आतंक का दूसरा नाम टीआरएफ… एलईटी के इस संगठन की फंडिंग से लेकर नेटवर्क तक को समझिए

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नई दिल्ली: लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक सहयोगी संगठन है, जिसका नाम है द रेजिस्टेंस फोर्स (TRF)। यह संगठन 2019 में अनुच्छेद 370 के हटने के बाद सामने आया था। 2023 में गृह मंत्रालय (MHA) ने इसे यूएपीए (UAPA) के तहत बैन कर दिया। शुरुआत में TRF ने 2025 में पहलगाम में हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें पर्यटक और एक नौसेना अधिकारी भी शामिल थे। लेकिन बाद में वैश्विक स्तर पर फंसने के डर से TRF ने सोशल मीडिया पर इस दावे को वापस ले लिया।

टीआरएफ पर कैसे फेल हुआ पाकिस्तान

पाकिस्तान की दखल की वजह से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने TRF का नाम लेने से इनकार कर दिया था। क्योंकि, पाकिस्तान इस समय इसका अस्थायी सदस्य है और फिलहाल इसकी अध्यक्षता भी कर रहा है। इसके बाद नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA), जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों ने TRF पर नए दस्तावेज पेश किए। इन दस्तावेजों में LeT के मुख्य सरगनाओं, उनके ऑनलाइन नेटवर्क और सैनिकों और नागरिकों पर पहले हुए हमलों में उनकी भूमिका का विवरण दिया गया है।

युक्त राष्ट्र में मजबूत हो सकता है केस

अमेरिका ने TRF को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। इसका मतलब है कि अमेरिका में TRF से जुड़ी सभी संपत्तियां जब्त कर ली जाएंगी। साथ ही, अमेरिकी नागरिकों को इस संगठन के साथ किसी भी तरह का लेन-देन करने से मना किया गया है। अगर कोई ऐसा करता है, तो उस पर भी कार्रवाई हो सकती है। अमेरिका ने यह भी कहा है कि जो लोग TRF को मदद करेंगे, उन्हें अमेरिका में आने नहीं दिया जाएगा। अमेरिका के काउंटर-टेरर अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से 1267 यूएन सैंक्शंस कमेटी में भारत का मामला मजबूत होगा।
NIA की जांच से पता चला है कि पाकिस्तान में बैठे LeT के हैंडलर जम्मू-कश्मीर में हमलों की साजिश रच रहे थे। वे TRF के नाम का इस्तेमाल इसलिए कर रहे थे, ताकि वे पकड़े न जाएं और उन पर कोई शक न करे। वे यह दिखावा करना चाहते थे कि उनका इन हमलों से कोई लेना-देना नहीं है।

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