बालाघाट: दम तोड़ रहे बच्चों के गांव में पहली बार पहुंचे डॉक्टर, 125 की बचाई जिंदगी, पहले इन्हें देख भाग जाते थे आदिवासी

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Balaghat News: बालाघाट के आदिवासी इलाकों में डॉक्टरों की टीम नहीं पहुंचती थी। इन इलाकों में नक्सलियों का दबदबा था। पहली बार यहां डॉक्टरों की टीम पहुंची और 125 बच्चों की जान बचाई है। आदिवासी बहुल गांवों में बच्चे रहस्यमयी बीमारी से पीड़ित हो रहे थे।बालाघाट: बालाघाट में आदिवासी गांवों में बच्चे रहस्यमयी बीमारी से दम तोड़ रहे थे। ये गांव कभी घोर नक्सल प्रभावित थे। वर्षों से इन गांवों में डॉक्टर के कदम नहीं पड़े थे। अब नक्सलमुक्त हुए इन गांवों में पहली बार डॉक्टर पहुंचे हैं। साथ ही जानलेवा बीमारी से पीड़ित 125 से ज्यादा बच्चों की जान बचाई है।डॉक्टर को देखकर भाग जाते थे ग्रामीण

यह बेहद चुनौती पूर्ण स्थिति है क्योंकि नक्सलवादियों ने आदिवासियों का इस प्रकार से ब्रेनवॉश कर रखा है कि, वह डॉक्टर को देखते ही भाग जाते हैं इलाज करवाने को तैयार नहीं है। पहली बार बालाघाट के क्षेत्र का यह चित्र सामने आ रहा है, जब सरकारी सुविधाएं सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच पा रही है।

बिरसा ब्लॉक नक्सलवादियों का गढ़ था यह

मामला इसी साल नक्सली मुक्त हुए बालाघाट के बिरसा विकास खंड अंतर्गत गांवों जैसे बोंदारी, अडोरी, कुंडेकसा, कोरका, मछुरदा (मच्छुरदा), मातला, गठिया आदि का है। 1986 से यहां बड़े पैमाने पर हथियारबंद नक्सली गतिविधि शुरू हो गई थी। 1990 में इसी बिरसा थाने में पहला मामला दर्ज हुआ था। यहां नक्सलवाद की जड़ इतनी मजबूत थी, कि 1991 में बारूदी सुरंग में विस्फोट करके 9 पुलिस जवानों की सामूहिक हत्या कर दी गई थी। फिर 1994 में 16 जवान शहीद हुए और 15-16 दिसंबर 1999 की रात तो आपको याद ही होगी, जब कांग्रेस पार्टी की सरकार के परिवहन मंत्री लिखीराम कावरे को उनके घर से बाहर निकालकर सरेआम मार डाला गया था। इसके बाद भी बालाघाट को नक्सली मुक्त नहीं करवाया गया था।आदिवासी को अस्पताल नहीं आने देते थे नक्सली

ताजा मामला नक्सलवादियों के केंद्र रहे बिरसा ब्लॉक का ही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम यहां नियमित रूप से जा रही है, लोगों से संपर्क और संबंध बनाने का प्रयास कर रही है। उनको बताया जा रहा है कि बीमार होने पर, अस्पताल आना चाहिए। वहां नहीं जाना चाहिए जहां नक्सलवादियों ने बताया था। इस इलाके में हथियारबंदी नक्सलवाद खत्म हो गया है लेकिन नक्सलवादियों द्वारा 40 साल में किया गया ब्रेनवाश का कुचक्र, सिर्फ एक साल में नहीं टूट सकता। फिर भी बालाघाट के प्रशासन को बड़ी सफलताएं मिली है।बीमारी से चली गई है जान

इस इलाके में हर साल हजारों लोग अज्ञात बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। वह कभी अस्पताल ही नहीं आते। पहली बार इस इलाके का मेडिकल रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। इस साल 2026 के जून महीने में रिकॉर्ड किया गया कि एक बच्चे की मौत हुई है। मृत्यु से पहले उसको तेज बुखार आया था। इसके साथ शरीर पर दाने/चकत्ते (त्वचा संक्रमण या ‘माता’ जैसे), मुंह में छाले, पेट दर्द, उल्टी-दस्त, भूख न लगना, कमजोरी, झटके इत्यादि लक्षण भी दिखाई दिए थे। डॉक्टर के लिए यह एक नई प्रकार की बीमारी थी। नई बीमारी हमेशा मेडिकल के लिए चैलेंज होती है।बालाघाट के लोगों का सपोर्ट नहीं मिलता तो पता नहीं क्या होता

डॉक्टरों की टीम ने सर्च करना शुरू किया। घर-घर जाकर प्रत्येक बच्चे की जांच की जाने लगी। यह बिल्कुल भी आसान नहीं था क्योंकि डॉक्टर को देखते ही आदिवासी, अपने बच्चों को लेकर जंगलों में भाग जाते हैं। उनको समझाना बहुत मुश्किल होता है कि, डॉक्टर एक अच्छा इंसान है, इलाज करवाने से बच्चे ठीक हो जाएंगे। कई लोग समझ रहे हैं। उन्होंने अपने बच्चों का इलाज करवाया।

125 बच्चों की छुट्टी

मध्य प्रदेश शासन के स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड के ग्राम कुंडेकसा, अडोरी, कोरका एवं बांदरी में स्वास्थ्य संबंधी समस्या, मौसमी बीमारी, सर्दी खांसी बुखार,चर्मरोग, मीजलस स्कैबीज, मलेरिया के उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराए गए बच्चों में से 125 बच्चे स्वस्थ्य होकर अपने गांव लौट गए हैं। विगत एक माह से दिनांक 16 अगस्त कुल 169 बच्चों में से 125 बच्चों को सफलता पूर्वक स्वास्थ्य लाभ मिलने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया। इस तरह कुल 44 बच्चे अस्पताल में उपचाररत हैं, जो पूर्णतः स्वस्थ्य है।घर पर ही मिला इलाज

461 बच्चों का इलाज उनके घर पर ही किया। उन गांवों में 20 सर्वेक्षण टीम, के माध्यम से घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है । 4 पीएमजनमन एएमएमयु, बीमार व्यक्तियों की जांच के लिए 10 चिकित्सा अधिकारी एवं 4 एम्बुलेंस भर्ती के लिए लगायी गयी है।

लगातार रखी जा रही निगरानी

स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अब तक कुल 630 मरीज विभिन्न बीमारियों के मिले, जिसमें 125 को अस्पताल में एवं 461 को घर पर ही उपचार प्रदान कर ठीक किया गया।10 गांवों के 980 घरों मे स्वास्थ्य विभाग का सुरक्षा कवच

स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुंडेकसा, बोंदारी,कोरका, घुम्मुर, अडोरी मछुरदा, गठिया, मातलामें घर घर सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के दौरान 658 बच्चों को विटामिन ए की खुराक ओआरएस वितरण जिंकटेबलेट वितरण दिया गया। 597 बच्चों को आयरन सायरप प्रदान किया गया 521 बच्चों को अल्बडाजोल की टेबललेट खिलायी गयी, 63 बच्चों को मिजल्स का डोस लगाया गया । 10 गांवों के 980 घरों मे कीटनाशक छिड़काव एवं इंडोर आउटडोर फागिंग और लार्वा सर्वे हो रहा है।

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