मऊगंज इलाके में महीनों से साथ घूम रहे दो हाथियों में से एक की करंट लगने से मौत हो गई। दूसरे हाथी ने साथी के शव को ढकने वाली पन्नी हटाकर उसे धक्का देकर जिंदा करने की कोशिश की। नाकाम होने के बाद वह जोर से चिंघाड़ता रहा और शव के पास बैठा रहा।रीवा: मऊगंज इलाके में महीनों से साथ घूम रहे दो हाथियों में से एक की करंट लगने से मौत हो गई। इसके बाद दूसरे हाथी का व्यवहार ऐसा रहा कि वन विभाग की टीम भी उसे इलाके से सुरक्षित निकालने में जुट गई। मलकपुर जंगल में उसने साथी के शव को ढककर रखी गई पन्नी हटा दी और उसे धक्का देकर जिंदा करने की कोशिश करता रहा। जब वह इसमें नाकाम रहा तो जोर से चिंघाड़ता रहा और शव के पास ही बना रहा।
बाद में गांवों की ओर उसके जाने की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने उसका रेस्क्यू किया। मंगलवार रात करीब 8 बजे शुरू हुआ अभियान आधी रात तक चला। दो दिन की तैयारी के बाद हाथी को सुरक्षित पकड़कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व भेज दिया गया।साथी की मौत के बाद शव के पास पहुंचा
रीवा के वन मंडलाधिकारी लोकेश निरापुरे के अनुसार दोनों हाथी काफी समय से साथ रह रहे थे। यह जोड़ी करीब 19 सितंबर को मऊगंज-सिंगरौली सीमा की ओर से आगे बढ़ते हुए मलकपुर पहुंची थी।
शनिवार को इनमें से एक हाथी की करंट लगने से मौत हो गई। इसके बाद दूसरा हाथी इलाके में अकेला घूम रहा था।
वन विभाग ने साथी के शव को प्लास्टिक की पन्नी से ढक दिया और करीब 100 मीटर दूर रहकर निगरानी करने लगा, ताकि दूसरा हाथी शव को न देख सके। हालांकि, हाथी वहां पहुंच गया। उसने पन्नी हटा दी और शव को धक्का देने लगा।
अधिकारियों के मुताबिक उसका यह व्यवहार साथी को उठाने या जिंदा करने की कोशिश जैसा दिखाई दे रहा था। काफी देर प्रयास करने के बाद जब वह सफल नहीं हुआ तो उसने जोर से चिंघाड़ना शुरू कर दिया और शव के पास ही बना रहा।
गांवों की ओर जाने की आशंका से शुरू हुआ रेस्क्यू
साथी की मौत के बाद हाथी काफी व्यथित अवस्था में इलाके में घूम रहा था। वन विभाग को आशंका थी कि वह आसपास के गांवों की ओर जा सकता है। इसी वजह से उसे मलकपुर जंगल से सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी शुरू की गई।अधिकारियों के अनुसार पहले दोनों हाथियों ने इलाके में रहते हुए आक्रामक व्यवहार नहीं दिखाया था। लेकिन साथी की मौत के बाद बचे हाथी के व्यवहार को देखते हुए उसे वहां से हटाने का फैसला किया गया।
चार प्रशिक्षित हाथियों की मदद से चला अभियान
मंगलवार रात करीब 8 बजे मलकपुर जंगल में हाथी को पकड़ने का अभियान शुरू किया गया। मऊगंज, रीवा और सीधी वन मंडलों की टीमें इसमें शामिल थीं। रेस्क्यू अभियान में बांधवगढ़ और संजय टाइगर रिजर्व से लाए गए चार प्रशिक्षित हाथियों की भी मदद ली गई। टीमों ने जंगल में हाथी के करीब पहुंचकर उसे नियंत्रित किया। करीब चार घंटे चले अभियान के बाद आधी रात तक हाथी को सुरक्षित पकड़ लिया गया। इसके बाद उसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ले जाया गया।महीनों से साथ घूम रहे थे दोनों हाथी
वन विभाग के अनुसार दोनों हाथी पिछले कुछ समय से एक साथ मऊगंज क्षेत्र में घूम रहे थे। साथी की मौत के बाद अकेले बचे हाथी का अपने मृत साथी के शव के पास लंबे समय तक रहना इस घटना का सबसे उल्लेखनीय पहलू रहा।
वन अधिकारियों ने बताया कि दोनों हाथियों ने पहले कोई आक्रामक व्यवहार नहीं दिखाया था। हालांकि, साथी की मौत के बाद उसके व्यवहार को देखते हुए उसे इलाके से हटाना जरूरी समझा गया।
रेस्क्यू अभियान एक नजर में
आधी रात तक हाथी को पकड़कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व भेज दिया गया।
दोनों हाथी काफी समय से साथ मऊगंज क्षेत्र में घूम रहे थे।
करीब 19 सितंबर को वे मलकपुर पहुंचे थे।
शनिवार को एक हाथी की करंट लगने से मौत हो गई।
दूसरे हाथी ने शव पर डाली गई पन्नी हटाकर उसे धक्का दिया।
वह काफी देर तक शव के पास रहा और जोर से चिंघाड़ता रहा।
मंगलवार रात करीब 8 बजे रेस्क्यू अभियान शुरू हुआ।
मऊगंज, रीवा और सीधी की टीमों ने अभियान में हिस्सा लिया।
बांधवगढ़ और संजय टाइगर रिजर्व के चार प्रशिक्षित हाथियों की मदद ली गई।










































