बौद्ध इंटरनेशनल नेटवर्क ने बौद्ध विरासत के संरक्षण की करी मांग,

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अंबेडकर चौक से निकाली रैली, कलेक्टर कार्यालय सौपा ज्ञापन
नागपुर के बौद्धकालीन स्तूप और भंडारा के पवनी स्तूप के संरक्षण का मुद्दा उठाया,
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध-पाली विश्वविद्यालय की स्थापना की भी मांग
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पदमेश न्यूज़। बालाघाट।बौद्ध विरासत एवं ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण की मांग को लेकर मंगलवार को बौद्ध इंटरनेशनल नेटवर्क के नेतृत्व में रैली निकाली गई। अंबेडकर चौक से शुरू हुई रैली विभिन्न मार्गों से होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंची, जहां संगठन की ओर से ज्ञापन सौंपकर बौद्ध धरोहरों के संरक्षण तथा नागपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर के बौद्ध एवं पाली अध्ययन संस्थान की स्थापना की मांग की गई।ज्ञापन में कहा गया है कि नागपुर स्थित बौद्धकालीन अडम स्तूप तथा भंडारा जिले के पवनी स्तूप जीर्णावस्था में पड़े हुए हैं। पवनी स्तूप पर मंदिर निर्माण किए जाने और वहां खेती किए जाने का उल्लेख करते हुए बौद्ध ऐतिहासिक स्थलों की स्थिति पर चिंता जताई गई है। संगठन का आरोप है कि देशभर में कई बौद्ध धरोहरों को ब्राह्मणीकरण किए जाने का कार्य जारी है, जबकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग इन विरासत स्थलों के संरक्षण के लिए पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा है।

नागपुर को बौद्ध ज्ञान परंपरा से जोड़ने की मांग
ज्ञापन में कहा गया कि नागपुर केवल एक शहर नहीं, बल्कि आधुनिक बौद्ध पुनर्जागरण की ऐतिहासिक भूमि है। दीक्षाभूमि से डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने बौद्ध धम्म को सामाजिक न्याय, प्रज्ञा और मानवतावादी परिवर्तन की दिशा दी। ऐसे ऐतिहासिक शहर में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध एवं पाली विश्वविद्यालय की स्थापना को संगठन ने भारत की बौद्ध ज्ञान-परंपरा को वैश्विक अकादमिक मंच से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।संगठन ने विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव को विलंबित, कमजोर अथवा निरस्त किए जाने के किसी भी प्रयास को बौद्ध एवं पाली ज्ञान-विरासत के साथ अन्याय बताया। साथ ही निर्णय प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, प्रस्ताव को सार्वजनिक करने तथा नागपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर के बौद्ध-पाली अध्ययन, शोध, अनुवाद एवं सांस्कृतिक संवाद का संस्थान स्थापित करने की मांग की।

दीक्षाभूमि के लिए 20 एकड़ जमीन की मांग
ज्ञापन में दीक्षाभूमि के विकास का मुद्दा भी उठाया गया। संगठन के अनुसार दुनिया भर से बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी प्रतिवर्ष दीक्षाभूमि पहुंचते हैं, लेकिन पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण पार्किंग, शौचालय, साहित्य बिक्री केंद्र, बाहर से आने वाले अनुयायियों के ठहरने की व्यवस्था, भिक्षु प्रशिक्षण केंद्र, ट्रेनिंग सेंटर और धम्म प्रचार केंद्र जैसी सुविधाओं की कमी बनी हुई है।ज्ञापन में माता कचहरी की 16.5 एकड़ जमीन तथा कॉटन रिसर्च इंस्टीट्यूट की 3.5 एकड़ जमीन, कुल 20 एकड़ भूमि, दीक्षाभूमि के सर्वांगीण विकास के लिए विधिसम्मत प्रक्रिया से हस्तांतरित करने की मांग की गई है। बताया गया कि संबंधित भूमि का मामला उच्च न्यायालय नागपुर में विचाराधीन है।

बोधगया टेंपल एक्ट 1949 समाप्त करने की मांग
ज्ञापन में बोधगया महाबोधि महाविहार से संबंधित बोधगया टेंपल एक्ट 1949 को समाप्त करने की मांग भी की गई। संगठन ने इसे संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के संदर्भ में उठाया और एक्ट की संवैधानिक वैधता पर सवाल खड़े किए।इसके अलावा बौद्ध गया टेंपल एक्ट 1949 को रद्द करने, नागपुर के अडम स्तूप और भंडारा जिले के पवनी स्तूप को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से संरक्षित कराने तथा बौद्ध विरासतों की सुरक्षा की मांग की गई।

धरोहरों के संरक्षण की मांग, आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन में बौद्ध ऐतिहासिक स्थलों एवं विरासतों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि बौद्ध विरासतों के संरक्षण की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।इस दौरान प्रदेश प्रभारी रामदास ठवकर, जिलाध्यक्ष नर्मदा नागवंशी, सदाशिव हरिणखेड़े, रुपसिंह उईके, संतोष उईके,विमल कुमार,सरीता उक्के, राखी दमाहे, आरज़ू डूंडे, मोनालिसा मेश्राम, कैवल्या देशभ्रतार,राजू खोबरागड़े, विजय कुमार उक्के, उषा गजभिये, विनोद बागड़े, अजय वासनिक, प्रफ्फुल जी, मुरलीधर जी, संजय जी, छन्नुलाल वरकड़े, सूरजलाल उईके एवं अन्य साथी गण रैली प्रदर्शन में उपस्थित रहे।

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