Indian Economy: वित्त मंत्रालय ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर वृद्धि के मार्ग पर है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में घरेलू आपूर्ति और मांग मजबूत रही। महंगाई दर नियंत्रण में है और मानसून की अच्छी प्रगति के कारण अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मजबूती के साथ प्रवेश कर रही है। कर्ज वृद्धि में सुस्ती चिंता का विषय है।
Indian Economy : वित्त मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर रुख के साथ विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में घरेलू आपूर्ति और मांग की बुनियाद मजबूत दिखाई दे रही है। महंगाई दर नियंत्रण में रहने और मानसून की अच्छी प्रगति के कारण अर्थव्यवस्था दूसरी तिमाही में भी मजबूती से प्रवेश कर रही है।
वैश्विक अस्थिरता और व्यापार अनिश्चितता का असर
हालांकि वैश्विक तनाव बढ़ा है, खासकर अमेरिका में कमजोर आर्थिक वृद्धि के चलते भारतीय निर्यात की मांग प्रभावित हो सकती है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2025 की पहली तिमाही में 0.5% घट गई है। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के शुल्क नीति में अनिश्चितता भारत के व्यापार प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
कर्ज वृद्धि में नरमी चिंता का विषय
मौद्रिक नीति में नरमी और बैंकों के मजबूत बही-खातों के बावजूद कर्ज वृद्धि धीमी हुई है, जो कर्ज लेने वालों की सतर्कता और कर्ज देने वालों के जोखिम बचाव रवैये को दर्शाती है। कंपनियां कम उधारी लागत के कारण बॉन्ड बाजार, खासकर वाणिज्यिक पत्रों में ज्यादा रुचि दिखा रही हैं।
रोजगार सृजन के लिए ईएलआई योजना जरूरी
न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने कहा कि रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन (ईएलआई) योजना के साथ अब कंपनियों को रोजगार सृजन की दिशा में कदम बढ़ाने का समय है। 99,446 करोड़ रुपये के व्यय के साथ यह योजना अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियां बनाने पर केंद्रित है।
मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक बुनियाद
व्यापार तनाव, वैश्विक अस्थिरता और बाहरी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की व्यापक आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है। मजबूत घरेलू मांग, राजकोषीय सूझबूझ और मौद्रिक समर्थन के चलते भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा।
वित्त वर्ष 2025-26 में 6.2 से 6.5% के बीच GDP वृद्धि अनुमान
विभिन्न सर्वेक्षणों और पूर्वानुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP वृद्धि दर 6.2 से 6.5 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। उच्च आवृत्ति संकेतक जैसे GST संग्रह, ई-वे बिल, निर्यात और पीएमआई आंकड़े भी आर्थिक मजबूती का संकेत देते हैं।
मानसून की अच्छी प्रगति से कृषि क्षेत्र को फायदा
दक्षिण-पश्चिम मानसून की अनुकूल प्रगति ने कृषि गतिविधियों को बढ़ावा दिया है, जिससे खरीफ की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हुई है। पर्याप्त उर्वरक उपलब्धता और जलाशयों में संतोषजनक जल स्तर भी अच्छी फसल के संकेत हैं, जो ग्रामीण आय और खपत को बढ़ावा देंगे।
इस प्रकार, वित्त मंत्रालय की मासिक समीक्षा में यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन कर्ज वृद्धि में नरमी और वैश्विक अनिश्चितताएं चुनौती बनी हुई हैं।