म. प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के सहायक अभियंता अनिल सोनी को सजा

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बालाघाट भ्रष्टाचार के मामले में मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड बालाघाट के सहायक अभियंता अनिल कुमार पिता लखनलाल सोनी को 4 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई।भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश उत्तम कुमार डार्वि की अदालत ने इस आरोपी को 4 वर्ष की सश्रम कारावास के अलावा 4 हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित किये है। इस मामले की अभियोजन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक कपिल कुमार डहेरिया जिला लोक अभियोजन अधिकारी बालाघाट द्वारा की गई थी।

अभियोजन के अनुसार अनिल जैसवाल वार्ड नंबर 27 गोंदिया रोड बालाघाट निवासी के वाहन अनुबंध पर मासिक किराए पर मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड बालाघाट में सहायक यंत्री कार्यालय में लगे हुए थे। जिनके पिछले चार माह से इन वाहनों के 13 बिलों का भुगतान करीब सवा लाख रुपए सहायक यांत्रिक कार्यालय में पेंडिंग थे। इस संबंध में अनिल जैसवाल ने सहायक अभियंता अनिल सोनी से निवेदन किए थे। तो उन्होंने वाहनों के भुगतान करने के एवज 12500 रुपए की रिश्वत की मांग की थी। जिसमें अनिल जैसवाल ने 3 हजार रुपये उन्हें दे चुके थे। शेष 9500 की मांग सहायक अभियंता अनिल सोनी द्वारा लगातार की जा रही थी। अनिल जैसवाल, सहायक अभियंता अनिल सोनी को रिश्वत नहीं देना देना चाहते थे और उन्हें रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए पकड़वाना चाहते थे। जिसकी शिकायत उन्होंने 16 अप्रैल 2017 को लोकायुक्त जबलपुर से की थी। अनिल जैसवाल द्वारा की गई शिकायत का विधिवत सत्यापन कराया। अनिल जैसवाल और आरोपी अनिल सोनी के बीच की गई बातचीत का रिश्वती वार्ता रिकॉर्ड की गई थी। 24 अप्रैल 2017 को सहायक अभियंता अनिल सोनी ने अनिल जैसवाल से दूसरी किस्त के 2 हजार रुपये लाने को कहा था। इसी दौरान लोकायुक्त टीम ने सहायक अभियंता अनिल सोनी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े और गिरफ्तार किए थे।जिनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया और अनुसंधान उपरांत अभियोग पत्र विद्वान अदालत में पेश किया गया था। हाल ही में यह भ्रष्टाचार का मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश उत्तम कुमार डार्वि की विशेष अदालत में चला।इस विद्वान अदालत में चलते इस मामले में अभियोजन पक्ष आरोपी सहायक अभियंता अनिल सोनी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपित अपराध सिद्ध करने में सफल रहा। जिसके परिणाम स्वरुप विद्वान अदालत ने मामले की समस्त परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी अनिल सोनी सहायक अभियंता को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत 4 वर्ष का सश्रम कारावास और 2 हजार रुपये तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)घ,13(2) के तहत 4 वर्ष की सश्रम कारावास और 2 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किये। विद्वान अदालत में यह सजा 11 जुलाई को सुनाई।

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