जिले में अब तक 42 इंच वर्षा, सामान्य औसत से करीब 12 इंच पीछे; बारिश ने रोका जनजीवन
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पदमेश न्यूज़। बालाघाट। करीब 20 दिनों के लंबे इंतजार के बाद मंगलवार को बालाघाट में मौसम ने अचानक करवट ली। दोपहर बाद आकाशीय गर्जना के साथ शुरू हुई झमाझम बारिश ने शहर की रफ्तार थाम दी। तेज बारिश के कारण सड़क किनारे बनी नालियों से पानी की निकासी नहीं हो सकी और कई स्थानों पर सड़कों पर पानी जमा हो गया। बाजारों में भी ग्राहकी प्रभावित रही और बारिश के चलते लोग घरों से निकलने से बचते नजर आए।मौसम विभाग के अनुसार जिले में मौसम की स्ट्रांग एक्टिविटी के चलते बारिश का दौर बना हुआ है और आगामी दिनों में भी बारिश होने की संभावना है। हालांकि बारिश के बावजूद चालू वर्षा सत्र में बालाघाट जिला वर्षा के आंकड़े में पीछे चल रहा है। 1 जून से 22 सितंबर तक जिले में करीब 42 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो वर्ष 2025 की इसी अवधि की तुलना में करीब 5 इंच कम है।
सामान्य औसत से करीब 12 इंच कम बारिश
जिले की सामान्य औसत वर्षा करीब 57 इंच है। इस लिहाज से 22 सितंबर तक जिले में करीब 54 इंच के आसपास बारिश हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक के आंकड़ों के अनुसार वर्षा सामान्य से करीब 12 इंच कम है। तहसीलवार बारिश के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर सामने आया है।
बालाघाट तहसील में सबसे ज्यादा, कटंगी सबसे पीछे
अधीक्षक भू-अभिलेख कार्यालय से जारी आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 22 सितंबर तक बालाघाट तहसील में सबसे अधिक 55 इंच बारिश दर्ज की गई है। वहीं कटंगी तहसील में सबसे कम 27 इंच बारिश हुई है।
तहसीलवार बारिश का आंकड़ा—
बालाघाट — 55 इंच
वारासिवनी — 53 इंच
बैहर — 45 इंच
किरनापुर — 44 इंच
लांजी — 42 इंच
परसवाड़ा — 40 इंच
बिरसा — 39 इंच
खैरलांजी — 36 इंच
तिरोड़ा/तिरोड़ी — 35 इंच
कटंगी — 27 इंच
पिछले साल कई तहसीलों में ज्यादा बरसे थे बदरा
वर्ष 2025 में 22 सितंबर तक की स्थिति से तुलना करें तो कई तहसीलों में इस वर्ष बारिश कम दर्ज हुई है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक बालाघाट में 56, वारासिवनी में 59, बैहर में 57, लांजी में 31, कटंगी में 44, किरनापुर में 48, खैरलांजी में 19, लालबर्रा में 53, बिरसा में 39, परसवाड़ा में 63 और तिरोड़ी में 47 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई थी।
मंगलवार को हुई बारिश ने जहां लोगों को गर्मी और उमस से राहत दी, वहीं लंबे अंतराल के बाद हुई तेज बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की स्थिति भी सामने ला दी। सड़कों पर पानी जमा होने से राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।










































