शहर की कृषि उपज मंडी परिसर में बारिश के मौसम में लाखों का सरकारी धान बारिश की वजह से भीग कर खराब हो रहा है। दरअसल, म.प्र. वेयर हाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कारपोरेशन के द्वारा इस धान की सुरक्षा की जानी है किन्तु वेयर हाउस प्रबंधन के जिम्मेदार अफसर और कर्मचारियों ने बारिश से धान को बचाने के लिए कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं किए है। बता दें कि धान की सुरक्षा के लिए विभाग ने केवल दिखावे मात्र के लिए ऊपरी तौर पर त्रिपाल ढांक रखा है जबकि निचली सतह से धान भीग रहा है। मालूम रहे कि यह धान समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदा गया है गोदाम के अभाव में वेयर हाउस ने मंडी परिसर में ही धान का भंडारण करवाया है। इधर, मिलर्स भी अपनी सुविधा के अनुसार धान का उठाव कर रहे है जिस कारण बड़ी मात्रा में मंडी में धान रखा हुआ है।
अगर, मंडी परिसर में भंडारित धान के बोरों की जांच की जाती तो करीब हजारों की संख्या में ऐसे बोरे मिलेगे जो पानी से खराब हो चुके है और धान अंकुरित हो रहा है। अब विभागीय अधिकारी इस बर्बादी के लिए किसे दोषी मानते है यह विभागीय जांच का मामला है किन्तु धान की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही बरती गई है इससे कतई इंकार नहीं किया जा सकता। सूत्रों की माने तो मंडी परिसर में धान के भंडारण से धान के बोरों की चोरी भी हो रही है। बताया जाता है कि धान की सुरक्षा में तैनात कर्मचारी ही धान की चोरी में संलिप्त है। यह मामला भी धान की सुरक्षा से भी जुड़ा ही हुआ है। खैर, विभाग ने धान की सुरक्षा के नाम पर मोटी धनराशि खर्च की है ऐसी जानकारी भी सामने आ रही है मगर, इस राशि का केवल कागजों में ही उपयोग होना समझ में आ रहा है। ज्ञात हो कि वेयर हाउस प्रबंधन ने शुरू से ही धान की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती है। जब धान की खरीदी पूरी हुई और वेयर हाउस को धान का भंडारण करना था तभी सुरक्षा के बंदोबस्त किए जाने थे किन्तु ऐसा नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि म.प्र. वेयर हाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कारपोरेशन द्वारा अपने वेयर हाउस या उनकी निगरानी में सुरक्षित रखे जाने वाले खाद्यान्न में अगर किसी प्रकार की कमी आती है तो इसमें सरकारी वेयर हाउस को छूट दी जाती है जबकि प्राईवेट गोदाम संचालक से वसूली कर ली जाती है सरकार से मिलने वाली इसी छूट का अधिकारी गलत तरीके से फायदा उठाते है और धान की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही बरतते हैं।









































