जिला अस्पताल की तीसरी आंख बीमार,मेंटेनेंस की रहा देख रहे सीसीटीवी कैमरे

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जिले के सबसे बड़े 500 बेड वाले जिला अस्पताल में रोजाना हजारों लोगों का आना-जाना लगा रहता है। बावजूद इसके भी यहां की सुरक्षा व्यवस्था में लगाए गए ज्यादातर सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े हैं। शायद यही वजह है कि शातिर चोर कर इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं। जिसके चलते यहाँ आए दिनों चोरी की वारदात हो रही है। शुक्रवार को जब पदमेश न्यूज़ की टीम ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया तो जिला अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में लगे ज्यादातर सीसीटीवी कैमरे बंद पाए गए। तो वही मेंटेनेंस के अभाव में कई सीसीटीवी कैमरे जमीन की ओर झुके हुए जमीन की खाक छानते दिखाई दिए। कुल मिलाकर कहा जाए तो अस्पताल की सुरक्षा के लिए लाखो रु खर्च कर लगाई गई तीसरी आंख, मैट्ट्रेस के अभाव के चलते बंद पड़ी हुई है। तो वही सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगाए कैमरा का ठीक से मेंटेनेंस नहीं हो पा रहा है वही जो कैमरे शुरू है उनका भी मेंटेनेंस नहीं किया जा रहा है।

पूर्व की घटनाओं से नहीं लिया गया सबक
बताया जा रहा है कि सीसीटीवी कैमरे आए दिन बंद होने से शातिर चोर इसका जमकर फायदा उठाते हैं। जहां कैमरे बंद होने के चलते आए दोनों साइकिल चोरी हो जाना, मरीज और उनके परिजनों के मोबाइल ,पैसे व अन्य सामग्रियों की चोरी होना अब आम बात हो गई है। ज्ञात हो की इसके पूर्व यहां अपने बेटे का उपचार कराने आए पान ठेला संचालक जमील क़ुरैशी के 1 लाख रु चोरी हो गए थे। जिसके चोर आज तक पुलिस की गिरफ्तार से बाहर है। वहीं सीसीटीवी कैमरे बंद होने के चलते आज तक चोर का पता भी नहीं लग सका है। यदि जिला अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे इसी तरह बंद रहे या फिर समय-समय पर उनका ठीक से मेंटनेंस नहीं किया गया तो ऐसी घटनाओं में इजाफा हो सकता है। अस्पताल प्रबंधन और संबंधित एजेंसी को चाहिए की सीसीटीवी कैमरे का नियमित मेंटेनेंस करें वही तकनीकी समस्याओं को दूर कर सीसीटीवी कैमरे की उचित मॉनिटरिंग की व्यवस्था बनाई। ताकि आए दोनों होने वाली इन घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके ।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए वर्ष 2016 में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। जिसके बाद आवश्यकता के अनुसार सीसीटीवी कैमरो की संख्या बढ़ाई थी। जिसमें अनुमानित 85 लाख रुपए का खर्च आया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार 500 बेड वाले जिला अस्पताल ,ट्रामा सेंटर को मिलाकर करीब 62 कैमरो की मदद से जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है।लेकिन लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद भी इसका प्रबंधन ठीक से नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

मेंटेनेंस के अभाव में प्रबंधन ने रोका पेमेंट
बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरो का मेंटेनेंस ठेकेदार एजेंसी द्वारा सही तरीके से नहीं किया जा रहा है।जिसके चलते अस्पताल प्रबंधन ने चार से पांच महा का पेमेंट रोक दिया है। वही ठेकेदार एजेंसी द्वारा 1800 रुपए प्रति माह मेंटेनेंस चार्ज मिलने के चलते बिल नहीं लगाए जाने की बात कही जा रही है।

वायरिंग की ढीली व्यवस्था
बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे की मॉनिटरिंग के लिए अलग-अलग कक्ष में व्यवस्था की गई है। जहां वायरिंग की ढीली व्यवस्था होने के चलते आए दिन सीसीटीवी कैमरे बंद हो जाते हैं। जानकारी के अनुसार कैजुअल्टी के बाजू में चिकित्सक कक्ष में सीसीटीवी कैमरे की मॉनिटरिंग व्यवस्था है लेकिन वहां मॉनिटर और सर्वर में की गई वायरिंग आए दोनों हल जाती है या जरा सा धक्का लगने पर सिस्टम काम करना बंद कर देता है। जिसके चलते इसका मेंटेनेंस करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ।

मरीजों, परिजनों, चिकित्सकों और उनके सामान की सुरक्षा भगवान भरोसे
जिला अस्पताल में 500 बिस्तर की सुविधा है। यहां हर रोज बड़ी संख्या में मरीज व उनके स्वजन रात में ठहरते हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है। यहां लगाए अधिकांश सीसीटीवी कैमरा बंद पड़े हैं, ऐसे में कोई हादसा होने पर जांच करना पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में 24 घंटे कई नए चेहरे प्रवेश करते हैं, ऐसे में यहां कई घटना होने की आशंका रहता है। समय-समय पर चोरी की घटनाएं सामने आती है, लेकिन आरोपी नहीं पकड़े जाते।साथ ही आए दिन मरीज और डॉक्टरों में विवाद के मामले भी सामने आते रहते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर अस्पताल परिसर में आने वाले मरीज और चिकित्सको के साथ कोई अनहोनी हो जाती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

हमने एजेंसी का पेमेंट रोक दिया है- धबडग़ांव
इस पूरे मामले को लेकर की गई चर्चा के दौरान सिविल सर्जन डॉ संजय धबडग़ांव ने बताया कि आवश्यकता के अनुसार जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर में सभी जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। उनके मेंटेनेंस के लिए एक प्राइवेट एजेंसी को प्रतिमाह मेंटेनेंस चार्ज भी दिया जाता है ।लेकिन हमने अभी एजेंसी का भुगतान रोक दिया है ।क्योंकि एक दो घटनाएं अस्पताल में हुई है जिसमें सीसीटीवी कैमरे बंद मिले थे। हमने कहा है कि जब तक सीसीटीवी कैमरे शुरू नहीं हो जाते तब तक उनका भुगतान रुका रहेगा।वे पहले अपनी व्यवस्थाएं दुरुस्त करें हमें इसकी रिपोर्टिंग दिखाएं, उसके बाद ही भुगतान दिया जाएगा। करीब चार से पांच माह का भुगतान रोका गया है, नोटिस भी जारी किए गए हैं। उनको बुलाकर ठीक तरीके से मेंटेनेंस करने को कहा गया है ।हमारी कोशिश है कि जितनी जल्दी हो सके कैमरे शुरू कर दिए जाएं।

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