International Women’s Day: 8 मार्च यानी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस। यह दिन उन आधी आबादी के संघर्ष, स्वाभिमान और सफलता को सलाम करने का दिन है जिन्होंने समाज की बंदिशों को तोड़कर अपनी पहचान बनाई। भारत का इतिहास ऐसी कई महान महिलाओं का साक्षी रहा है, जिन्होंने उस दौर में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया जब कई क्षेत्रों में महिलाओं का प्रवेश भी वर्जित माना जाता था। आज महिला दिवस के खास मौके पर आइए जानते हैं उन ‘प्रथम’ भारतीय महिलाओं के बारे में, जिन्होंने इतिहास के पन्नों पर अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज किया और आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता बनाया।
सियासत के शिखर तक: जब महिलाओं ने संभाली देश की कमान
इंदिरा गांधी (पहली महिला प्रधानमंत्री): ‘आयरन लेडी’ के नाम से मशहूर इंदिरा गांधी ने 1966 में देश की सत्ता संभाली। वे न केवल भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं, बल्कि 1971 में भारत रत्न पाने वाली भी पहली भारतीय महिला रहीं। उनके साहसिक फैसलों ने वैश्विक राजनीति में भारत का कद बढ़ाया।
प्रतिभा पाटिल (पहली महिला राष्ट्रपति): साल 2007 में प्रतिभा पाटिल ने भारत की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेकर भारतीय लोकतंत्र में एक नया इतिहास रचा।
सरोजिनी नायडू (पहली महिला राज्यपाल): ‘भारत की बुलबुल’ कही जाने वाली सरोजिनी नायडू स्वतंत्र भारत की पहली महिला राज्यपाल बनीं। वे एक महान कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी भी थीं।
खाकी, प्रशासन और न्याय: जब सिस्टम में आईं महिलाएं
किरण बेदी (पहली महिला IPS): 1972 में किरण बेदी भारतीय पुलिस सेवा में शामिल होने वाली पहली महिला बनीं। उनके कड़े अनुशासन और सुधारों ने खाकी के प्रति महिलाओं का नजरिया बदल दिया।
अन्ना राजम मल्होत्रा (पहली महिला IAS): 1951 बैच की अन्ना राजम मल्होत्रा ने प्रशासनिक सेवा में पहली महिला अधिकारी बनकर पुरुषों के एकाधिकार को चुनौती दी।
फातिमा बीवी (सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज): 1989 में फातिमा बीवी देश के सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश बनीं, जो न्यायपालिका के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति थी।
विज्ञान और अंतरिक्ष: धरती से आसमान तक का सफर
डॉ. आनंदी गोपाल जोशी (पहली महिला डॉक्टर): 1886 में मात्र 19 साल की उम्र में अमेरिका से मेडिकल की डिग्री लेकर वे भारत की पहली महिला डॉक्टर बनीं। उन्होंने अपने बेटे को खोने के बाद यह संकल्प लिया था कि वे अन्य मांओं को इलाज की कमी से रोने नहीं देंगी।
कल्पना चावला (अंतरिक्ष में पहली भारतीय महिला): कल्पना चावला ने नासा के जरिए अंतरिक्ष की यात्रा कर करोड़ों लड़कियों को यह सपना दिखाया कि सितारों तक पहुंचना असंभव नहीं है।
अवनी चतुर्वेदी (पहली महिला फाइटर पायलट): साल 2018 में अवनी ने अकेले मिग-21 बाइसन उड़ाकर नया इतिहास रचा। वे देश की उन पहली तीन महिला फाइटर पायलट्स में शामिल थीं जिन्होंने भारतीय वायु सेना के ‘कॉम्बैट रोल’ के द्वार खोले।
खेल का मैदान: पसीने और मेडल की चमक
कर्णम मल्लेश्वरी (ओलंपिक मेडल जीतने वाली पहली महिला): साल 2000 के सिडनी ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने भारत की सूखी झोली में ओलंपिक मेडल डाला।
शांता रंगास्वामी (पहली महिला क्रिकेट कप्तान): 1976 में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की पहली महिला क्रिकेट टीम का नेतृत्व शांता रंगास्वामी ने ही किया था।
मैरी कॉम (बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियन): मुक्केबाजी की दुनिया में ‘सुपरमॉम’ मैरी कॉम ने कई बार विश्व चैंपियन बनकर साबित किया कि मां बनने के बाद भी सपने पूरे किए जा सकते हैं।
साहस और सेवा की मिसाल
मदर टेरेसा (नोबेल जीतने वाली पहली महिला): 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाली मदर टेरेसा ने अपना पूरा जीवन मानवता और गरीबों की सेवा में समर्पित कर दिया।
बछेंद्री पाल और अरुणिमा सिन्हा: बछेंद्री पाल ने 1984 में एवरेस्ट फतेह किया, वहीं अरुणिमा सिन्हा ने एक पैर खोने के बावजूद दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा लहराकर यह साबित किया कि दिव्यांगता शरीर में होती है, इरादों में नहीं।
रीता फारिया (पहली मिस वर्ल्ड): 1966 में वे न केवल मिस वर्ल्ड बनने वाली पहली भारतीय महिला थीं, बल्कि पहली डॉक्टर भी थीं जिन्होंने इस ताज को हासिल किया।










































