रूस-यूक्रेन के बीच बुधवार को तुर्की में होगी शांति वार्ता- जेलेंस्की का ऐलान, जानें कहां फंसा पेंच

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रूस और यूक्रेन के बीच बुधवार, 23 जुलाई को नई शांति वार्ता होगी. यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने सोमवार (यूक्रेन के समयानुसार) को इसकी घोषणा की. बुधवार को होने जा रही वार्ता पहले की उन दो दौरों की वार्ता की अगली कड़ी है, जिसमें उनके युद्ध को समाप्त करने और शांति समझौते पर पहुंचने के रास्ते में बहुत कम प्रगति हुई थी. तुर्की सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह वार्ता इस्तांबुल में होगी. यह वही जगह है जहां पिछली वार्ता मई और जून में बिना किसी सफलता को हासिल किए हुई थी.

एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को समझौते पर सहमत होने या प्रतिबंधों का सामना करने के लिए 50 दिन का समय देकर दबाव बढ़ा दिया है. वहीं रूस ने शांति समझौते पर सहमति को लेकर बहुत कम उम्मीद जताई है. रूस की इस प्रतिक्रिया के कुछ घंटे बाद ही जेलेंस्की ने तीसरे दौर की वार्ता का ऐलान किया.

जेलेंस्की ने सोमवार को अपने दैनिक संबोधन (हर दिन दिए जाने वाले ब्रीफ) में कहा, “आज, मैंने (यूक्रेनी सुरक्षा परिषद प्रमुख) रुस्तम उमेरोव के साथ एक्सचेंज और तुर्की में रूसी पक्ष के साथ एक और बैठक की तैयारियों पर चर्चा की. उमेरोव ने बताया कि बैठक बुधवार के लिए निर्धारित है.” जेलेंस्की वे बीते विकेंड ही नई वार्ता का प्रस्ताव रखा था और उन्होंने कहा था कि अधिक डिटेल्स मंगलवार को जारी किए जाएंगे. रूस ने अपनी तरफ से तुरंत नई वार्ता की पुष्टि नहीं की है.

फरवरी 2022 में रूस के चौतरफा आक्रमण के बाद से युद्ध जारी है. दोनों प्रतिद्वंद्वी देश 16 मई और 2 जून को इस्तांबुल में शांति समझौते पर वार्ता के लिए मिले थे. इससे पहले ट्रंप ने भी समझौते के लिए दबाव बढ़ाया था, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. अब तक की वार्ता में यूक्रेन और रूस केवल कैदियों की अदला-बदली पर सहमत हुए हैं. रूस ने तब से यूक्रेन पर तीव्र हवाई हमले शुरू कर दिए हैं और अधिक सीमावर्ती क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है.

रूस ने मांग की है कि यूक्रेन क्रीमिया के शीर्ष पर बसे चार क्षेत्रों को छोड़ दे, जिस पर रूस ने 2014 में कब्जा कर लिया था. साथ ही रूस ने यूक्रेन पर नाटो सैन्य गठबंधन में शामिल होने के किसी भी विचार को छोड़ने पर भी जोर दिया है. हालांकि यूक्रेन ने मांगों को खारिज कर दिया है और संदेह जताया है कि क्या सच में रूस युद्धविराम चाहता है या ऐसी मांग भर रख रहा है जिसे पूरा नहीं किया जा सकता.

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