भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने अब तक अपनी कंपनी रिलायंस जियो (Reliance Jio) के आईपीओ के बारे में कोई घोषणा नहीं की है। लेकिन निवेशकों का कहना है कि मोबाइल टैरिफ में हाल में हुई बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि कंपनी जल्दी ही लिस्टिंग की तैयारी में है। ग्लोबल इनवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म जेफरीज (Jefferies) का मानना है कि 2025 में कंपनी की 112 अरब डॉलर की वैल्यूएशन पर धमाकेदार लिस्टिंग हो सकती है। मोबाइल टैरिफ में बढ़ोतरी के साथ ही कंपनी अपने 5G कारोबार को भुनाने की दिशा में आगे बढ़ी है। विश्लेषकों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज की अगले महीने संभावित एजीएम में जियो की आईपीओ के बारे में तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
जेफरीज के भास्कर चक्रवर्ती ने कहा कि पहले जियो टैरिफ बढ़ाने में पहल नहीं करती थी लेकिन हाल में वह टैरिफ बढ़ोतरी में सबसे आगे रही। मॉनिटाइजेशन और सब्सक्राइबर मार्केट शेयर बढ़ाने पर फोकस करना इस बात का संकेत है कि कंपनी कैलेंयर ईयर 2025 में लिस्टिंग की तरफ बढ़ रही है।
जियो को बाजार में लिस्टिंग करने के लिए अंबानी के पास दो विकल्प हैं। पहला विकल्प है आईपीओ और दूसरा जियो फाइनेंशियल सर्विसेज (जेएफएस) जैसा स्पिन-ऑफ। संस्थागत निवेशक स्पिन-ऑफ रूट का पक्ष लेते हैं क्योंकि होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट लिस्टेड एंटिटी पर लागू नहीं होगी। लेकिन आईपीओ से लिस्टिंग के बाद रिलायंस को जियो पर मैज्योरिटी कंट्रोल बनाए रखने में मदद मिलेगी।
क्या हैं विकल्प
जेफरीज ने एक रिपोर्ट में कहा कि सबसे बड़ी चिंता होल्डको डिस्काउंट को लेकर है। यह भारत में 20-50% है। आईपीओ के मामले में बड़े खुदरा निवेशक जुटाना एक और चिंता का विषय है। स्पिन-ऑफ पर जियो में कम नियंत्रण हिस्सेदारी को स्पिन-ऑफ के बाद निजी इक्विटी फंड द्वारा पेश किए गए शेयरों का एक हिस्सा खरीदकर पूरा किया जा सकता है। यदि रिलायंस स्पिन-ऑफ का विकल्प चुनती है और स्टॉक एक्सचेंजों की प्राइस डिस्कवरी प्रोसेस के जरिए जियो को लिस्ट करती है, तो रिलायंस के शेयरधारकों को जियो में उनकी आनुपातिक हिस्सेदारी प्राप्त होगी। इसे बाद में आरआईएल की 66.3% हिस्सेदारी के मुताबिक एडजस्ट किया जाएगा।










































