LPG संकट का कड़वा सच: 60% आयात पर टिकी है देश की रसोई; क्या घरेलू रिफाइनरियां रातों-रात भर पाएंगी आपूर्ति की खाई?

0

LPG Crisis से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (ESMA) के तहत देश की सभी रिफाइनरियों को आदेश दिया है कि वे LPG का उत्पादन बढ़ाएं। हालांकि, बड़ा सवाल यही है कि भारत कितना उत्पादन करता है और कितना कर सकता है। आयात पर निर्भरता कितनी है और अगर भारत में उत्पादन बढ़ाया जाए, तो आखिर यह बनती कैसे है, क्या इसका उत्पादन रातों-रात बढ़ाया जा सकता है?

हर 10 में से 6 सिलेंडर आयात पर निर्भर

भारत में रसोई गैस की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन घरेलू उत्पादन उतनी तेजी से नहीं बढ़ पाया। यही वजह है कि देश को LPG की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाना पड़ता है। केंद्रीय पेट्रोलियम और वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में सालाना LPG खपत करीब 31 से 33 मिलियन टन के आसपास है। इसमें से लगभग 60 प्रतिशत गैस आयात के जरिए आती है। आसान शब्दों में कहें, तो देश में इस्तेमाल होने वाले हर 10 सिलेंडर में से करीब 6 सिलेंडर विदेशी सप्लाई पर निर्भर होते हैं। यही निर्भरता किसी भी वैश्विक संकट के समय भारत की चिंता बढ़ा देती है।

पश्चिम एशिया में युद्ध ने कैसे बढ़ाया संकट?

भारत के LPG आयात का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देश भारत के प्रमुख सप्लायर हैं। इनसे आने वाली गैस का बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्री मार्ग से गुजरता है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते फिलहाल क्रूड और गैस की सप्लाई इस रास्ते से बंद हो गई है। यह रास्ता ग्लोबल ऑयल और गैस सप्लाई का 20% हिस्सा रखता है। इसकी वजह से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का संकट खड़ा होता दिख रहा है। इस रास्ते से आपूर्ति बाधित होने की वजह से LPG सहित कई ऊर्जा उत्पादों की सप्लाई चेन डिस्टर्ब हो जाती है।

सरकार ने उठाए आपात कदम

संभावित संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। कंपनियों से कहा गया है कि वे घरेलू बाजार की जरूरत को प्राथमिकता दें और प्रोपेन-ब्यूटेन जैसे फीडस्टॉक का अधिकतम उपयोग करें। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की आपूर्ति बाधित न हो। जरूरत पड़ने पर आयात के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश भी की जा रही है।

कैसे बनती है LPG?

LPG यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का मिश्रण होती है। यह गैस दो प्रमुख स्रोतों से मिलती है। प्राकृतिक गैस की प्रोसेसिंग और कच्चे तेल की रिफाइनिंग। जब प्राकृतिक गैस को प्रोसेस किया जाता है, तो उसमें मौजूद अलग-अलग हाइड्रोकार्बन को अलग किया जाता है, जिनमें से प्रोपेन और ब्यूटेन मिलकर LPG बनाते हैं। इसी तरह कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान भी यह गैस बाय-प्रोडक्ट के रूप में निकलती है। इसके बाद गैस को दबाव के जरिये तरल में बदला जाता है, ताकि इसे सिलेंडर या टैंकर में आसानी से स्टोर और ट्रांसपोर्ट किया जा सके।

भारत में कितना होता है उत्पादन?

भारत में LPG का उत्पादन मुख्य रूप से रिफाइनरियों और प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग प्लांट्स से होता है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, ओएनजीसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। हाल के वर्षों में देश में सालाना LPG उत्पादन करीब 12 से 13 मिलियन टन के आसपास रहा है। यानी घरेलू उत्पादन कुल मांग का लगभग 40 प्रतिशत ही पूरा कर पाता है। मांग में लगातार वृद्धि के कारण आयात पर निर्भरता बनी हुई है।

क्या रातों-रात बढ़ सकता है उत्पादन?

रिफाइनिंग जटिलताओं के चलते LPG का उत्पादन तुरंत बढ़ाना आसान नहीं है। इसका कारण यह है कि LPG रिफाइनिंग प्रक्रिया का मुख्य उत्पाद नहीं बल्कि बाय-प्रोडक्ट होता है। इसका मतलब है कि LPG की मात्रा सीधे-सीधे कच्चे तेल की रिफाइनिंग और गैस प्रोसेसिंग पर निर्भर करती है। अगर रिफाइनिंग क्षमता या कच्चे तेल की प्रोसेसिंग बढ़ेगी तभी LPG का उत्पादन बढ़ सकता है। इसलिए सरकार के निर्देश से उत्पादन में कुछ बढ़ोतरी संभव है, लेकिन इससे आयात पर निर्भरता तुरंत खत्म होना मुश्किल माना जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here