मॉस्को: रूस की विदेश नीति में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। रूस अब भारत और ब्रिक्स (BRICS) देशों के बजाय आसियान (ASEAN) क्षेत्र के साथ अपने ‘ग्रेटर यूरेशियन पार्टनरशिप’ को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। इस महीने जब फ्रांस में G7 देश रूस को घेरने के प्लान पर काम कर रहे थे उस दौरान व्लादिमीर पुतिन आसियान देशों के साथ पश्चीमी देशों को काउंटर करने के दूसरे प्लान पर काम कर रहे थे।
ये पुतिन का ‘ग्रेटर यूरेशियन पार्टनरशिप’ जिसे कजान शहर में खींचा जा रहा था। ‘ग्रेटर यूरेशियन पार्टनरशिप’ का मकसद ASEAN, SCO और EAEU को एक ऐसे महाद्वीपीय नेटवर्क से जोड़ना है जो पश्चिमी प्रभाव का सामना कर सके।इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक प्रतियोगिता का अगला दौर विरोधी विचारधारा वाले गुटों के बजाय क्षेत्रीय ढांचों के बीच हो सकता है। भारत के पूर्व राजदूत रघु गुरूराज ने लिखा है कि दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य एशिया और रूस को जोड़ने वाली ‘ग्रेटर यूरेशियन पार्टनरशिप’ के बनने से BRICS सिर्फ एक राजनीतिक प्रतीक बनकर रह जाएगा जबकि यूरेशिया वह जगह बन जाएगा जहां असल में ताकत, व्यापार और कनेक्टिविटी को मैनेज किया जाएगा।
अमेरिकी G7 के खिलाफ पुतिन का ASEAN दांव
राजदूत रघु गुरूराज ने लिखा है कि कजान में रूस-ASEAN समिट और फ्रांस में G7 समिट का एक ही समय पर होना कोई इत्तेफाक नहीं था। ये असल में समानांतर राजनयिक मंच थे जिनमें से हर एक उभरती हुई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के बारे में अपना नज़रिया पेश कर रहा था।








































