वारासिवनी(पद्मेश न्यूज)। वारासिवनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत दीनी में बीते दिनों बाघ की आमद से ग्रामीणों में काफ ी डर का माहौल बना हुआ है। जहां पर ग्रामीण सतर्कता से समूह बनाकर अपने कार्यों के लिए आना जाना कर रहे हैं। हालांकि मौके पर वन विभाग के द्वारा भी निगरानी की जा रही है परंतु बाघ की उपस्थिति वर्तमान क्षेत्र में ही बताई जा रही है। जिसको लेकर ग्रामीणों में डर बना हुआ है और लोग नदी क्षेत्र में जाने के लिए संकोच कर रहे हैं। इस कारण से लोगों के मूलभूत दैनिक कार्यों में काफ ी प्रभाव पड़ रहा है जिसको लेकर ग्रामीणों के द्वारा वन विभाग से हिंसक वन्य प्राणी बाघ को अन्यंत्र स्थान पर ले जाने या जंगल क्षेत्र में खदेडऩे की मांग की जा रही है। जिससे कि ग्रामीण अपने दैनिक कार्यों को आसानी से बिना किसी भय के कर सके।
बाघ ने दो मवेशियों पर कर चुका है हमला
ग्राम पंचायत दिनी के मोक्षधाम वाला राजस्व क्षेत्र दक्षिण सामान्य वन मंडल वन परिक्षेत्र वारासिवनी के कक्ष क्रमांक ५२८ से लगता है। जहां बीते दिनों बाघ के द्वारा उक्त राजस्व क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए बाबा उपवंशी की निजी गौशाला में घुसकर रात्रि के समय मवेशी के शिकार करने का प्रयास किया गया। किंतु उपस्थित मवेशियों के कोलाहल के माध्यम से बाघ युक्त स्थान से शिकार छोडक़र भाग गया। घटना की जानकारी सुबह पता चली जब गौशाला में गए तो मवेशी बीमार था और उसके गले पर बाघ के दांत के निशान थे जहां से रक्त का रिसाव हो रहा था। जिसकी सूचना उनके द्वारा वन विभाग को दी गई थी इसके बाद ग्राम के मवेशी उसी दिन सुबह चरने के लिए नदी की तरफ गए थे। जहां गोहन के झुंड में बाघ के द्वारा शाम करीब ५ बजे राजेंद्र पंचेश्वर के मवेशी का शिकार कर लिया गया। जिसकी जानकारी लगते ही ग्राम में भारी दहशत का वातावरण बन गया था जहां पर वन विभाग के द्वारा उपस्थित होकर घटना का निरीक्षण करने के बाद कैमरे लगाकर घटना हिंसक वन्य प्राणी बाघ के द्वारा किए जाने की पुष्टि की गई। इसके बाद तीन दिनों तक बाघ के द्वारा शिकार को खाया गया एवं वर्तमान में उपस्थिति उक्त क्षेत्र में ही होना बताया जा रहा है। जिसको लेकर समूह के रूप में अपने कार्यों के लिए लोग नदी क्षेत्र की ओर आना जाना कर रहे हैं।
शाम के पहले ही लोग लौट रहे अपने अपने घर रास्तो पर पसरा सन्नाटा
ग्राम दीनी से करीब एक से डेढ़ किलोमीटर दूर मोक्षधाम स्थित है तो वहीं आगे नदी भी है। युक्त क्षेत्र में बाघ की उपस्थिति बताई जा रही है जिसको लेकर वन विभाग के द्वारा वहां पर निगरानी व अन्य कार्य किया जा रहे हैं। परंतु लोगों के अंदर भय कम होने का नाम नहीं ले रहा है ,जहां पर लोग समूह के रूप में अपने कार्यों के लिए जरूरी आवश्यकताओं पर ही आना जाना कर रहे हैं। अन्यथा लोग उक्त स्थान पर जाने के लिए संकोच कर रहे हैं ,ऐसे में नदी में नहाने कपड़े धोने मवेशी ढूंढने मवेशियों को चराने या खेत बाड़ी जैसे कार्य के लिए लोग आना भी पसंद नहीं कर रहे है। जहां पर घटना के बाद से सन्नाटा पसरा हुआ है तो वहीं ग्राम के ही बाहरी क्षेत्र में रहने वाले लोग भी अपने घरों का दरवाजा बंद कर अपने कार्य संपादित कर रहे हैं। जो शाम होने के पहले अपने घरों में आ जाते हैं अंधेरे में कहीं नहीं जा रहे हैं इस प्रकार लोगों में भय बना हुआ है।
मवेशी का बाघ ने शिकार कर उसे खा लिया गया है- राकेश उपवंशी
ग्रामीण राकेश उपवंशी ने बताया कि घटना की जानकारी लगने पर मेरे द्वारा आकर देखा गया तो एक मवेशी का बाघ के द्वारा शिकार कर उसे खा लिया गया था और एक मवेशी जिंदा है जिसके गले में बाघ के दांत के निशान हैं। जिसे हमारे द्वारा देखा गया और इस घटना के बाद से ग्राम में दहशत बनी हुई है यही पास में हमारे चाचा बाबा उपवंशी की गौशाला है जहां पर बाघ को देखा गया बताते हैं। विभाग के द्वारा कैमरे भी लगाया गया था वर्तमान में लोगों में बहुत ज्यादा भय है इधर लोग लकड़ी चुनने ,जानवर चराने ,मवेशी धुलने सहित अन्य विभिन्न कार्यों के लिए भी लोग बहुत कम आना जाना कर रहे हैं। पहले रोजाना लोग इधर आते जाते रहते थे मवेशी लेकर भी लोग चराने आते थे बाघ पहले भी देखा था और अभी फि र देखा है । हम चाहते हैं कि वन विभाग इसे सुरक्षित स्थान पर लेकर जाए ताकि हमें कोई समस्या ना हो।
बाघ ने गौशाला में घुसकर मवेशी पर शिकार करने का किया प्रयास-उत्तमानंद उपवंशी
उत्तमानंद उपवंशी ने बताया कि हिंसक वन्य प्राणी बाघ ने रात में हमारी गौशाला में घुसकर शिकार करने का प्रयास किया। इसमें बछिया को गर्दन पर वार किया परंतु मारा नहीं क्योंकि वहां पर बाकी मवेशियों में भगदड़ मच गई तो बाघ छोडक़र भाग गया। उसी दिन मवेशियों का गोहन जो चरने के लिए गया हुआ था जो शाम को ५ बजे वापस हो रहा था तो उस गोहन में बाघ ने हमला कर राजेश पंचेश्वर की गाय का शिकार कर लिया। जिसे बाघ के द्वारा रात्रि में खाया गया और तीन दिन तक वही शिकार को खाया गया। इस प्रकार उसकी तीन दिन तक यही उपस्थिति थी। वन विभाग वालों के द्वारा रोजाना गस्ती कर ग्रामीणों को समझाइए दी जा रही है उक्त क्षेत्र में जाने से सभी को मना कर दिया गया है और मामले में पंचनामा कार्यवाही भी की गई है। हिंसक वन्य प्राणी की बाघ के रूप में पहचान हो गई है और अभी शिकार नही होने से थोड़ी दहशत कम है किंतु लोग समूह बनाकर जा रहे हैं। इसमें बताया जाता है कि उक्त बाघ के द्वारा इलाका नहीं छोड़ा गया है लोग सतर्क होकर आना जाना कर रहे है।
बाघ होने की पुष्टि हो गई कैमरा लगाया गया है जिसमें बाघ का पता चला-आलोक पटले
वनरक्षक आलोक पटले ने बताया कि हमें जानकारी लगी शिकार किया गया है तो अधिकारी के मार्गदर्शन पर स्टाफ के साथ यहां पर आकर आसपास घूमा गया तो पद मार्क देखे गये। जिससे बाघ की पुष्टि हो गई परंतु फि र भी कैमरा लगाया गया जिसमें बाघ का पता चला। इसमें हिंसक वन्य प्राणी के द्वारा बबलू उपवंशी की गाय के शिकार का प्रयास किया गया राजेंद्र पंचेश्वर की गाय का शिकार किया गया है। अभी हमारे द्वारा दिन और रात में अलग अलग गश्ती की जा रही है,वहीं यह जो राजस्व क्षेत्र है जिसके सफ ाई कर रहे है। यह हमारे जंगल कक्ष क्रमांक ५२८ से लगा हुआ राजस्व क्षेत्र है यही मौके से १०० मीटर की दूरी पर बाघ ने शिकार किया था।










































