अयोध्या के राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आई है। मामले में गिरफ्तार सभी आठों आरोपियों को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मामले में अब सोमवार को पेशी होगी। जहां फिर इन सबको पेश किया जाएगा।
इससे पहले,अयोध्या की सीजेएम कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर केसी वर्मा ने अदालती कार्रवाई के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एफआईआर में नामजद सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया था। जहां से उन्हें सोमवार तक के लिए रिमांड पर भेजा गया है। अब उन्हें सोमवार को फिर से कोर्ट में पेश किया जाएगा। अब उन्हें ज्यूडिशियल कस्टडी में रखा गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) से जुड़ी स्पेशल कोर्ट आज नहीं बैठी थी। चूंकि आज मुहर्रम की छुट्टी के कारण कामकाज का दिन नहीं था, इसलिए आरोपियों को सोमवार तक की रिमांड दी गई है। साथ ही केसी वर्मा ने यह भी बताया कि गिरफ्तार लोगों में सुभाष को छोड़कर कुल मिलाकर 79,85,493 रुपये बरामद किए गए हैं। सुभाष से कुछ भी बरामद नहीं हुआ,हालांकि वह साजिश में शामिल था। बाकियों से अलग-अलग रकम बरामद की गई।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम क्यों लगा?
इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि आरोपियों के खिलाफ ‘प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट’लगाया गया है। इस बारे में अभियोजन अधिकारी के.सी.वर्मा ने इसका कारण स्पष्ट करते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में ‘लोक सेवक'(Public Servants) भी शामिल हैं। इन आरोपियों में लगभग 5 से 6 लोग भारतीय स्टेट बैंक (SBI)के कर्मचारी हैं। चूंकि ये बैंक कर्मी सरकार द्वारा वेतन प्राप्त करते हैं और लोक सेवक की श्रेणी में आते हैं, इसलिए इन पर यह अधिनियम लगाया गया है।
इससे एक दिन पहले गुरुवार को इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद हुई। वहीं, आरोपों से घिरे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया। बता दें कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है। एफआईआर में चंपत राय का करीबी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू और अन्य सात लोग नामजद हैं।










































