Gandhi Sagar Sanctuary: बोत्सवाना से आई चीता राधा का गांधी सागर में गजब कॉन्फिडेंस, चार दिनों के अंदर ही किया अपना पहला शिकार

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Cheetah Radha: गांधी सागर अभ्यारण में 20 सितंबर को चीता राधा छोड़ी गई थी। चार दिनों के अंदर ही उसने अपना पहला शिकार किया है। साथ ही शुरुआती हिचकिचाहट के बाद वह अब स्वस्थ दिख रही है।नीमच: कूनो नेशनल पार्क के बाद मध्य प्रदेश में चीतों का दूसरा घर गांधी सागर अभ्यारण है। 20 सितंबर को बोत्सवाना से लाई गई चीता राधा को गांधी सागर अभ्यारण में छोड़ी गई थी। उसने अपनी नई जिंदगी की शुरुआत बहुत ही आत्मविश्वास के साथ की है। गांधी सागर में छोड़े जाने के कुछ दिनों के भीतर ही उसने अपना पहला शिकार किया है।गांधी सागर अभ्यारण में पहला शिकार

वन अधिकारियों ने बताया कि लगभग ढाई साल की चीता राधा ने मंगलवार को मंदसौर जिले की सैंक्चुअरी में मॉनसून के बाद उगी लंबी घास के बीच सफलतापूर्वक शिकार किया है। शिकार किस जानवर का था, यह तो पता नहीं चल पाया है लेकिन बाद में राधा का पेट भरा हुआ देखकर साफ पता चल रहा था कि उसने भरपेट खाना खाया है।

बार-बार रुक रही थी राधा

दरअसल, 64 किमी के बाड़े में उसे छोड़े जाने की शुरुआत थोड़ी हिचकिचाहट के साथ हुई थी। डीएफओ संजय रायखेरे ने बताया कि जब राधा पहले दिन अपने पिंजरे से बाहर निकली तो वह थोड़ी दूर चलकर बार-बार रुकती रही, मानो वह अनजान इलाके का जायजा ले रही थी। उसने फर्स्ट डे और नाइट जंगल को समझने में बिताया। वन विभाग के लोग लगातार उसकी हरकतों पर नजर रख रहे थे।वहीं, छोड़े जाने के चार दिन बाद ही, चीता राधा शिकार का पीछा करते हुए घास के मैदान में तेजी से दौड़ रही थी। वन विभाग के कर्मचारियों ने इस व्यवहार को एक स्वस्थ और सक्रिय चीता के लिए पूरी तरह से सामान्य बताया है।

वह नए जंगल में पूरे आत्मविश्वास के साथ घुल-मिल गई है। सैंक्चुअरी में अभी वन्यजीवों के लिए हालात बहुत अच्छे हैं, जिससे उसे यहां ढलने में मदद मिली है।

संजय रायखेरे, डीएफओ

अच्छे हैं संकेत

वहीं, राधा का आसानी से घुल-मिल जाना गांधी सागर में चल रही एक बड़ी कहानी का हिस्सा है, जहां वन अधिकारी भारत के चीता पुनर्वास प्रोजेक्ट को एक नए मील के पत्थर, यानी नए शावकों के जन्म की उम्मीद कर रहे हैं। गांधी सागर अभ्यारण के 64 किमी के बाड़े में पहले से ही दो नर चीता प्रभास और पावस और मादा चीता धीरा मौजूद हैं।

इसके साथ ही वन विभाग के कर्मचारियों ने धीरा और पावस को लगभग दो हफ्तों तक पिछले महीने से लेकर इस महीने के दूसरे हफ्ते तक एक साथ देखा है। उन्हें उम्मीद है कि इस जोड़ी के बनने से गांधी सागर चीता प्रोग्राम को जल्द ही नई गति मिल सकती है।

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