बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने की बड़ी-बड़ी घोषणाएं प्रदेश सरकार करती है एवं आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए संजीवनी १०८ एम्बुलेंस सेवाएं प्रदान की गई है ताकि मरीजों व पीडि़तों का समय पर उपचार हो सके परन्तु लालबर्रा अस्पताल में मरीजों व पीडि़तों को लाने के लिए एम्बुलेंस तक नही है।
ऐसी स्थिति में मरीजों को खासा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है एवं एम्बुलेंस के अभाव में मरीज तड़पते हुए अपनी जान भी गवां सकते है परन्तु जिम्मेदारों के द्वारा कोई ध्यान नही दिया जा रहा है जिससे आमजनों में आक्रोश व्याप्त है। स्वास्थ्य विभाग की नाकामी और सरकारी दावे को खोखला साबित करती है लालबर्रा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में संजीवनी १०८ एम्बुलेंस न होना।
नगर मुख्यालय के हद्य स्थल बस स्टैण्ड के सभामंच में रविवार को दोपहर ३ बजे ४५ वर्षीय विक्षिप्त अज्ञात व्यक्ति को बेहोशी की हालत में देखा गया जो विगत ८ वर्षों से लालबर्रा मुख्यालय में कचरा बिनने के बाद बस स्टैण्ड में रहता है। बस स्टैण्ड में करीब दोपहर ३ बजे किसी की नजर बस स्टैण्ड सभामंच की ओर पड़ी तो उन्होने पास जाकर देखा तो उसके नाक से खून निकल रहा था एवं बेसुध पड़ा हुआ था।
जिसके बाद नसीर उल्ला खान ने तत्काल डायल १००, लालबर्रा अस्पताल व संजीवनी १०८ एम्बुलेंस को सूचना दी परन्तु एक घंटे बित जाने के बाद भी कोई एम्बुलेंस व पुलिस वाले नही पहुंचे। बीएमओं डॉ. ऋत्विक पटेल ने बताया कि लालबर्रा अस्पताल में मरीजो व पीडि़तों को लाने के लिए संजीवनी १०८ एम्बुलेंस नही है सिर्फ प्रसुती महिलाओं को लाने व छोडऩे के लिए एक एम्बुलेंस उपलब्ध है ऐसी स्थिति में बालाघाट, वारासिवनी से एम्बुलेंस बुलाना पड़ता है।









































