पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। नगर मुख्यालय के तहसील कार्यालय के समीप दक्षिण सामान्य वन मंडल लालबर्रा के डिपो में लंबे समय से बांस की भारी किल्लत बनी हुई है। साथ ही जलाऊ लकड़ी भी नही है। डिपो में बांस व जलाऊ लकड़ी के चठ्ठे उपलब्ध न होने के कारण स्थानीयजनों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले आम नागरिकों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि लोग रोजमर्रा की जरूरी आवश्यकताओं से लेकर अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्यों के लिए भी बांस के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। इस तरह से अगर किसी व्यक्ति की आकस्मिक मृत्यु हो जाये तो उसे मोक्षधाम ले जाने के लिए बांस तक डिपों में उपलब्ध नही है। इतना ही नही शव के अंतिम संस्कार के लिए जरूरी जलाऊ लकड़ी का भी डिपो में अभाव है। लेकिन इस समस्या की ओर जिम्मेदारों का कोई ध्यान नही है जिससे क्षेत्रीयजनों में प्रशासन के प्रति आक्रोश व्याप्त है।
अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं मिल रहा बांस
आपकों बता दे कि क्षेत्रीयजनों को जलाऊ लकड़ी एवं बांस, बल्ली उपलब्ध करवाने के लिए शासन के द्वारा वन विभाग के माध्यम से डिपों में जलाऊ लकड़ी रखकर चठ्ठे एवं बांस नग के माध्यम से उन्हे निर्धारित दर से उपलब्ध करवाया जाता है। लेकिन दक्षिण सामान्य वन मंडल लालबर्रा के तहसील कार्यालय के समीप स्थित डिपो में विगत माह से जलाऊ लकड़ी, बांस उपलब्ध नही है, जिसके कारण लालबर्रा क्षेत्र के लोग जलाऊ लकड़ी एवं बांस के लिए परेशान हो रहे है। जबकि दहसंस्कार, तेरहवीं, बारसा, वैवाहिक कार्यक्रमों में जलाऊ लकड़ी की आवश्यकता पड़ती है। साथ ही गैस के दाम बढऩे एवं गैस की किल्लत के चलते लोग अब पुरानी पध्दति चुल्हे पर खाना बनाना अधिक पसंद करने लगे है। किन्तु डिपों से जलाऊ लकड़ी नही मिलने के कारण उन्हे अन्य स्थानों से महंगे दामों में खरीदना पड़ रहा है। इस तरह से डिपों में लंबे समय से जलाऊ लकड़ी एवं बांस की समस्या बनी हुई है लेकिन उपलब्ध नही होने के कारण क्षेत्रीयजन बेहद परेशान है। वर्तमान समय में मानसून सत्र शुरू हो चुका है और जिन लोगों के कच्चे मकान है उन्हे मकान का मरम्मत कार्य हेतु बांस व बल्ली नही मिलने के कारण वे बेहद परेशान है। इसी तरह अगर किसी की आकस्मिक मृत्यु हो जाती है उसे मोक्षधाम तक अंतिम संस्कार के लिए लेकर जाने के लिए भी बांस डिपो से नही मिल पा रहा है। डिपो में लंबे समय से जलाऊ लकड़ी एवं बांस की किल्लत बनी हुई है लेकिन जिम्मेदारों के द्वारा इस समस्या को दुर करने का कोई प्रयास नही किये जा रहे है जिससे लोगों में शासन-प्रशासन के प्रति आक्रोश व्याप्त है। वहीं स्थानीयजनों का कहना है कि डिपो में बांस की अनुपलब्धता का सबसे संवेदनशील असर अंतिम संस्कार जैसी आपातकालीन स्थितियों पर पड़ रहा है। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार शव यात्रा (अर्थी) तैयार करने के लिए बांस की अनिवार्य आवश्यकता होती है। जब लोग आपात स्थिति में लालबर्रा डिपो पहुंच रहे हैं, तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। ऐसे में शोकाकुल परिवारों को मजबूरी में निजी वेंडरों से ऊंचे दामों पर या फिर दूर-दराज के इलाकों से बांस का इंतजाम करना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी दोगुनी हो गई है। साथ ही जलाऊ लकड़ी भी नही मिलने से क्षेत्रीयजन परेशान है। इसलिए प्रशासन से मांग है कि डिपो में जल्द जलाऊ लकड़ी व बांस उपलब्ध करवाये।
मकान मरम्मत का कार्य भी ठप
बारिश का मौसम नजदीक आते ही ग्रामीण और गरीब तबके के लोग अपने कच्चे मकानों, झोपडिय़ों और छप्परों की मरम्मत के कार्य में जुट जाते हैं। मकान की छत और दीवारों को सहारा देने के लिए डिपो से कम दरों पर मिलने वाले बांस की भारी मांग रहती है। लेकिन लालबर्रा डिपो में बांस का स्टॉक खत्म होने से सैकड़ों परिवारों के मकानों का मरम्मत कार्य अधर में लटका हुआ है। वहीं डिपो में बांस न होना सीधे तौर पर आम जनता के साथ खिलवाड़ है। अंतिम संस्कार जैसी दु:खद घड़ी में भी लोगों को बांस व लकड़ी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। जबकि इस समस्या से कई बार जिम्मेदारों को अवगत करवा चुके है लेकिन कोई ध्यान नही दिया जा रहा है। इस तरह से प्रशासन की उदासीनता से बांस, जलाऊ लकड़ी के लिए लोग परेशान हो रहे है। वहीं डिपो से जो बांस व जलाऊ लकड़ी बेहद कम दरों पर आम जनता को मिल जाता था, उसी बांस व जलाऊ लकड़ी के लिए अब खुले बाजार में मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए इतनी महंगी दरों पर बांस व लकड़ी खरीदना नामुमकिन साबित हो रहा है। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने वन विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि लालबर्रा डिपो में जल्द बांस व जलाऊ लकड़ी के चठ्ठे की खेप उपलब्ध करवाये ताकि आम जनता को इस विकट समस्या से राहत मिल सके।
दूरभाष पर दक्षिण सामान्य वन मंडल लालबर्रा रेंजर श्रीमती सीता भलावी ने बताया कि डिमांड के अनुसार जलाऊ लकड़ी के चठ्ठे नही आ रहे है और जो आते है उसका वितरण किया जाता है लेकिन जल्द की खत्म हो जाते है एवं बांस की भी कमी है। जलाऊ लकड़ी के चठ्ठे एवं बांस उपलब्ध हेतु उच्चाधिकारियों को डिमांड भेजा गया है और किसी को अत्यंत बांस व जलाऊ लकड़ी की आवश्यकता है उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करवाने का भी पुरा प्रयास करेगें ताकि उन्हे परेशान न होना पड़े।
बाईट – रवि अग्रवाल समाजसेवी – लालबर्रा।









































