केंद्र और राज्य सरकारें इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स और दूसरे सार्वजनिक कामों के लिए जमीन अधिग्रहण का काम करती रहती हैं। इस तरह के अधिग्रहण से अक्सर ये सवाल उठते हैं कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा कैसे दिया जाता है, विस्थापित लोगों को कहां बसाया जाता है, और उनकी आजीविका की सुरक्षा के लिए क्या उपाय किए जाते हैं। अगर आप भी इन सवालों के जवाब ढूंढ रहे हैं तो चलिए आपको पूरी जानकारी देते हैं।
कानून के तहत जमीन का अधिग्रहण
यह प्रक्रिया ‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013’ के तहत संचालित होती है। इसका मकसद विकास की जरूरतों और उन जमीन मालिकों व समुदायों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना है, जिनकी संपत्ति, आजीविका और घर इससे प्रभावित हो सकते हैं। यह कानून अधिग्रहण की प्रक्रियाओं, मुआवजे, पुनर्वास और पुनर्स्थापन के बारे में विस्तार से नियम बताता है।
सरकार जमीन का अधिग्रहण सिर्फ किसी मान्यता प्राप्त सार्वजनिक मकसद के लिए ही कर सकती है, जैसे कि ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, शिक्षा, खेल, सार्वजनिक आवास, जल संचयन, सिंचाई, औद्योगिक कॉरिडोर, खदानें, और नेशनल मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी के तहत तय किए गए नेशनल इन्वेस्टमेंट और मैन्युफैक्चरिंग जोन।
मुआवजे की गणना कैसे की जाती है?
मुआवजे का फैसला सेक्शन 26 से 30 के तहत किया जाता है। कलेक्टर को सबसे पहले जमीन की मार्केट वैल्यू का हिसाब लगाना होगा। यह वैल्यू सर्कल रेट, इलाके में वैसी ही जमीन की औसत बिक्री कीमत, या कुछ PPP और प्राइवेट प्रोजेक्ट्स में तय की गई रकम में से जो भी सबसे ज्यादा हो, उसके आधार पर तय की जाएगी। फिर इस वैल्यू को शहरी इलाकों के लिए 1.0 और ग्रामीण इलाकों के लिए 2.0 के फैक्टर से गुणा किया जाता है। मुआवजे में जमीन से जुड़ी सभी चीजों, जैसे घर, कुएं, पेड़ और खड़ी फसल की कीमत भी शामिल होनी चाहिए।
पुनर्वास और पुनर्स्थापना के नियम
सेक्शन 16 से 19 के तहत, यह एक्ट मानता है कि जमीन अधिग्रहण से न केवल प्रॉपर्टी के मालिक प्रभावित होते हैं, बल्कि वे परिवार भी प्रभावित होते हैं जिनकी आजीविका उस जमीन पर निर्भर करती है। SIA के बाद, जमीन पर निर्भर सभी परिवारों का विस्तृत सर्वे किया जाता है। इसके बाद एक पुनर्वास और पुनर्स्थापना (R&R) योजना तैयार की जाती है। इस योजना में बताया जाता है कि हर प्रभावित परिवार को क्या मिलेगा, पुनर्स्थापना वाले इलाकों में क्या सुविधाएं दी जाएंगी, और पुनर्वास प्रक्रिया की पूरी समय-सीमा क्या होगी। फिर इस योजना को जनता के सामने रखा जाता। साथ ही, परिवारों की शिकायतों को सुनने के लिए जन-सुनवाई आयोजित की जाती है।










































