगी।

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