Ram Mandir Donation Theft Case: राम मंदिर के चढ़ावे एवं दान के कथित हेरफेर एवं गबन मामले में सभी आठ आरोपियों को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी की यह कार्रवाई एक दिन पहले गुरुवार को इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद हुई। आरोपों से घिरे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया। आठ आरोपियों की गिरफ्तारी पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई शुरू हो गई है और उनकी सरकार कथित दान घोटाला मामले का दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी। बता दें कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है। एफआईआर में चंपत राय का करीबी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू और अन्य सात लोग नामजद हैं।
एसआईटी (SIT) ने 23 जून को सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी। एसआईटी सदस्य विजय विश्वास पंत ने कहा, ”हमने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को रिपोर्ट सौंप दी है। यह एक शुरुआती रिपोर्ट है और हमने इसे उन्हें सौंप दिया है। विवरण गोपनीय हैं, इसलिए हम इस समय कुछ भी उजागर नहीं कर सकते। हमने अपने निष्कर्ष उन्हें उपलब्ध करा दिए हैं।” अधिकारियों ने आगे का विवरण साझा नहीं किया है और कहा है कि रिपोर्ट की सामग्री की समीक्षा की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि दो दिन बाद, राम मंदिर में प्राप्त दान के कथित गबन के मामले में दर्ज प्राथमिकी में नामजद आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
एक अधिकारी ने बताया कि प्राथमिकी में नामजद आरोपी अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू मंदिर में दान के रूप में प्राप्त नकदी और कीमती सामानों की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, ”सभी आरोपी अयोध्या में ही थे और उन्हें गुरुवार देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। आगे की पूछताछ चल रही है। पुलिस उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की तैयारी कर रही है।” यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 306 (मालिक के कब्जे वाली संपत्ति की चोरी), 316 (अपराधिक विश्वासघात), 317 (बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करना) और 61 (आपराधिक साजिश) के अलावा अन्य प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है। विपक्ष के नेताओं ने इस प्राथमिकी को ‘दिखावा’ करार दिया है, और आरोप लगाया है कि इसमें ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों, जिनमें महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा शामिल हैं, की जवाबदेही तय नहीं की गई है।
राम मंदिर दान चोरी मामले में गिरफ्तार हुए 8 लोग कौन हैं:
राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू:
टिन्नू ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पूर्व ड्राइवर बताया जाता है। वह वीएचपी के कारसेवकपुरम से जुड़े था और दान राशि गिनने का काम करता था। इस विवाद में टिन्नू सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला चेहरा है। कहा जाता है कि दान पेटियों की चाबियां टिन्नू के पास ही रहती थीं और ट्रस्ट के सदस्यों के करीबी होने के कारण वह पूरी तरह मनमानी करता था। हालांकि, टिन्नू ने कैश काउंटिंग में किसी भी भूमिका से इनकार किया है और आरोपों के लिए अज्ञात लोगों को जिम्मेदार ठहराया है।
रमाशंकर मिश्रा उर्फ रवि मिश्रा
यह भी दान राशि गिनने के काम में लगा था। इन पर कर्मचारियों के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप है, जिन्होंने अपने बेटे और दामाद को भी पैसे गिनने के काम में लगा दिया था।
अनुकल्प मिश्रा
इस मामले के आरोपी रमाशंकर मिश्रा का बेटे, जो दान गिनने के काम में शामिल था। अनुकल्प मिश्रा ट्रस्टी अनिल मिश्रा का रिश्तेदार भी है।
लवकूश मिश्रा
यह आरोपी रमाशंकर मिश्रा का दामाद है। आरोप है कि गबन किए गए पैसे को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी लवकुश की थी। जांच की शुरुआत में उसके घर से पैसे बरामद होने के आरोप भी लगे।
अविनाश शुक्ला
अविनाश को मंदिर का परिचारक (अटेंडेंट) बताया जा रहा है, जिस पर पैसों की हेराफेरी में शामिल होने का आरोप है। दावा किया जा रहा है कि वह इस सिंडिकेट का एक महत्वपूर्ण सदस्य था। अविनाश के खाते से 5 लाख रुपये बरामद किए गए।
मनीष यादव
यह टिन्नू यादव का भतीजा है और दान की गिनती प्रक्रिया में शामिल था। चोरी के पैसे मनीष यादव के घर से भी बरामद हुए।
सुभाष श्रीवास्तव
बैंक का पूर्व कर्मचारी, जो कैश काउंटिंग स्टाफ का इंचार्ज था।
करुणेश पांडे
पांडे पर पैसों की रसीदों में हेराफेरी करने का आरोप है।
विवाद ने कैसे पकड़ा तूल
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी (SIT) का गठन किया था। यह कदम राम मंदिर में प्राप्त दान में कथित हेराफेरी के आरोप सामने आने के बाद उठाया गया था। इस विवाद ने राजनीतिक तूल तब पकड़ा जब 7 जून को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन रिपोर्टों का हवाला दिया, जिनमें दावा किया गया था कि मंदिर में चढ़ाए गए दान के करोड़ों रुपये गायब हैं। उन्होंने इस मामले में अदालतों से संज्ञान लेने का आग्रह किया था। उस समय इन आरोपों का जवाब देते हुए, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले इस विवाद से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।
छोटी मछलियों को सजा मिलेगी: अखिलेश यादव
प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के बाद, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट में जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के तहत, ‘छोटी मछलियों को सजा दी जाएगी जबकि बड़ी मछलियों को छोड़ दिया जाएगा।’अखिलेश यादव ने आगे दावा किया कि लोग कह रहे हैं कि प्राथमिकी दर्ज होने से पहले सबूतों को मिटाने और यह तय करने के लिए एसआईटी प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया हो सकता है कि ‘किस बड़ी मछली को बचाना है और किसे फंसाना है।’ उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है कि एसआईटी की रिपोर्ट पहले से ही तैयार थी और जांच को पूर्व-निर्धारित निष्कर्षों से मिलाने के लिए किया गया था।










































