राहुल और आदित्य ने बढ़ाया गौरव,यूपीएससी परीक्षा में हासिल की सफलता !

0

जिले के 2 युवाओं ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा वर्ष 2021 में सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। वारासिवनी तहसील के ग्राम झालीवाड़ा के मूलनिवासी एवं सहायक संचालक उद्यान विभाग बालाघाट सी बी देशमुख के सुपुत्र राहुल देशमुख ने इस परीक्षा में 349 वी रैंक हासिल किया है। इसी प्रकार खैरलांजी तहसील के ग्राम गजपुर के मूल निवासी एवं बैतूल जिले से सेवानिवृत्त संयुक्त कलेक्टर ज्ञानीराम पटले के सुपुत्र आदित्य पटले ने इस परीक्षा में 375 वी रैंक हासिल की है।

आपको बताये कि राहुल देशमुख वर्तमान में बालाघाट नगर के वार्ड नंबर 33 स्टेट बैंक कॉलोनी में निवास करते हैं। यूपीएससी परीक्षा में चयन होने की खबर लगते ही परिवार के लोगों में हर्ष व्याप्त हो गया तथा इनको बधाई देने वालों का सिलसिला शुरू हो गया। राहुल देशमुख के माता-पिता एवं स्नेहीजनों ने मिठाई खिलाकर व पुष्पमाला पहनाकर खुशी का इजहार किया। यह भी बताएं कि इनकी माताजी विभा देशमुख वीरांगना रानी दुर्गावती स्कूल में शिक्षिका के पद पर पदस्थ है, ये दो भाई है जिनमें राहुल देशमुख बड़े हैं।

यूपीएससी परीक्षा में चयनित युवक राहुल देशमुख ने बताया कि उनकी प्राथमिक शिक्षा पहली से पांचवी तक टाइगर मोंटेसरी स्कूल में, छठी से बारहवीं तक केंद्रीय विद्यालय भरवेली, झारखंड के धनबाद से बीटेक की पढ़ाई की उनका लक्ष्य शुरुआत से प्रशासनिक सेवा में जाने का था। उन्होंने बताया कि जो भी यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं उन्हें खूब परिश्रम करते रहना चाहिए, साथ ही साथ धैर्य बनाए रखना चाहिए। शुरुआत में सफलता मिल सकती है पर एक दिन जरुर सफलता मिलेगी, यह उनका पांचवा प्रयास था इसके पहले वे जॉब में थे तबसे तैयारी एवं परीक्षा देते आ रहे हैं थे। ऐसी तैयारियों में सबसे जरूरी होता है एकाग्रचित्त होना, हमें जानना होगा हमें जीवन में करना क्या है।

राहुल देशमुख ने बताया कि वह पहले इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड में सरकारी जॉब में पदस्थ से, 2 वर्ष तक वहां काम किया पर उन्हें उस कार्य से संतोष नहीं था। उन्हें लगता था प्रशासनिक सेवा ही वह सेवा है जिसमें लोगों की अच्छी सेवा कर सकते हैं लोगों की समस्याओं का बेहतर निराकरण कर सकते हैं माता-पिता छोटा भाई लगातार उन्हें मोटिवेट करते रहते थे।

जिले के युवाओं से यही कहेंगे किसी भी परीक्षा को लेकर अच्छा टाइम टेबल मेंटेन करे, 10 से 12 घंटा पढ़ाई करना होगा तथा स्वास्थ्य का ध्यान विशेष रूप से रखना होगा जो। गलती हो रही है उसमें सुधार करते रहे।

यूपीएससी चयनित युवक राहुल देशमुख के पिता सी बी देशमुख ने बताया कि यूपीएससी परीक्षा में चयन होने से हमें बहुत गर्व महसूस हो रहा है। इसमें मुख्य रूप से बेटे की मेहनत ही होती है हम जरूर सहयोग के रूप में रहे, हमने सहयोग किया बाकी पूरी मेहनत बच्चे की थी। मेरा सपना था बेटा सिविल सर्विसेज में जाए और बेटे ने वह कर दिखाया।

बालाघाट जिला मुख्यालय की तरह वारासिवनी तहसील मुख्यालय में भी सोमवार का दिन बहुत अधिक खास था। हर दूसरी जुबान पर खुशी के शब्द थे कि अपने शहर के गंगोत्री कॉलोनी निवासी रिटायर्ड संयुक्त कलेक्टर ज्ञानीराम पटेल पुत्र आदित्य पटले यूपीएससी परीक्षा पास कर ली है।
बालाघाट में राहुल देशमुख की घर की तरह आदित्य के घर में भी उनके परिचित रिश्तेदार मोहल्ले वासियों वालों द्वारा बधाई देने का ताता लगा था।

आपको बता दें कि अनुसार सेवानिवृत्त सयुॅक्त कलेक्टर ज्ञानीराम पटले की तीन संतान है जिसमें एक बेटा व दो बेटियां है। जिसमें बेटा आदित्य पटले प्राथमिक शिक्षा कक्षा छटवी तक जिला खण्डवा व छिंदवाड़ा में हुई। जिसके बाद आगे की शिक्षा उन्होने इंदौर के केन्द्रीय विद्यालय से ग्रहण की है। वही उन्होने एनआईटी भोपाल से मेकेनिकल इंजीनियर की पढ़ाई कर वर्ष २०१६ में बजाज आटो मोबाईल कंपनी पुणे के आरएनडी वर्ग में कार्य किया और यूपीएससी का अटेम्प वर्ष २०१८ में दिया जिसमें प्रीलिम्स क्लीयर हुआ लेकिन मेंस परीक्षा में वे ६ अंको से चूक गये। जिसके पश्चात उन्होने वर्ष २०१९ एवं २०२० में भी यूपीएससी की परीक्षा दी लेकिन सफलता नही मिली। वर्ष २०२१ में उन्होने पुन: प्रयास किया जिसमें उन्होने यूपीएससी तीनों परीक्षाओं में सफलता अर्जित कर आल इंडिया रैकिंग में ३७५ वा स्थान अर्जित किया है। विदित हो कि आदित्य पटले के पिता ज्ञानीराम पटले गृह ग्राम खैरलांजी के गजपुर का है जो सेवानिवृत्त होने के बाद वारासिवनी के वार्ड नं.१४ स्थित गंगोत्री में निवास कर रहे है।

पद्मेश न्यूज से चर्चा में आदित्य पटले ने बताया कि उनकी शिक्षा इंदौर में हुई है और एनआईटी भोपाल से इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होने दो साल बजाज आटो मोबाईल में कार्य किया है। इस दौरान अपने सीनियर मित्रों से प्रभावित होकर यूपीएससी की परीक्षा में भाग लिया जिसमें प्रथम पेपर में उन्हे सफलता मिली किंतु मैंस नही निकल पाया। उसके बाद वर्ष १९ व २० में भी उन्होने प्रयास किया लेकिन सफलता उन्हे वर्ष २०२१ में प्राप्त हुई। वे अपनी इस सफलता में अपने परिवार व ईश्वर व अपने परिचितों को देते है। श्री पटले ने बताया कि उन्होने इस परीक्षा की तैयारी सेल्फ स्टेडी कर ऑनलाईन परीक्षण लिया जिसके ही फलस्वरूप उन्हे यह सफलता प्राप्त हुई है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here