- Suryakumar Yadav: भारत के टी20 विश्व कप विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव का मानना है कि ताबड़तोड़ क्रिकेट में भारत के पास प्रतिभाओं का पूल इतना बड़ा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ही समय पर दो-तीन बेहतरीन टीमें उतारी जा सकती हैं और यह सच कहने में उन्हें कोई हिचक नहीं है। आईसीसी पुरूष टी20 विश्व कप 2024 में खिताबी जीत के बाद भारत की टी20 टीम की कमान संभालने वाले सूर्यकुमार ने घरेलू प्रतिस्पर्धाओं और इंडियन प्रीमियर लीग को टी20 क्रिकेट में भारत के बढते दबदबे का श्रेय दिया।
- भारतीय कप्तान का बयान
- सूर्यकुमार के 2024 में कप्तान बनने के बाद से भारतीय टीम ने 52 में से 42 टी20 मैच जीते हैं। पीटीआई वीडियो के साथ रविवार को पॉडकास्ट इंटरव्यू में सूर्यकुमार ने मौजूदा टीम को भारत की सर्वश्रेष्ठ टी20 टीम बताया। उन्होंने कहा, ‘अगर आप प्रतिभा की बात करें तो नियमित स्तर पर प्रतिभायें आती रही है। आईपीएल है, फ्रेंचाइजी क्रिकेट और फिर घरेलू क्रिकेट। आप देख सकते हैं कि हर साल कितने खिलाड़ी निकल रहे हैं। आप जितनी चाहें उतनी टी20 टीमें बना सकते हैं।’
- ‘भारत के पास क्रिकेट में अपार टैलेंट’
- भारत के टी20 कप्तान ने कहा, ‘मुझे लगता है कि प्रतिभायें अपार है। हमारा बेस इतना मजबूत है कि दो या तीन अंतिम एकादश तैयार की जा सकती है। यह कोई कूटनीतिक जवाब नहीं है। वाकई हमारा ढांचा इतना मजबूत है कि सच कहने में कोई शर्म नहीं है।’ सूर्यकुमार ने विश्व कप में टीम की सफलता का श्रेय सामूहिक प्रयासों को देते हुए कहा कि खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के साझा विजन से इस अप्रत्याशित प्रारूप में जीत की 80 प्रतिशत दर हासिल करने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय मैच अलग तरीके से खेले जाते हैं और आईसीसी टूर्नामेंट में कुछ और होता है। इसलिये टीम को विश्व कप में जीत की लय बनाये रखने के लिये प्रेरित करना पड़ा।
- आंकड़ों पर नहीं देते ज्यादा ध्यान
- मैदान में 360 डिग्री पर स्ट्रोक्स खेलने में माहिर सूर्यकुमार ने कहा, ‘मैं आंकड़ों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता लेकिन मुझे हारना पसंद नहीं है। ड्रेसिंग रूम में सभी अगर एक दिशा में सोचते हैं तो ही यह प्रतिशत हासिल किया जा सकता है।’ उन्होंने टी20 बल्लेबाजी के बारे में कहा, ‘मेरा मानना है कि बल्लेबाजी 70 से 75 प्रतिशत तात्कालिक प्रतिक्रिया होती है। बाकी 25 प्रतिशत स्वाभाविक प्रतिक्रया होती है कि आप उस क्षण क्या करते हैं। मैदान पर उतरने के बाद आप आटोपायलट मोड में होते हैं। आप हालात के अनुरूप खेलने की कोशिश करते हैं।’ अक्सर जोखिम भरे स्ट्रोक्स खेलने वाले सूर्यकुमार ने कहा कि वह हमेशा साहस और लापरवाही के बीच एक लकीर खींचकर चलना पसंद करते हैं।
- ‘कोच को अभी भी बुलाता हूं गौती भाई’
- उन्होंने कहा, ‘साहसी और लापरवाह होने में बहुत बारीक अंतर है। मैं साहसी रहना पसंद करता हूं। लेकिन अगर हालात के अनुसार जोखिम भरे शॉट खेलने की जरूरत है तो करना पड़ता है। जितना ज्यादा जोखिम होगा, उतना अच्छा फल मिलेगा।’ कोच गौतम गंभीर से संबंधों के बारे में उन्होंने कहा कि टीम चुनने के लिये जब वे पहली बार साथ बैठे तो उनकी सोच समान थी। उन्होंने कहा, ‘जो 15 नाम हमने सुझाये थे, उनमे से 14 समान थे। इसका मतलब है कि हम एक सा सोचते हैं। जब लक्ष्य साफ तो तो कोई मतभेद नहीं होते, चर्चा होती है।’ पेशेवर सफलता ने भी उनके निजी संबंधों को बदला नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं अभी भी उन्हें गौती भाई बुलाता हूं। यह बड़े भाई और छोटे भाई वाला संबंध है।’










































