इजरायल में किसकी बनेगी सरकार? नेतन्याहू और विपक्षी नेता आइजेनकोट के बीच सत्ता की जंग तेज

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इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने बुधवार को संसदीय चुनाव के नतीजों को कानूनी मान्यता देते हुए नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू की। चुनाव आयोग को धांधली के सबूत नहीं मिले।

इजरायल में संसदीय चुनाव के नतीजों के बाद अब नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के बीच सत्ता हासिल करने की कोशिशें जारी हैं। चुनाव में न तो नेतन्याहू के गठबंधन को और न ही आइजेनकोट के सहयोगी दलों को स्पष्ट बहुमत मिला। ऐसे में सरकार बनाने के लिए दोनों खेमों को दूसरे राजनीतिक दलों का समर्थन जुटाना होगा। इस बीच राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने चुनाव के प्रमाणित नतीजों को कानूनी मान्यता देते हुए सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राष्ट्रपति के इस कदम को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की उन कोशिशों के लिए झटका माना जा रहा है, जिनके जरिए वह चुनाव नतीजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे थे।

राष्ट्रपति हर्जोग ने बुधवार को विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत शुरू की। इन बैठकों के आधार पर वह तय करेंगे कि किस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाए। इस प्रक्रिया में नेतन्याहू और आइजेनकोट दोनों प्रमुख दावेदार हैं। हर्जोग ने चुनाव परिणामों को स्वीकार करने की अपील करते हुए कहा, “चुनाव खत्म हो चुके हैं। अब वास्तविकता का सामना करने का समय है।”

बहुमत जुटाने की चुनौती

27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी भी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जरूरी संसदीय बहुमत नहीं प्राप्त हुआ। नेतन्याहू और उनके सहयोगी दलों को नुकसान उठाना पड़ा, जबकि विपक्षी नेता आइजेनकोट के खेमे को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। ऐसे में छोटे दलों का समर्थन नई सरकार के गठन में अहम भूमिका निभा सकता है।अब तक राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान तीन राजनीतिक गुटों ने नेतन्याहू को सरकार बनाने का मौका देने की सिफारिश की है। वहीं, नेतन्याहू के पूर्व सहयोगी और अब उनके प्रतिद्वंद्वी बन चुके एक नेता के नेतृत्व वाले गुट ने आइजेनकोट का समर्थन किया है। गुरुवार को आठ अन्य दलों के प्रतिनिधि राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। इनमें अरब नेतृत्व वाले दो राजनीतिक गुट भी शामिल हैं। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और आइजेनकोट की याशर पार्टी की मुलाकातें सबसे आखिर में होनी निर्धारित हैं।

चुनाव में धांधली के आरोपों को नहीं मिला समर्थन

चुनाव के बाद नेतन्याहू और उनके समर्थकों ने अरब नेतृत्व वाले दलों पर चुनाव में धांधली करने और विदेशी मदद से नतीजे प्रभावित करने के आरोप लगाए थे। हालांकि, इजरायल के चुनाव आयोग ने इन आरोपों की जांच के बाद कहा कि उसे ऐसी कोई अनियमितता नहीं मिली, जिससे चुनाव की निष्पक्षता या नतीजों पर असर पड़ा हो।

आयोग के प्रमुख और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नोआम सोहल्बर्ग ने भी कहा कि विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े आरोप फिलहाल संदेह हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि चुनावी नतीजों पर सवाल उठाने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है। इसके बावजूद विदेशी हस्तक्षेप को लेकर खुफिया एजेंसी शिन बेट की अलग जांच जारी है।

सरकार नहीं बनी तो फिर होंगे चुनाव

सभी राजनीतिक दलों से बातचीत पूरी होने के बाद राष्ट्रपति हर्जोग उस नेता को सरकार बनाने का मौका देंगे, जिसके पास गठबंधन तैयार करने की सबसे अधिक संभावना होगी। उनके फैसले के बाद सरकार गठन के लिए कई सप्ताह तक बातचीत चल सकती है। अगर नेतन्याहू और आइजेनकोट में से कोई भी बहुमत जुटाने में सफल नहीं होता है, तो अगले साल की शुरुआत में फिर से संसदीय चुनाव कराए जा सकते हैं।

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