120 Year Old Rail Map: भांडेर शहर को रेलवे से जोड़ने के लिए चल रहे नागरिक अभियान को एक सदी से भी पुराना दस्तावेज मिलने के बाद नई धार मिल गई है। ग्वालियर रियासत काल के 1905-06 के एक रेलवे गजट में झांसी से भिंड के बीच रेल लिंक का प्रस्ताव मिला है, जिसे पूर्व मंत्री केशरी चौधरी ने 1996 में विधानसभा में उठाया था।दतिया: मध्य प्रदेश के दतिया जिले के भांडेर कस्बे में रेलवे कनेक्टिविटी की मांग अब एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। बरसों से सार्वजनिक परिवहन की कमी और शाम के वक्त यातायात के सीमित साधनों से जूझ रहे यहां के नागरिकों और व्यापारियों को एक सदी से भी पुराना एक ऐतिहासिक दस्तावेज हाथ लगा है, जिसने इस मांग को पुनर्जीवित कर दिया है। ग्वालियर रियासत काल के इस दस्तावेज के सामने आने के बाद इलाके में ‘रेल लाओ अभियान’ ने जोर पकड़ लिया है।
ऐसे सामने आया इतिहास का पन्ना
यह पूरा मामला तब चर्चा में आया जब भांडेर के नागरिक और व्यापारी अपने क्षेत्र में बेहतर ट्रांसपोर्ट और रेल सुविधा न होने को लेकर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान पूर्व मंत्री केशरी चौधरी के पास मौजूद वर्ष 1905-06 के ग्वालियर रियासत कालीन रेलवे गजट का जिक्र छिड़ा। इस पुरानी फाइल में साफ तौर पर झांसी और भिंड के बीच एक प्रस्तावित रेल लिंक का खाका खींचा गया था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहले चिरगांव से दतिया के बीच रेल लिंक पर चर्चा चल रही थी, लेकिन इस पुराने गजट ने स्पष्ट कर दिया कि झांसी-भिंड का पुराना रूट भांडेर के लिए अधिक व्यावहारिक और फायदेमंद साबित हो सकता है।व्यावसायिक और धार्मिक महत्व से जुड़ा है मुद्दा
स्थानीय खाद्य व्यापारी 51 वर्षीय मनीष पोद्दार ने बताया कि भांडेर एक तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र है और यहां आसपास के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों के कारण हर महीने 20,000 से 25,000 श्रद्धालु व आगंतुक आते हैं। इसके बावजूद शाम 4:30 बजे के बाद यहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट के विकल्प लगभग खत्म हो जाते हैं, जिससे लोगों को भारी असुविधा होती है।
इसके अलावा, भांडेर एक प्रमुख खाद्यान्न भंडारण हब भी है, लेकिन रेल लोडिंग सुविधा न होने के कारण व्यापारिक क्षमता पूरी तरह उपयोग नहीं हो पाती। जानकारों का मानना है कि यदि यहां रेलवे लोडिंग सुविधा मिल जाए, तो अकेले रेलवे को इस क्षेत्र से 25 करोड़ से 45-50 करोड़ रुपए तक का वार्षिक राजस्व मिल सकता है।गांव-गांव तक पहुंचाई जाएगी मुहिम
अभियान से जुड़े 45 वर्षीय युवराज चौधरी का कहना है कि इस ऐतिहासिक दस्तावेज के मिलने से पूरे आंदोलन की दिशा और ऊर्जा बदल गई है। शुरुआती दौर में जो बातें केवल चाय की टपरी या बैठकों तक सीमित थीं, वे अब एक बड़े जन-अभियान का रूप ले चुकी हैं। इसे पूरी तरह गैर-राजनीतिक रखते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है।
- 120 साल पुराना दस्तावेज: 1905-06 के रेलवे गजट और उसके 1996 के पुनर्मुद्रण में झांसी से भिंड के बीच रेल लाइन बिछाने का जिक्र मिला है।
- पूर्व मंत्री के पास मिला गजट: यह महत्वपूर्ण दस्तावेज पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक 80 वर्षीय केशरी चौधरी के पास सुरक्षित कागजात के बीच से मिला, जिसे उन्होंने 1996 में विधानसभा में सवाल उठाते समय प्राप्त किया था।
- व्यापारियों और युवाओं की मुहिम: इस खोज के बाद स्थानीय व्यापारियों, युवाओं और नागरिकों ने मिलकर ‘रेल लाओ अभियान’ शुरू किया है, जिसके सोशल मीडिया ग्रुप्स से 800 से अधिक लोग जुड़ चुके हैं।
अभियान के तहत अब तक दो बड़ी बैठकें हो चुकी हैं और 100 से अधिक सक्रिय लोग इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। समूह की योजना जल्द ही स्थानीय सांसद संध्या राय से मुलाकात करने और गांव-गांव जाकर लोगों को इस पुरानी योजना से जोड़ने की है, ताकि सरकार और रेलवे बोर्ड तक भांडेर की इस जायज मांग को मजबूती से पहुंचाया जा सके










































