जिसे बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, उसी कबाड़ से बाघ की शानदार प्रतिमा तैयार कर दी गई। पेंच टाइगर रिजर्व में मोगली बाल उत्सव के दौरान इस कलाकृति ने प्रदेशभर से आए विद्यार्थियों का ध्यान खींचा और उन्हें रीसाइक्लिंग का महत्व समझाया।
हाइलाइट्स
- मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों से
सिवनी: कल्पना और रचनात्मकता का इस्तेमाल हो तो बेकार पड़ी चीजें भी खूबसूरत कलाकृति का रूप ले सकती हैं। पेंच टाइगर रिजर्व में आयोजित राज्य स्तरीय मोगली बाल उत्सव में कबाड़ सामग्री से बनाई गई बाघ की प्रतिमा इसी सोच का उदाहरण बनी। मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों से पहुंचे विद्यार्थियों ने इस कलाकृति को करीब से देखा और इसे तैयार करने के प्रयासों की सराहना की।
बाघ की प्रतिमा को देखकर बच्चे इस बात से हैरान रह गए कि अनुपयोगी समझी जाने वाली वस्तुओं से इतनी आकर्षक आकृति बनाई जा सकती है। उन्हें प्रतिमा के निर्माण की अवधारणा और इसमें इस्तेमाल की गई सामग्री के बारे में भी जानकारी दी गई।
कबाड़ से कलाकृति तक, बच्चों ने समझा रीसाइक्लिंग का महत्व
इस गतिविधि के जरिए विद्यार्थियों को केवल एक कलाकृति देखने का अवसर नहीं मिला, बल्कि उन्होंने संसाधनों के दोबारा इस्तेमाल की उपयोगिता भी समझी। बच्चों ने जाना कि पुरानी और बेकार हो चुकी वस्तुओं को फेंकने के बजाय रचनात्मक तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है
मोगली उत्सव में पर्यावरण संरक्षण का संदेश
मोगली बाल उत्सव में प्रदर्शित यह प्रतिमा बच्चों के लिए सीखने का एक अलग अनुभव बनी। इस पहल ने रीसाइक्लिंग और जीरो वेस्ट की अवधारणा को सरल तरीके से सामने रखा। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदारी से उपयोग और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश भी दिया।







































