Success Story of Melanie Perkins : स्टार्टअप शुरू करना और उसे कामयाबी के शिखर तक ले जाना कितना मुश्किल है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि दुनिया के 50 फीसदी स्टार्टअप शुरुआती 5 साल में ही दम तोड़ देते हैं। वहीं, 15 साल तक सिर्फ 25 फीसदी ही टिक पाते हैं।
हार्वर्ड बिजनेस स्कूल (Harvard Business School) के प्रोफेसर विलियम सालमैन कहते हैं “बाजार में हर अमेजन या उबर के पीछे ऐसी दर्जनों कंपनियां होती हैं, जिन्हें कोई याद नहीं रख पाता।” लेकिन इस बेहद मुश्किल और रिस्की सफर में कुछ ऐसी कहानियां भी होती हैं, जो इतिहास रच देती हैं। ऐसी ही एक कहानी कैन्वा (Canva) की फाउंडर मेलानी पर्किन्स (Melanie Perkins) की है।
मेलानी पर्किन्स को एक समय 100 से ज्यादा इनवेस्टर्स ने रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन आज उनकी कंपनी दुनिया की सबसे मूल्यवान फीमेल-लेड (महिला नेतृत्व वाली) कंपनियों में से एक बन चुकी है और हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू भी इसकी मिसाल दे रहा है। दुनिया के 190 देशों में करीब 25 करोड़ लोग इसका इस्तेमाल करते हैं और कंपनी का वैल्यूएशन करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है।Success Story of Melanie Perkins : स्टार्टअप शुरू करना और उसे कामयाबी के शिखर तक ले जाना कितना मुश्किल है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि दुनिया के 50 फीसदी स्टार्टअप शुरुआती 5 साल में ही दम तोड़ देते हैं। वहीं, 15 साल तक सिर्फ 25 फीसदी ही टिक पाते हैं।
हार्वर्ड बिजनेस स्कूल (Harvard Business School) के प्रोफेसर विलियम सालमैन कहते हैं “बाजार में हर अमेजन या उबर के पीछे ऐसी दर्जनों कंपनियां होती हैं, जिन्हें कोई याद नहीं रख पाता।” लेकिन इस बेहद मुश्किल और रिस्की सफर में कुछ ऐसी कहानियां भी होती हैं, जो इतिहास रच देती हैं। ऐसी ही एक कहानी कैन्वा (Canva) की फाउंडर मेलानी पर्किन्स (Melanie Perkins) की है।
मेलानी पर्किन्स को एक समय 100 से ज्यादा इनवेस्टर्स ने रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन आज उनकी कंपनी दुनिया की सबसे मूल्यवान फीमेल-लेड (महिला नेतृत्व वाली) कंपनियों में से एक बन चुकी है और हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू भी इसकी मिसाल दे रहा है। दुनिया के 190 देशों में करीब 25 करोड़ लोग इसका इस्तेमाल करते हैं और कंपनी का वैल्यूएशन करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है।










































