वारासिवनी(पद्मेश न्यूज)। सरकार के द्वारा किसानों को लाभ पहुंचाने और लाभ का धंधा बनाने के लिए अनेकों वादे किए जा रहे हैं। वहीं धान का समर्थन मूल्य ३१०० रुपये प्रति क्विंटल देकर किसानों को लाभ पहुंचाने की भी बात कही गई थी परंतु वास्तविकता में सब शून्य ही नजर आ रहा है। इसी कड़ी में धान उपार्जन केन्द्रों में एक नया मामला सामने में आया है जिसमें सरकार के द्वारा किसानों के द्वारा दी गई धान के भुगतान से पूर्ण कर्ज काटने का कार्य किया जा रहा है। जिसमें किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है क्योंकि इस प्रकार पूरा कर्ज काटने के कारण किसानों को हाथ खाली ही नजर आ रहे है। जिन्हें बेरंग वापस लौटना पड़ रहा है जबकि शासन के द्वारा किसानों को ० प्रतिशत ब्याज पर खरीफ के रूप में ३१ मार्च तक के लिए लोन दिया गया है। जिसकी काल अवधि पूरी ९ महीना होने के बाद भी ६ महीने में ही पूरा कर्ज किसानों को धान खरीदी के माध्यम से दबोच कर सरकार वसूल कर रही है। खरीदी केंद्रों से कई छोटे किसानों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है, जिनके सामने आगे अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बनाए रखने की समस्या बनी हुई है। जबकि सरकार के द्वारा किसानों को सुविधा देने के लिए ० प्रतिशत ब्याज पर लोन देने की बात कई बार मंचों से कही गई है। ताकि किसान अपने परिवार का लालन पालन पोषण जीवन निर्वाह सहित सामाजिक जिम्मेदारी को सक्रिय रूप से निभा सके। परंतु उपज के भुगतान से पूर्ण कर्ज कटौती करके सरकार किसानों की आशाओं पर पानी फेर रही है।
निराश होकर लौट रहे किसानों में आक्रोश
प्रदेश सरकार के द्वारा धान उपार्जन केंद्रो के माध्यम से किसानों की उपज खरीदी करने का कार्य किया जा रहा है। जहां पर किसानों की उपज लेने के बाद उसके भुगतान में से किसानों का पूरा कर्ज काट लिया जा रहा है जिसको लेकर किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस दौरान किसानों को धान उपार्जन केंद्र में धान बेचने के बाद भी खाली हाथ वापस घर लौटना पड़ रहा है। जिससे वह काफ ी निराश नजर आ रहे हैं जबकि कर्ज वसूली के ३ महीने अभी बचे हुए हैं । ऐसे में उन्हें धान बेचकर मजदूरी मशीनरी सहित विभिन्न भुगतान कर अपनी जीविका को संभालना था। परंतु उपज बेचने के बाद भी हाथ खाली होने पर वह बहुत ज्यादा निराशा है। जो सरकार पर मनमानी करने और बनाए गए नियमों का उल्लघंन करने का आरोप लगा रहे हैं।
दो टर्म में ९ एवं ६ महीना के लिए दिया जाता है किसानों को लोन
सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को खरीफ और रबी सीजन की खेती करने के लिए दो टर्म में लोन के रूप में राशि खाद बिज एवं अन्य सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। जिसमें जून और जुलाई में खरीफ का लोन दिया जाता है जिसे चुकता करने के लिए मार्च तक ९ महीना का समय किसानों के पास होता है। वहीं दिसंबर में रबी का लोन दिया जाता है जिसकी काल अवधि ६ महीने की जून तक होती है। इसके बाद समितियों के माध्यम से निर्धारित प्रतिशत से ब्याज की वसूली लोन लेने के दिनांक से वसूल की जाती है। हालांकि सभी किसानों के द्वारा समय पर यह लोन सोसायटी में फसल से या नकद रूप से जमा कर दिया जाता है और लगातार किसानों के साथ यह कालचक्र चलता रहता है। जिसमें किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है वह लोन भी ले लेता है और फ सल भी लगा लेता है वहीं अपने सभी कार्यों को संपादित कर पाता है।
देनदारी की समस्या से किसान परेशान
हमारा क्षेत्र कृषि प्रधान है जहां पर अधिकांश लोग खेती किसानी कर अपना जीवन व्यापन करते हैं। जहाँ किसानों के द्वारा समिति से लोन लेकर मजदूर और मशीनरी के साथ मिलकर अपनी खेती की जाती है। सरकार ने ३१०० रूपये प्रति क्विंटल धान का समर्थन मूल्य की घोषणा से उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई थी। परंतु वादा पूरा ना होने से किसान वैसे ही नाराज थे जो अपनी देनदारी की समस्या के लिए उपज को काटकर सोसायटी में किसान लेकर आ रहे हैं। जहां पर पहले किसान अपनी इच्छा अनुसार लोन कटवाता था जो ३१ मार्च के पहले पूरा लोन जमा कर देता था। परंतु इस बार किसान धान लेकर सेवा सहकारी समिति में आ रहा है जहां पर उनका पूरा लोन ३ महीने पहले उपज के मूल्य से काट लिया जा रहा है। जिसमें कुछ किसानों के ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्हें दूसरे किसानों से उधार लेकर ट्रैक्टर का किराया और अपने घर वापस जाना पड़ा है। परंतु इसके बाद भी उन्हें अपनी देनदारी का डर बना हुआ है क्योंकि कृषि कार्य में लगने वाले उपकरण और मजदूरी की मेहनत अभी भी किसान के ऊपर कर्ज है।










































