जनगणना 2027′ का आगाज: आज से देश में स्व-गणना शुरू, जानें क्या है प्रक्रिया, कैसे होगा काम पूरा?

0

India Census 16th Phase: देश की जनगणना 2027 का आगाज। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों में स्व-गणना और डिजिटल डेटा संग्रह शुरू।Census 2027: 2027 की जनगणना का अहम चरण, ‘आबादी की गिनती’ सोमवार को लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों में ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ (खुद अपनी जानकारी दर्ज करने) के साथ शुरू होगा। इसमें दूर-दराज के गांव, पहाड़ी समुदाय और मुश्किल रास्तों वाले इलाके शामिल होंगे। 17 से 31 अगस्त के बीच, इन इलाकों के लोग अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं। इसके बाद, जनगणना करने वाले अधिकारी, जिनके पास पिछले हफ्ते बताए गए 40 सवाल होंगे (जिनमें जवाब देने वाले की जाति, माता-पिता की जानकारी और पहचान के दस्तावेज़ शामिल हैं), वह 1 सितंबर से 30 सितंबर तक घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करेंगे। देश के बाकी हिस्सों में आबादी की गिनती अगले साल फरवरी में होगी।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जनगणना कार्यों के मुख्य अधिकारी और निदेशक अमित शर्मा ने कहा, ‘जनगणना का डेटा बिना कागज़ के इस्तेमाल के (पेपरलेस तरीके से) दर्ज किया जाएगा, जैसा कि घरों की सूची बनाने के काम में हुआ था। बर्फीले इलाकों में इसके लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल होगा। आबादी की गिनती से पहले, https://se.census.gov.in पर ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ (खुद जानकारी दर्ज करना) किया जाएगा।’

इस अभियान में लद्दाख के सात ज़िलों में रहने वाले लगभग 2,74,000 लोग शामिल होंगे। जम्मू-कश्मीर में, यह प्रक्रिया डोडा, पुंछ और कुपवाड़ा समेत 16 जिलों में लगभग 88.1 लाख लोगों के लिए होगी।ऊंचाई और ऊबड़-खाबड़ जमीन जैसी चुनौतियां

चुनौतियों में जंस्कार के वे गांव शामिल हैं जहां सड़क संपर्क बहुत कम है, लेह का यिंगचेन गांव जहां सिर्फ दो परिवारों के 11 सदस्य रहते हैं (जो सबसे पास की बस्ती से पैदल सात घंटे की दूरी पर है), और चांगथांग का हानले गांव, जो लगभग 15,000 फीट की ऊंचाई पर बसा है।

शर्मा ने कहा, ‘बेशक, कुछ चोटियां और ज्यादा ऊंचाई वाले इलाके हैं जहां बहुत कम घर होंगे, लेकिन हमने वहां ज्यादा ‘स्पेशल चार्ज’ (विशेष टीमें) तैनात की हैं, खासकर वहां जहां हमारी सेना या ITBP के जवान तैनात हैं… अगर किसी मुश्किल इलाके में बसे दूर-दराज गांव में सिर्फ एक परिवार भी रहता है, तो भी हमारे अधिकारी वहां जाकर उनका डेटा दर्ज करेंगे।’

जनगणना निदेशालय को उम्मीद है कि सोमवार सुबह सबसे पहले उप-राज्यपाल वी.के. सक्सेना, सांसद हनीफा जान, कारगिल हिल डेवलपमेंट काउंसिल के चेयरमैन मोहम्मद जाफर अखून और मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा का डेटा दर्ज किया जाएगा। अखून ने कहा, ‘लद्दाख के लोग बहुत उत्साहित हैं… जनगणना से हमें विकास और सामाजिक-आर्थिक तरक्की के लिए जरूरी जानकारी मिलती है। इससे हमें भविष्य की योजना बनाने के लिए एक व्यापक नजरिया मिलता है।’

हिमाचल प्रदेश में जनगणना का काम

हिमाचल प्रदेश में यह प्रक्रिया तीन जिलों में होगी, जिसमें स्पीति घाटी में 15,049 फीट की ऊंचाई पर बसा दुनिया के सबसे ऊंचे मोटर-योग्य गांवों में से एक, कोमिक भी शामिल है। 2011 में यहां 130 लोग रहते थे और यह गांव 500 साल पुराने लुंडुप त्सेमो गोम्पा बौद्ध मठ का घर है।

प्रमुख जनगणना अधिकारी और जनगणना संचालन निदेशक दीप शिखा शर्मा ने कहा,’जनगणना 2027 भारत की 16वीं और आजादी के बाद आठवीं जनगणना होगी। पहली बार, नागरिकों के पास ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ (खुद जानकारी दर्ज करने) की सुविधा के जरिए इसमें शामिल होने का विकल्प होगा।’

दीप शिखा शर्मा ने आगे कहा, ‘इसके लिए हिमाचल प्रदेश के लगभग 6,903 बर्फ से घिरे गांवों और इलाकों की पहचान पहले से जानकारी जुटाने (एडवांस एन्यूमरेशन) के लिए की गई है, क्योंकि सर्दियों में यहां के हालात बहुत मुश्किल होते हैं और आम जनगणना के समय वहां पहुंचना मुश्किल हो जाता है… इसकी वजह हिमाचल में सर्दियों के मुश्किल हालात हैं, क्योंकि बर्फ़ से घिरे गांवों और इलाकों में भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों के महीनों में यात्रा करना और वहां पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इसलिए, इन इलाकों में आबादी की गिनती का काम कड़ाके की ठंड शुरू होने से पहले ही पूरा कर लिया जाएगा।’

इन इलाकों के लिए जनगणना की रेफरेंस तारीख 1 अक्टूबर, 2026 है। यह शुरुआती जनगणना किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के पांगी-भरमौर जैसे दूर-दराज के इलाकों के लिए खास तौर पर जरूरी है।

recommended by

Herbeauty

10 Things Women Will Only Do With Men They Love

Learn more

ऊंचाई और ऊबड़-खाबड़ जमीन जैसी चुनौतियां

चुनौतियों में जंस्कार के वे गांव शामिल हैं जहां सड़क संपर्क बहुत कम है, लेह का यिंगचेन गांव जहां सिर्फ दो परिवारों के 11 सदस्य रहते हैं (जो सबसे पास की बस्ती से पैदल सात घंटे की दूरी पर है), और चांगथांग का हानले गांव, जो लगभग 15,000 फीट की ऊंचाई पर बसा है।

शर्मा ने कहा, ‘बेशक, कुछ चोटियां और ज्यादा ऊंचाई वाले इलाके हैं जहां बहुत कम घर होंगे, लेकिन हमने वहां ज्यादा ‘स्पेशल चार्ज’ (विशेष टीमें) तैनात की हैं, खासकर वहां जहां हमारी सेना या ITBP के जवान तैनात हैं… अगर किसी मुश्किल इलाके में बसे दूर-दराज गांव में सिर्फ एक परिवार भी रहता है, तो भी हमारे अधिकारी वहां जाकर उनका डेटा दर्ज करेंगे।’

जनगणना निदेशालय को उम्मीद है कि सोमवार सुबह सबसे पहले उप-राज्यपाल वी.के. सक्सेना, सांसद हनीफा जान, कारगिल हिल डेवलपमेंट काउंसिल के चेयरमैन मोहम्मद जाफर अखून और मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा का डेटा दर्ज किया जाएगा। अखून ने कहा, ‘लद्दाख के लोग बहुत उत्साहित हैं… जनगणना से हमें विकास और सामाजिक-आर्थिक तरक्की के लिए जरूरी जानकारी मिलती है। इससे हमें भविष्य की योजना बनाने के लिए एक व्यापक नजरिया मिलता है।’

हिमाचल प्रदेश में जनगणना का काम

हिमाचल प्रदेश में यह प्रक्रिया तीन जिलों में होगी, जिसमें स्पीति घाटी में 15,049 फीट की ऊंचाई पर बसा दुनिया के सबसे ऊंचे मोटर-योग्य गांवों में से एक, कोमिक भी शामिल है। 2011 में यहां 130 लोग रहते थे और यह गांव 500 साल पुराने लुंडुप त्सेमो गोम्पा बौद्ध मठ का घर है।

प्रमुख जनगणना अधिकारी और जनगणना संचालन निदेशक दीप शिखा शर्मा ने कहा,’जनगणना 2027 भारत की 16वीं और आजादी के बाद आठवीं जनगणना होगी। पहली बार, नागरिकों के पास ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ (खुद जानकारी दर्ज करने) की सुविधा के जरिए इसमें शामिल होने का विकल्प होगा।’

दीप शिखा शर्मा ने आगे कहा, ‘इसके लिए हिमाचल प्रदेश के लगभग 6,903 बर्फ से घिरे गांवों और इलाकों की पहचान पहले से जानकारी जुटाने (एडवांस एन्यूमरेशन) के लिए की गई है, क्योंकि सर्दियों में यहां के हालात बहुत मुश्किल होते हैं और आम जनगणना के समय वहां पहुंचना मुश्किल हो जाता है… इसकी वजह हिमाचल में सर्दियों के मुश्किल हालात हैं, क्योंकि बर्फ़ से घिरे गांवों और इलाकों में भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों के महीनों में यात्रा करना और वहां पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इसलिए, इन इलाकों में आबादी की गिनती का काम कड़ाके की ठंड शुरू होने से पहले ही पूरा कर लिया जाएगा।’

इन इलाकों के लिए जनगणना की रेफरेंस तारीख 1 अक्टूबर, 2026 है। यह शुरुआती जनगणना किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के पांगी-भरमौर जैसे दूर-दराज के इलाकों के लिए खास तौर पर जरूरी है।

दूर-दराज के इलाकों के लिए खास तौर पर जरूरी यह शुरुआती जनगणना

प्रक्रिया और तैनात किए जाने वाले कर्मचारी

दीप शिखा शर्मा ने बताया कि जनगणना का डेटा ‘Census 2027-PE’ नाम के ऐप और खुद जानकारी भरने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) के जरिए इकट्ठा किया जाएगा। निवासी 17 अगस्त से 31 अगस्त, 2026 के बीच आधिकारिक सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल के जरिए ऑनलाइन जनगणना की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके बाद उन्हें एक सेल्फ-एन्यूमरेशन ID मिलेगी, जिसे वे फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान जनगणना अधिकारियों के साथ शेयर कर सकते हैं। शर्मा ने साफ किया कि जनगणना की प्रक्रिया के दौरान कोई OTP नहीं मांगा जाएगा।

इस काम को करने के लिए पूरे हिमाचल प्रदेश में लगभग 20,390 एन्यूमेरेटर और सुपरवाइजर तैनात किए जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल जनगणना में मोबाइल एप्लीकेशन और एक खास जनगणना मैनेजमेंट और मॉनिटरिंग पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे फील्ड ऑपरेशन्स की रियल-टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी।

मोबाइल एप्लीकेशन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में काम करेगा, जिससे दूर-दराज और नेटवर्क की कमी वाले इलाकों में भी आसानी से डेटा इकट्ठा किया जा सकेगा। उन्होंने कहा, ‘इसलिए, हिमाचल की शुरुआती जनगणना मुख्य रूप से मौसम और पहुंच पर आधारित प्रक्रिया है, जिसका मकसद सर्दियों में इन इलाकों तक पहुंच मुश्किल होने से पहले दूर-दराज के समुदायों तक पहुंचना है।’

उत्तराखंड में आम लोगों और सेना की जनगणना

उत्तराखंड में, यह प्रक्रिया चार जिलों के 131 गांवों और तीन कस्बों में लगभग 52,000 लोगों को कवर करेगी- उत्तरकाशी में 69 गांव, चमोली में 23, रुद्रप्रयाग में चार और पिथौरागढ़ में 35 गांव। तीन कस्बे गंगोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ हैं। उत्तराखंड में जनगणना ऑपरेशन्स की डायरेक्टर ईवा श्रीवास्तव ने कहा, ‘दूसरे पहाड़ी राज्यों की तुलना में, उत्तराखंड में बर्फ से ढका इलाका अपेक्षाकृत कम है।’

श्रीवास्तव ने कहा, ‘बर्फ से ढके इलाकों में जनसंख्या की गिनती के लिए हमारी तैयारियां चल रही हैं। हमने मास्टर और फील्ड ट्रेनर्स की ट्रेनिंग पूरी कर ली है। चार्ज ऑफिसर्स की ट्रेनिंग चल रही है, इसके बाद एन्यूमेरेटर और सुपरवाइजर की ट्रेनिंग होगी।’

बर्फ से ढके इलाकों में इस काम के लिए लगभग 162 एन्यूमेरेटर और 34 सुपरवाइजर तैनात किए जाने की उम्मीद है। इस दौरान बर्फ़बारी वाले इलाकों में सेना और पैरामिलिट्री यूनिट्स की आबादी की गिनती भी एक साथ की जाएगी। इसके लिए राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं, जबकि संबंधित यूनिट्स द्वारा विशेष प्रभारी अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। इसके बाद इस काम के लिए गणना करने वाले और सुपरवाइजर नियुक्त किए जाएंगे।

श्रीवास्तव ने कहा, ‘सुरक्षा कारणों से, मिलिट्री और पैरामिलिट्री यूनिट्स के लिए गिनती का काम पेपर मोड में किया जाएगा। इसके बाद डेटा को स्पेशल चार्ज ऑफिसर्स के ऑफिस में डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा।’

अतिरिक्त सवालों से चिंताएं बढ़ीं

पिछले हफ्ते, केंद्र सरकार ने लोगों से पूछे जाने वाले 40 सवालों की जानकारी दी, जिसमें आजाद भारत में पहली बार जाति के बारे में भी एक सवाल शामिल था। भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण के आदेश में 2011 की जनगणना (जब भारत में पिछली बार यह प्रक्रिया हुई थी) की तुलना में 11 सवाल ज्यादा शामिल किए गए। नए सवालों में माता-पिता की जानकारी, पासपोर्ट, आधार, वोटर आईडी और मोबाइल नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस, कोविड-19 वैक्सीनेशन की जानकारी और स्थायी पते जैसे सवाल शामिल थे –– जिससे प्राइवेसी को लेकर चिंताएं पैदा हुईं।

नोटिफिकेशन में जाति से जुड़ा सवाल 10वें नंबर पर था- ‘अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/जाति’ के तौर पर और यह ओपन-एंडेड फॉर्मेट में था, जिसका मतलब है कि जनगणना अधिकारी व्यक्ति द्वारा बताई गई जाति को ही दर्ज करेंगे, बिना किसी पहले से तैयार लिस्ट से मिलान किए।

एक अधिकारी ने कहा कि खुद से जानकारी भरने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) की सुविधा जनगणना के डिजिटल बदलाव का हिस्सा थी और इससे लोगों को जनगणना अधिकारी के आने से पहले ही अपने घर के सदस्यों की जानकारी ऑनलाइन भरने की सुविधा मिली। उन्होंने कहा, ‘इसका मकसद घर-घर जाकर की जाने वाली इस प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करना और डेटा इकट्ठा करने की क्षमता को बेहतर बनाना है।’ पहले चरण – घरों की लिस्टिंग और घरों से जुड़ा डेटा इकट्ठा करने, में भी सभी निवासियों को खुद से जानकारी भरने की सुविधा दी गई थी।

मूल रूप से 2021 में होने वाली जनगणना को कोविड-19 महामारी के कारण टाल दिया गया था। डेटा इकट्ठा करने का काम 1 मार्च, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि नतीजों को इकट्ठा करने और पब्लिश करने में दो से तीन साल लगेंगे। इस प्रक्रिया से भारत के दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश होने की पुष्टि होने की संभावना है।

सरकार के एक दूसरे अधिकारी ने कहा, ‘अगले साल जब यह पूरी प्रक्रिया खत्म हो जाएगी, तो हमारे पास एक दशक से भी ज्यादा समय में पहली बार आबादी का पूरा डेटा होगा, जिसमें भारत की आबादी की जाति, शिक्षा, रोजगार, पलायन और अन्य सामाजिक-आर्थिक विशेषताओं के बारे में विस्तृत जानकारी शामिल होगी।’

लाल किले से क्या बोले पीएम?

लाल किले की प्राचीर से पीएम नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को कहा था,’मैं आप सबसे एक मदद मांग रहा हूं… इन दिनों देश में जनगणना का काम हो रहा है और सिर्फ आंकड़ों से बात नहीं बनती, उसकी बारीकियों से नीतियां बनती हैं, योजनाएं बनती हैं, देश आगे की रूपरेखा तैयार करता है। इसलिए सटीक जानकारी होना बहुत जरूरी है..मैं देश के नौजवानों से कहता हूं कि आप अपने परिवार को बिठाकर पूरे फॉर्म को समझिए। पहले कागज पर फॉर्म भर दीजिए, कोई गलती है तो ठीक कर दीजिए। फिर उसे डिजिटली अपलोड कर दीजिए। इससे देश का समय और शक्ति सही काम के लिए उपयोग में आएगी, इसलिए मैं अपने देश के नौजवानों से जनगणना के इस काम में सक्रियता से जुड़ने के लिए आग्रह करता हूं।’

लेटेस्ट न्यूज

sports

गावस्कर ने BCCI के फिटनेस सिस्टम पर उठाए सवाल, बोले- ट्रेनिंग प्रोग्राम में ही कोई कमी

india

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधायक के रूप में ली शपथ, कहा- ये बड़ी जिम्मेदारी, इस सदन का सदस्य बनना गर्व की बात

india

राहुल गांधी को बड़ी राहत, आय से अधिक संपत्ति मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुनवाई पर SC ने लगाई रोक

india

नितिन नवीन आज करेंगे अपनी नई टीम का ऐलान; अनुराग ठाकुर और स्मृति ईरानी की वापसी की चर्चा, क्या है मकसद?

viral

कार को कराया रिवर्स, खुद गलत साइड पर बिना हेलमेट के थी लड़की, Video हुआ वायरल तो उल्टा पड़ गया दांव, भड़के लोग

viral

VIDEO: हिमाचल में दिल्ली के लड़कों का ‘एडवेंचर’ बना ‘आफत’! नदी के उफान में घिरे 4 सैलानी, ऐसे हुआ मिरेकल रेस्क्यू

cities

उज्जैन में सावन सोमवार पर भीड़ बेकाबू, नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगदड़ जैसे हालात; करंट की अफवाह से अफरातफरी, कई घायल

education

फर्जीवाड़े पर JCECEB का बड़ा प्रहार: मेडिकल दाखिले के लिए अब दो स्तरों पर होगी कागजातों की कड़ी जांच

Nitin Arora

नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।और पढ़ें

End of Article

प्रमोटेड कंटेंट

बॉलीवुड की सबसे हैरान करने वाली लव स्टोरीज़

Herbeauty

इन 6 भारतीय महिलाओं की दुनिया हुई कायल

Herbeauty

बिना केमिकल के चमकती त्वचा पाने के 10 आसान घरेलू नुस्खे

Herbeauty

ये 6 भारतीय महिलाएं हैं ग्रेस, ग्लैमर और इंटेलिजेंस की मिसाल

Herbeauty

6 भारतीय महिलाएं जिन्होंने टैलेंट और ग्लैमर दोनों से जीता दिल

Herbeauty

फोटो में स्लिम और स्टाइलिश दिखना है? ये पोज़िंग ट्रिक्स आज़माएँ!

Herbeauty

बॉलीवुड छोड़ने पर प्रियंका का बड़ा खुलासा

Herbeauty

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधायक के रूप में ली शपथ, कहा- ये बड़ी जिम्मेदारी, इस सदन का सद…

timesnowhindi.com

40 की उम्र पार कर चुकीं 10 बॉलीवुड अभिनेत्रियाँ

Herbeauty

जिन्हें राहुल गांधी ने बताया था पसंदीदा BJP नेता, अब उन्होंने कहा- कांग्रेस नेता की बात अ…

timesnowhindi.com

पुरुषों को सुडौल महिलाएं क्यों लगती हैं आकर्षक?

Herbeauty

इन बॉलीवुड अभिनेत्रियों ने उम्र को भी दे दी है मात

Herbeauty

इन 9 पत्थर स्मारकों का रहस्य जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान!

Herbeauty

Deadly Cobra Brings A Golf Game To A Shocking Halt

Brainberries

दुनिया के 9 रहस्यमय पत्थर स्मारक, जिनका राज आज तक कोई नहीं सुलझा पाया!

Herbeauty

6 ज़ूक परफॉर्मेंस जिन्हें आप रिपीट पर देखेंगे

Herbeauty

प्लस-साइज़ हैं? कैमरे के सामने कमाल दिखाने के आसान तरीके

Herbeauty

The Fascinating Journey Of The Girl Who Wanted To Become A Horse

Brainberries

बार-बार देखने पर मजबूर कर देंगे ये डांस वीडियो

Herbeauty

9 रहस्यमय पत्थर स्मारक, जिनके पीछे छिपे हैं सदियों पुराने अनजाने राज!

Herbeauty

Subscribe to our daily Newsletter!Submit

संबंधित खबरें

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधायक के रूप में ली शपथ, कहा- ये बड़ी जिम्मेदारी, इस सदन का सदस्य बनना गर्व की बात

राहुल गांधी को बड़ी राहत, आय से अधिक संपत्ति मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुनवाई पर SC ने लगाई रोकनितिन नवीन आज करेंगे अपनी नई टीम का ऐलान; अनुराग ठाकुर और स्मृति ईरानी की वापसी की चर्चा, क्या है मकसद?दिल्ली में बैठकर इस तरह के मुद्दे उठाने का आधार क्या है- सिक्किम SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का दखल देने से इनकारJharkhand Student Protest: खुद जाकर छात्रों के प्रतिनिधि से मिलिए- राहुल गांधी ने हेमंत सोरेन को लिखा पत्र

  • Follow us :

Download App

Top Searches

Featured

Top Trends

Top Picks

Company

© 2026 Bennett, Coleman & Company Limited

Icon

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here