क्या होती है धारा 143(2) का स्क्रूटनी नोटिस? इन 5 वजहों से टैक्स विभाग के रडार पर आ सकते हैं आप

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आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने के बाद बहुत से लोग राहत की सांस लेते हैं कि उनका इस साल का काम पूरा हो गया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ITR दाखिल करने के बाद भी कई बार टैक्सपेयर्स के पास इनकम टैक्स विभाग की तरफ से कुछ नोटिस आते हैं, जिनमें से सबसे गंभीर माना जाता है धारा 143(2) का स्क्रूटनी नोटिस (Scrutiny Notice)। आम भाषा में कहें तो ‘स्क्रूटनी’ का मतलब होता है आपके द्वारा दी गई जानकारियों की गहराई से जांच करना। जब टैक्स विभाग को लगता है कि आपके रिटर्न में कोई गड़बड़ी है या आपने अपनी पूरी कमाई नहीं दिखाई है, तो वह इस धारा के तहत नोटिस भेजकर आपसे जवाब और सबूत मांगता है।

यह नोटिस मिलने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपने कोई अपराध कर दिया है या आप पर जुर्माना लग ही गया है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि टैक्स विभाग आपके द्वारा भरे गए आंकड़ों को री-चेक करना चाहता है। इस नोटिस के जरिए असेसिंग ऑफिसर (AO) आपको अपने दावों, कटौतियों (Deductions) और आय के स्रोतों को साबित करने के लिए दस्तावेज पेश करने को कहता है। अगर आपके पास अपनी आय और खर्चों के सही कागजात हैं, तो आप इसका आसानी से जवाब दे सकते हैं। लेकिन अगर आप जानबूझकर जानकारियां छुपाते हैं, तो यह नोटिस आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है।

क्यों स्क्रूटिनी की नजर में आते हैं आप?

अगर आपके बैंक खातों में भारी-भरकम रकम जमा हुई है या आपने कोई बड़ी प्रॉपर्टी खरीदी है, लेकिन आईटीआर में अपनी सालाना आय बहुत कम दिखाई है, तो सिस्टम इस विसंगति को तुरंत पकड़ लेता है।आजकल टैक्स विभाग के पास आपके हर वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड ‘एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट’ (AIS) में होता है। यदि आपके शेयर बाजार का मुनाफा, म्यूचुअल फंड की कमाई या बैंक ब्याज का डेटा आपके ITR फॉर्म से मैच नहीं खाता, तो नोटिस आना तय है।

टैक्स बचाने के चक्कर में कई लोग बिना किसी निवेश के धारा 80C, 80D या HRA (मकान किराया भत्ता) का फर्जी दावा कर देते हैं। विभाग जब ऐसे दावों की रैंडम जांच करता है, तो सबूत न होने पर धारा 143(2) का नोटिस थमा देता है।

अगर आपने एक ही वित्तीय वर्ष में दो अलग-अलग कंपनियों में काम किया है और आईटीआर भरते समय पुरानी कंपनी की सैलरी की जानकारी छुपा ली है, तो फॉर्म-26AS के मिलान के दौरान यह पकड़ में आ जाता है।

पिछले वर्षों की तुलना में यदि इस साल आपकी आय लगभग समान है, लेकिन आपने बहुत बड़ा टैक्स रिफंड क्लेम कर दिया है, तो टैक्स विभाग को आपके रिटर्न पर संदेह होता है और वह इसकी स्क्रूटनी शुरू कर सकता है।

कब तक इनकम टैक्स भेज सकता है नोटिस?

धारा 143(2) का नोटिस भेजने की एक निश्चित समय-सीमा होती है। जिस वित्तीय वर्ष में आपने अपना आईटीआर दाखिल किया है, उसके समाप्त होने के बाद अगले 3 महीनों के भीतर ही विभाग यह नोटिस भेज सकता है। अगर आपके पास ऐसा कोई नोटिस आता है, तो उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। तय समय के भीतर अपने सीए (CA) या टैक्स एक्सपर्ट की मदद से मांगी गई सभी जानकारियां और दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर दें। सही और समय पर दिया गया जवाब आपको किसी भी प्रकार के जुर्माने या कानूनी कार्यवाही से पूरी तरह बचा सकता है।

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